सामान्य से अलग व्यवहार या आदत हो सकता है पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, जानें कितने प्रकार के होते हैं ये और इसका इलाज

अगर आप भी खुद को पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की समस्या से दूर रखना चाहते हैं तो जानें क्या है इसके लक्षण और बचाव के तरीके।

Vishal Singh
अन्य़ बीमारियांWritten by: Vishal SinghPublished at: Dec 21, 2020Updated at: Dec 21, 2020
सामान्य से अलग व्यवहार या आदत हो सकता है पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, जानें कितने प्रकार के होते हैं ये और इसका इलाज

पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) एक प्रकार से सोचने, महसूस करने और व्यवहार में बदलाव होता है। इस दोरान व्यक्ति कई तरह के बदलावों से प्रभावित होता है जिसे आम भाषा में व्यक्तित्व विकार भी कहा जाता है। अक्सर लोगों को लगता होगा कि एक ही तरीके का व्यक्तित्व विकार होता है, जबकि एक्सपर्ट बताते हैं कि पर्सनेलिटी डिसऑर्डर एक नहीं बल्कि कई प्रकार के होते हैं। जी हां, एक्सपर्ट के मुताबिक, पर्सनेलिटी डिसऑर्डर अलग-अलग प्रकारों में व्यक्ति में दिखाई दे सकता है। ये एक ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज के अनुभव और व्यवहार का पैटर्न किशोरावस्था में होता है। वहीं, अगर इस स्थिति में इलाज के बिना कोई रहता है तो इसका आगे चलकर नुकसान मरीज को झेलना पड़ सकता है। तो आइए इस लेख के जरिए ये जानते हैं कि पर्सनैलिटी डिसऑर्डर के प्रकार क्या है और इसका इलाज क्या है। 

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पैरानॉयड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

पैरानॉयड पर्सनैलिटी डिसऑर्डर एक प्रकार का वो विकार है जिसमें मरीज को शक करने और मतलबी महसूस करने का अनुभव होने लगता है। इस दौरान पीड़ित को एक डर रहता है कि सामने वाला कोई भी व्यक्ति उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा दें। ऐसे में वो किसी पर भी भरोसा करने में सफल नहीं होते इसलिए उनकी आदत शक की बन जाती है। 

लक्षण

  • हर किसी पर शक करना। 
  • किसी पर भी भरोसा न करना।
  • खुद को दूसरों से चिड़चिड़ा रखना।

डिपेंडेंट पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

ये एक तरीके का वो विकार है जिसमें कोई भी खुद को असफल, कमजोर और हारा हुआ महसूस कर सकता है। डिपेंडेंट डिसऑर्डर में व्यक्ति को किसी भी चीज को सोचने, फैसला लेने और काम करने के लिए दूसरों का सहारा चाहिए होता है। इसकी मदद से ही वो किसी काम को कर पाते हैं या फैसला ले पाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उन्हें ये डर रहता है कि वो किसी भी चीज में हार या असफल न हो जाएं। 

लक्षण

  • दूसरों पर हमेशा निर्भर रहना।
  • बिना किसी की सलाह के काम न करना। 
  • खुद से फैसला लेने में असफल होना।
  • बात करने में हिचकिचाहट महसूस करना।
  • लोगों के सामने शर्म या डर का अनुभव करना।
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एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

एंटीसोशल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर सामाजिक विकार का एक रूप है, इस स्थिति में वो सामाज में रहने वाले सभी लोगों के साथ धोखा कर सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उसे सब लोगों से कहीं न कहीं नफरत होने लगती है, यही वजह है कि मरीज अपने परिवार वालों से भी नाखुश नजर आता है। 

लक्षण

  • दूसरे लोगों से हमेशा नफरत करना।
  • किसी से भी झगड़ा शुरू करना। 
  • किसी की सलाह पर चिड़चिड़ापन दिखाना।

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर 

बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (Personality Disorder) को भावनात्मक रूप से अस्थिर विकार के रूप में जाना जाता है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति अपनी भावनाओं को समझने में मुश्किल महसूस कर सकता है। ऐसा आपको कुछ दिनों नहीं बल्कि लंबे समय तक नजर आ सकता है कि आपको भावनात्मक रूप से चोट पहुंच रही है। इसका निदान अगर समय पर न कराया जाए तो लोग इसकी गंभीर स्थिति में जाकर खुद की हत्या की भी कोशिश कर सकते हैं। 

लक्षण

  • भावनात्मक रूप से कमजोर दिखाई देना।
  • खुद को असफल महसूस करना। 
  • खुद से ही नफरत करना।
  • हर किसी चीज में खुद को दोषी बताना।

