चंद्र चक्र योग करने से मन और शरीर दोनों को मिलता है फायदा, जानें इसके अभ्यास का तरीका

चंद्र चक्र योग का अभ्यास चंद्रमा की रोशनी की तरह शीतलता और मन को शांति देने वाला होता है, जानें इसके फायदे और अभ्यास का तरीका।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Aug 31, 2021 05:58 IST
चंद्र चक्र योग करने से मन और शरीर दोनों को मिलता है फायदा, जानें इसके अभ्यास का तरीका

भारत में शरीर और मन को शांत और फिट बनाये रखने के लिए योग का अभ्यास सदियों से किया जा रहा है। योग के फायदों को देखते हुए आज पूरी दुनिया के लोग इसका अभ्यास करते हैं। शरीर की अलग-अलग स्थितियों के हिसाब से अलग-अलग योग का अभ्यास किया जाता है। शरीर को एनर्जी देने और फिट रखने के लिए लोग सूर्य नमस्कार का अभ्यास करते हैं। ठीक उसी प्रकार चंद्र नमस्कार का अभ्यास मन और शरीर को शांत और स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। चंद्रमा, पृथ्वी के सबसे नजदीक स्थित ग्रह है। चंद्रमा को शीतलता और शांति के लिए जाना जाता है। चांद की उर्जा सरल, शांत और मन को शांति देने वाली होती है। पूर्णिमा के दिन दिखने वाले चांद को सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है। तमाम योग एक्सपर्ट और योग गुरुओं का मानना है कि पूर्णिमा के दिन चंद्र चक्र योग का अभ्यास करना बहुत फायदेमंद होता है। आइये जानते हैं इसके बारे में।

चंद्र चक्र योग (Moon Cycle Yoga)

दरअसल चंद्र चक्र योग, योग की कोई अलग विधा नहीं है बल्कि पूर्णिमा की रात निकलने वाले चांद की उर्जा को ध्यान में रखकर किया जाने वाला योग अभ्यास है। चंद्र चक्र योग का अभ्यास आपको पूर्णिमा के चांद जैसी शांत उर्जा और शीतलता दे सकता है। चंद्र नमस्कार योग के अभ्यास जैसे ही योग की साधना करने वाले लोग पूर्णिमा की रात चांद की शीतल रोशनी में इसका अभ्यास करते हैं। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा के आठ चक्रों में पूर्णिमा के दिन इस योग का अभ्यास बहुत फायदेमंद होता है। इसका अभ्यास शरीर से नकारात्मक उर्जा और भावनाओं को दूर करने का काम करता है और शरीर व मन को शांत और स्वस्थ रखता है।

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कैसे करें चंद्र चक्र योग का अभ्यास? (How to Perform Moon Cycle Yoga?)

चंद्र चक्र योग का अभ्यास पूर्णिमा के चांद की उर्जा को ध्यान में रखकर किया जाता है। चंद्र नमस्कार की तरह ही इस योग का भी अभ्यास किया जाता है। इस अभ्यास की नौ प्रमुख मुद्राएं होती हैं जो चंद्र नमस्कार पर ही आधारित हैं। पूर्णिमा के चांद की रोशनी में ध्यान लगाने के बाद इसका अभ्यास बहुत ही अलग अनुभव देता है। आइये जानते हैं चंद्र चक्र योग के अभ्यास के बारे में।

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1. स्टैंडिंग माउंटेन पोज या ताड़ासन (Tadasana)

  • ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए आप सबसे पहले पैरों को समान दूरी पर रखकर खड़े हो जाएं।
  • अब अपने हाथ को प्रणाम की मुद्रा में लेकर आएं और इस मुद्रा में आकर अंदर की तरफ सांस खींचे।

2. हाफ मून या उर्ध्वा हस्तासन (Urdhva Hastasana)

  • ताड़ासन की स्थिति में रहते हुए अपनी बाहों को ऊपर की तरफ ले जाएं। 
  • अब हथेलियों के सहारे अपने शरीर को ऊपर की तरफ खींचें। 
  • सांस छोड़ते हुए पैरों को जमीन पर रखते हुए ऊपरी धड़ को दाईं ओर झुकाते हुए अपने बाएं कूल्हे को बगल की ओर दबाएं। 
  • सांस अंदर खींचते हुए वापस सामान्य मुद्रा में आएं और दूसरी तरफ से इसका अभ्यास करें। 

3. उत्कट कोणासन (Utkata Konasana)

  • सांस छोड़ते हुए अपने घुटनों को सीधे अपने पैर की उंगलियों पर मोड़ें।
  • इसके बाद अपने कूल्हों को एक स्क्वाट के क्रम में करें।
  • अब हथेलियों को आगे रखते हुए भुजाओं को कंधे की ऊंचाई तक ले जाएं और आगे की तरफ 90 डिग्री तक मोड़ें।
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इसके अलावा आप चंद्र नमस्कार की अन्य विधाओं का अभ्यास कर सकते हैं। अगर आप इस आसन की शुरुआत कर रहे हैं तो पहले इन तीनों आसनों का अभ्यास करें और उसके बाद ध्यान लगाएं। चंद्रमा की रोशनी में शीतलता को महसूस करते हुए ध्यान लगाना आपको मानसिक शांति देगा। इसका अभ्यास करने से आपके शरीर की नकारात्मक उर्जा और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलेगी। आप चंद्र नमस्कार की स्टेप्स यहां पर क्लिक कर जान सकते हैं। किसी भी योगासन के अभ्यास की शुरुआत करने से पहले उसके बारे में जानकारी जरूर लें। शुरुआत में एक्सपर्ट या योग शिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास करें।

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