Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

प्रोसेस्ड फूड का बच्चों के मूड और व्यवहार पर पड़ता है गहरा असर, जानें कैसे?

प्रोसेस्ड फूड का बच्चों के मूड और व्यवहार पर बुरा असर पड़ता है। इसकी वजह से उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ता है और सीखने-समझने की शक्ति भी कमजोर हो जाती है।

बच्चे हमेशा से ही पौष्टिक चीजों को खाने के बजाय बर्गर, चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स जैसे प्रोसेस्ड फूड खाना ज्यादा पसंद करते हैं। असल में ये स्वादिष्ट होते हैं, लेकिन इनमें पोषक तत्वों की भारी कमी होती है। यही कारण है कि जो बच्चे अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, उनके शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। यह भी माना जाता है कि प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने वाले बच्चे अधिक चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स झेलते हैं। सवाल यह है कि क्या वाकई इस बात में कोई सच्चाई है? आइए, जानते हैं Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी की राय।

प्रोसेस्ड फूड का बच्चों के मूड पर असर

how processed foods influence children mood and behavior 01 (20)

बढ़ता चिड़चिड़ापन

विशेषज्ञों की मानें, तो प्रोसेस्ड फूड में रिफाइंड शुगर की मात्रा काफी ज्यादा होती है। जब आप शुगर का सेवन करते हैं, तो इससे एनर्जी का स्तर तेजी से बढ़ता है। ऐसा ही बच्चों के साथ होता है। जब वे अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड फूड खाते हैं, तो उन्हें इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। वहीं, कुछ देर बाद ही शुगर का स्तर गिरने की वजह से उनका एनर्जी लेवल भी गिर जाता है। इस उतार-चढ़ाव के कारण बच्चे अचानक थका हुआ, चिड़चिड़ा और गुस्सैल महसूस करने लगते हैं।

इसे भी पढ़ें: बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं प्रोसेस्ड फूड, डॉक्टर ने बताए ये 5 गंभीर नुकसान

एकाग्रता में कमी

आमतौर पर प्रोसेस्ड फूड में कई तरह की कृत्रिम चीजों का इस्तेमाल होता है और इसमें प्रिजर्वेटिव्स भी यूज किए जाते हैं। Harvard T.H. Chan School of Public Health की मानें, तो अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड और मस्तिष्क की खराब स्थिति का आपस में गहरा संबंध है। इसमें स्पष्ट बताया गया है कि अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड फूड खाने वालों में अवसाद और तनाव प्रोसेस्ड फूड न खाने वालों की तुलना में अधिक देखने को मिलता है। इसके अलावा, प्रोसेस्ड फूड खाने की वजह से मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। 

पोषक तत्वों की कमी

प्रोसेस्ड फूड में कैलोरी काफी मात्रा में होती है, लेकिन अन्य पोषक तत्व जैसे विटामिन, मिनरल्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड की काफी ज्यादा कमी होती है। बच्चों को सभी तरह के पोषक तत्व अधिक मात्रा में लेने चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो इसकी वजह से उन्हें हर समय थकान, कमजोरी और सुस्ती महसूस होती है।

इसे भी पढ़ें: प्रोसेस्ड फूड्स की वजह से बच्चों में बढ़ा रहे अस्थमा के मामले, स्टडी में वैज्ञानिकों को मिले प्रमाण

निष्कर्ष

भले ही बच्चे बहुत चाव से प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं, लेकिन यह उनके मूड पर भी गहरा  असर डालता है। इसकी वजह से बच्चों की एकाग्रता क्षमता कमजोर होती है और कॉग्निटिव बिहेवियर पर भी असर पड़ता है। इसलिए, पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चे को प्रोसेस्ड फूड खाने के लिए न दें। हां, अगर देना ही है, तो बहुत सीमित मात्रा में ही दें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या प्रोसेस्ड फूड से बच्चों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है?

    हां, अगर बच्चा लगातार प्रोसेस्ड फूड खाता है, तो उसमें पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जो कि बच्चों में एंग्जायटी और डिप्रेशन के खतरे को बढ़ा सकती है।
  • कौन से प्रोसेस्ड फूड बच्चों के व्यवहार को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं?

    कोल्ड ड्रिंक्स, कैंडीज, चिप्स और फास्ट फूड बच्चों के मूड के लिए बिल्कुल सही नहीं है।
  • बच्चे को प्रोसेस्ड फूड की लत से कैसे बचाएं?

    बच्चों को प्रोसेस्ड फूड के बजाय हेल्दी चीजें जैसे नट्स आदि खाने के लिए दें।

Read Next

ब‍िस्‍तर गीला कर देते हैं बच्‍चे, कहीं कारण डाइट से जुड़ी ये गलतियां तो नहीं?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jun 05, 2026 10:33 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 05, 2026 10:33 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 05, 2026 10:33 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 05, 2026 10:33 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dt Divya Gandhi

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content