Fri Sep 11, 2026 | 07:39 PM IST

Medically Reviewed by Vandana Rajput , Antenatal and Postnatal Nutrition & Diabetes Educator

क्या डायबिटीज में मेटाबोलिज्म धीमा हो सकता है? मानें एक्सपर्ट की बात

डायबिटीज के मरीजों के लिए अपने मेटबॉलिज्म का स्तर संतुलित बनाए रखना बहुत जरूरी होता है। अगर ऐसा न किया जाए, तो उनकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ सकता है। जानें, डायबिटीज में मेटाबोलिज्म पर कैसा असर पड़ता है?

डायबिटीज एक घातक मेडिकल कंडीशन है। डायबिटीज होने का मतलब है कि ब्लड शुगर का स्तर संतुलित न होना। विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को अपने ब्लड शुगर के लेवल को मैनेज करने की जरूरत होती है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, जीवनशैली में अच्छी आदतों को नहीं अपनाते हैं, तो इसका उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। असंतुलित ब्लड शुगर की वजह से किडनी और हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम हो सकती है। बहरहाल, आपने देखा होगा कि डायबिटीज का बुरा असर मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है। माना जाता है कि क्या डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है? आइए, जानते हैं नोएडा सेक्टर 71 स्थित कैलाश अस्पताल में Consultant - Dietetics वंदना राजपूत से।

क्या डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म धीमा होता है?- Does Diabetes Affect Metabolism

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निश्चित रूप से डायबिटीज अपने आप में एक गंभीर समस्या है। इसे मैनेज करना बहुत जरूरी होता है। जहां तक सवाल इस बात का है कि क्या डायबिटीज में डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म धीमा हो सकता है? इस बारे में एक्सपर्ट का कहना है, "हां, यह सच है कि डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। खासकर, टाइप 2 डायबिटीज में यह देखने को मिलता है।" ऐसा क्यों होता है? इस बार में एक्सपर्ट आगे समझाते हैं, "डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से धीमा हो जाता है। इस स्थिति में हमारे सेल्स खाने की चीजों को एनर्जी में कंवर्ट नहीं कर पाता है। यहां तक कि डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर वजन भी बढ़ने लगता है।"

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डायबिटीज का मेटाबॉलिज्म पर असर

  • इंसुलिन रेजिस्टेंसः डायबिटीज में सेल्स इंसुलिन के प्रति सही तरह से प्रतिक्रिया नहीं कर पाते हैं। ऐसे में ग्लूकोज एनर्जी के लिए यूज नहीं होता है। नतीजतन, मेटबॉलिज्म धीमा हो जाता है।
  • वजन का बढ़नाः चूंकि, टाइप 2 डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म का गहरा कनेक्शन है। ऐसे में वेट गेन भी एक चुनौती बनकर उभरता है। आपने देखा होगा कि डायबिटीज की वजह से लोग अपना वजन कम करने में परेशानी महसूस करते हैं।

डायबिटीज में मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कैसे करें?

डायबिटीज में मेटबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए यहां बताए गए उपायों को अपना सकते हैं, जैसे-

  1. नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) करें।
  2. हाई प्रोटीन (High Protein) डाइट लें, जैसे मीट या अंडा।
  3. खुद को हाइड्रेटेड (Hydrated) रखें।
  4. अच्छी नींद जरूर लें।
  5. लंबे समय तक भूखे न रहें।

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निष्कर्ष

कुल मिलाकर, कहने की बात ये है कि डायबिटीज के मरीजों में मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। हालांकि, इसे सही लाइफस्टाइल और डाइट की मदद से सुधारा जा सकता है। हां, अगर तममा कोशिशों के बावजूद आपका मेटाबॉलिज्म बूस्ट नहीं होता है, तो इसकी वजह से वजन बढ़ने का रिस्क रहता है। ध्यान रखें कि मोटापा कई तरह की बीमारियों के जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए, अगर मेटबॉलिज्म बूस्ट न हो या वजन कंट्रोल करने में दिक्कत महससू करें, तो डॉक्टर से मिलने में देरी न करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • मेटाबॉलिज्म कैसे बढ़ाएं?

    मेटाबॉलिज्म बढ़ाने के लिए प्रोटीन युक्त आहार लें, खूब पानी पिएं, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, पर्याप्त नींद लें और स्ट्रेस को मैनेज करें। सही लाइफस्टाइल की मदद से मेटाबॉलिज्म को सुधारा जा सकता है।
  • क्या शुगर छोड़ने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है?

    शुगर छोड़ने से सेहत को कई तरह के फायदे होते हैं। इसमें हार्ट हेल्थ में सुधार होता है और ओवर ऑल हेल्थ बेहतर होती है। यहां तक कि शुगर छोड़ने से दांतों में कैविटी होने का जोखिम भी कम हो जाता है। इससे मेटबॉलिज्म भी तेजी से बूस्ट होता है।
  • मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा मेटाबॉलिज्म तेज है या धीमा?

    मेटाबॉलिज्म धीमा होने पर आपको कई लक्षण नजर आ सकते हैं, जैसे अचानक वजन बढ़ना, एनर्जी का स्तर ज्यादा होता है, भूख कम लगना या अक्सर भूख लगना आदि। आपको बता दें कि तेज या धीमा मेटाबोलिज्म शब्द का इस्तेमाल अक्सर किसी व्यक्ति की बेसल मेटाबोलिज्म दर की गति के आधार पर किया जाता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Jan 27, 2026 16:38 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jan 27, 2026 16:38 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Vandana Rajput

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