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ऑबसेसिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर

इस डिसऑर्डर (Disorder) वाले लोगों की जीवनशैली सभी लोगों से काफी अलग होती है, इस तरह के लोगों को आप आसानी से पहचान सकते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति हमेशा खुद को अकेला रखने की कोशिश करता है, न तो उसे परिवार में किसी से बात करनी अच्छी लगती है न ही किसी के साथ उठना-बैठना। यही वजह है कि इस समय वो खुद को पूरी तरह से अकेला रखना चाहता है। 

लक्षण

  • खुद को ज्यादा से ज्यादा अकेले रखना।
  • दूसरों से साथ ज्यादा न मिलना।
  • किसी से बात करने में नाराजगी व्यक्त करना।

इलाज

एक्सपर्ट बताते हैं कि ये कोई बहुत गंभीर समस्या नहीं है ये आजकल ज्यादातर लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन जरूरी है कि पीड़ित व्यक्ति जल्द से जल्द मनोचिकित्सक या किसी अच्छे एक्सपर्ट से इस बारे में बात करें। एक्सपर्ट के मुताबिक, मनोचिकित्सा के दौरान मरीज को कई चीजें सीखाने की जरूरत पड़ती है जिसकी मदद से उनके व्यवहार, अनुभव में बदलाव आते हैं। मनोचिकित्सक उन्हें दूसरे लोगों से रिश्ता जोड़ने और उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए तरीके बताते हैं और उन्हें बेहतर अनुभव करते हैं। इसके इलाज में मौजूद हैं ये विकल्प: 

  • मनोचिकित्सा थैरेपी।
  • व्यवहार चिकित्सा।
  • समूह चिकित्सा।

सेल्फ केयर टिप्स

शारीरिक गतिविधियां करें

एक्सरसाइज या शारीरिक गतिविधियां आपको शारीरिक रूप से ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी स्वस्थ रखने में मददगार होती है। रोजाना एक्सरसाइज करने से तनाव कम होता है साथ ही आप गहरी चिंता से खुद को बाहर रखने में कामयाब रहते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप रोजाना कम से कम 30 मिनट तक शारीरिक गतिविधियां करें। इसके साथ ही एक्सरसाइज आपको कई बीमारियों और संक्रमणों से बचाने का काम करती है। 

शराब का सेवन कम करें

एक्सपर्ट के मुताबिक, कई लोगों के साथ शराब का बहुत ज्यादा सेवन उनकी मानसिक समस्याओं को बढ़ाने का काम करती है। इसके लिए जरूरी है कि आप किसी भी तरीके के अल्कोहल के सेवन को कम से कम करें या बंद करें। 

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भावनाओं को व्यक्त करें

भावनाओं को हमेशा अपने अंदर ही दबाए रखना आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए बुरा असर हो सकता है, जिसके कारण आप गहरी चिंता या अवसाद की स्थिति में खुद को देख सकते हैं। इससे आप पर्सनैलिटी डिसऑर्डर की स्थिति का शिकार भी हो सकते हैं, जिससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपनी भावनाओं को दूसरों के साथ जरूर व्यक्त करें। इससे आप खुद को ज्यादा एक्टिव महसूस कर सकते हैं। 

परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं

परिवार और दोस्त आपके जीवन का एक अहम हिस्सा होते हैं, जितनी देर आप इन लोगों के साथ रहते हैं उतनी देर आप खुद को बेहतर महसूस कर सकते हैं। इसके साथ ही आप खुद को ज्यादा तनावमुक्त और एक्टिव महसूस कर सकते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक, दोस्तों और परिवार के सदस्यों में भावनाओं को व्यक्त करने से काफी हद तक फैसला लेने में मदद मिलती है। 

नियमित रूप से मनोचिकित्सक से मिलें

मनोचिकित्सक आपकी मानसिक स्थिति को आसानी से जान सकता है, इसलिए अगर आपको किसी भी डिसऑर्डर के लक्षण या संकेत दिखाई दें तो जरूरी है कि आप तुरंत मनोचिकित्सक से मिलें। साथ ही उन्हें अपने लक्षण या संकेतों के बारे में बताएं जिससे की आपका इलाज सही तरीके से किया जा सके।

(इस लेख में दी गई जानकारी इंस्टीट्यूट ऑफ साइकोमेट्रिक असेसमेंट एंड काउंसलिंग की अध्यक्ष और माइंड डिजायनर डॉक्टर कोमलप्रीत कौर से बातचीत पर निर्भर है)।

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