बितिलासन (Bitilasana) करने से सेहत को होते हैं ये 8 लाभ, जानें कैसे करें ये आसन

बितिलासन को करने से सेहत को कई फायदे होते हैं। लेकिन इसके दौरान बरतने वाली सावधानी और इसे करने की सही विधि के बारे में पता होना जरूरी है।

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Sep 02, 2021 15:11 IST
बितिलासन (Bitilasana) करने से सेहत को होते हैं ये 8 लाभ, जानें कैसे करें ये आसन

अकसर बड़ों से कहते सुना होगा कि फिट रहने के लिए योगा करो या अपनी दिनचर्या में कुछ ऐसी एक्सरसाइज़ को जोड़ो जो फिट रहने में आपकी मदद कर सकें। आज हम बात कर रहे हैं बितिलासन की। यह आसन हिंदी में गाय आसन के नाम से जाना जाता है। वहीं इंग्लिश में से काउ पॉज (cow pose) के नाम से जानते हैं। आज का हमारा लेख इसी आसन पर है। बता दें कि बितिलासन को करने से न केवल गर्दन को मजबूती मिलती है बल्कि लोअर बैक, घुटने आदि की कमजोरी भी दूर हो सकती है। ऐसे में आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि बितिलासन को करने का सही तरीका क्या है। साथ ही इसके अनेक फायदों के बारे में भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

बितिलासन को करने का तरीका

चरण 1 - इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर योगा मैट बिछाएं।

चरण 2 - अब योगा मैट पर अपने दोनों घुटनों को टेकें और बैठ जाएं।

चरण 3 - आप जिस स्थिति में अभी हैं उसे वज्रासन कहा जाता है। अब अपने दोनों हाथों को जमीन पर रखें और अपने कूल्हों को उठाएं।

चरण 4 - आपके हाथ और जांघ दोनों एक ऊंचाई पर होने चाहिए। अब घुटनों के माध्यम से 90 डिग्री का कोण बनाएं और गाय की तरह अपनी स्थिति को लेकर आएं।

चरण 5 - इस दौरान लंबी और गहरी सांसे लेते रहें।

चरण 6 - अब सर को ऊपर की तरफ उठाएं।

चरण 7 - जितना हो सके उतना अपनी नाभि को नीचे की तरफ धकेलें।

चरण  8 - नाभि को नीचे की तरफ से धकेलें। आपकी रीढ़ की हड्डी के निचला हिस्सा ऊपर की तरफ होना चाहिए।

चरण 9 - आप अपनी ठोड़ी से छाती को छूने की कोशिश करें।

चरण 10 - ध्यान रहे कि आपके घुटनों के बीच में कुछ दूरी होनी चाहिए।

चरण  11 - हाथ भी मुडे नहीं होने चाहिए।

चरण 12 - अब अपने सिर को फिर ऊपर की तरफ उठाएं और अपनी कमर को सीधा करें। इस पर क्या को तकरीबन 10 से 15 बार दोहराएं।

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नोट - जव आप गाय की स्थिति में पूरी तरह से आ जाएं और उस वक्त जब आप अपनी नाभि को नीचे की तरफ धकेलें तो ज्यादा फोर्स करने की प्रयास ना करें। वरना इससे पेट में दर्द या रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या हो सकती है।

बितिलासन करते वक्त बरतने वाली सावधानी

इस आसन को करते वक्त कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है नहीं तो व्यक्ति को कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह सावधानियां निम्न प्रकार हैं-

1 - शुरुआत में यह आसन व्यक्ति को एक्सपर्ट की देखरेख में ही करना चाहिए।

2 - यदि व्यक्ति को गर्दन की समस्या है तो आसन को करते वक्त गर्दन पर ज्यादा जोर ना डालें या गर्दन को ज्यादा ना मोड़ें।

3 - इस आसन को करते वक्त नाभि पर ज्यादा जोर ना दें।

4 - इस आसन को करते वक्त आपके घुटनों के बीच में थोड़ा सा गैप होना जरूरी है।

5 - शुरुआत में 15-20 बार ना करके 5 से 10 बार आप इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं। 

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बितिलासन को करने से मिलने वाले फायदे

1 - इस आसन को करने से व्यक्ति का तनाव और इनसोम्निया की समस्या दूर हो सकती है।

2 - यह आसन घुटनों के, कंधों के और कूल्हों के जोड़ों को मजबूती देता है।

3 - इस आसन को करने से कलाई तो मजबूत होती ही है साथ ही हाथ और कंधे भी मजबूत बनते हैं।

4 - यह आसन गर्दन, कंधे के तनाव को दूर करने में उपयोगी है।

5 - रीढ़ की हड्डी में फ्लैक्सिबिलिटी यानी लचीलापन बरकरार रखने के लिए इस आसन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

6 - यह आसन सोते समय बॉडी पोश्चर में सुधार ला सकता है।

7 - इस आसन को करने से पाचन क्रिया तंदुरुस्त होती है

8 - व्यक्ति के कोर मसल्स भी मजबूत बनते हैं।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि बितिलासन करने से व्यक्ति को कई फायदे होते हैं। लेकिन यदि व्यक्ति के गर्दन या कंधे पर किसी प्रकार की चोट या परेशानी है तो इस आसन को करने से पहले व्यक्ति को एक बार एक्सपर्ट की सलाह लेनी जरूरी है। बच्चे, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली महिलाएं इस आसन को करने से पहले एक बार एक्सपर्ट की राय जरूर लें। 

इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।

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