सिद्धासन के अभ्यास से दूर होती हैं अपच, गैस और तनाव जैसी कई समस्याएं, एक्सपर्ट से जानें इसे करने का तरीका

सिद्धासन एक ध्यानात्मक आसन है। इस आसन में आप हाथों की किसी भी मुद्रा का प्रयोग कर सकते हैं। इस आसन को करने से मन को शांति मिलती है।

Meena Prajapati
Written by: Meena PrajapatiPublished at: Sep 02, 2021Updated at: Sep 02, 2021
सिद्धासन के अभ्यास से दूर होती हैं अपच, गैस और तनाव जैसी कई समस्याएं, एक्सपर्ट से जानें इसे करने का तरीका

सिद्धासन शरीर की वो स्थिति है जिसमें बैठने से हम अपने ध्यान को केंद्रित कर सकते हैं। सिद्धासन करने से शरीर को कई फायदे मिलते हैं। योग शिक्षक दिव्यांश शर्मा ने बताया कि सिद्धासन को अगर सही तरीके से किया जाए तो इससे शरीर को अनेक लाभ मिलते हैं। उन्होंने बताया कि सिद्धासन करने से पाचन शक्ति बेहतर होती है, शरीर को ऊर्जा मिलती है। साथ ही हमारे पेल्विक के अंगों को मजबूती मिलती है। इसके अलावा ध्यान केंद्रित करना भी सीखते हैं। सिद्धासन एक ध्यानात्मक आसन है। यह ध्यान आप हाथों कि विभिन्न मुद्राओं से कर सकते हैं। कौशल स्टूडियो के साथ काम कर रहे योग शिक्षक दिव्यांश शर्मा से जानते हैं कि यह आसन कैसे करना है और किन बातों का ध्यान रखना है। तो आइए योग शिक्षक से जानते हैं।

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सिद्धासन करने के फायदे

यह एक ध्यानात्मक श्रेणी का आसन है, इससे हम ध्यान लगा सकते हैं। इसके तहत विभिन्न मुद्राओं का भी अभ्यास कर सकते हैं जैसे कि ज्ञान मुद्रा, ध्यान मुद्रा, पृथ्वी मुद्रा आदि।  इसे करने के निम्न फायदे हैं।

मन को शांति

इस आसन को करने से मन को शांति मिलती है। इस आसन को करने से हमारी रीढ़ की हड्डी सक्रिय रहती है जिसकी वजह से ध्यान आदि करने पर तंद्रा या निद्रा में इंसान नहीं पड़ता। आप इसमें प्राणायाम या बंद भी लगा सकते हैं। प्राणायाम के लिए यह आसन उचित होता है। 

कुंडलिनी शक्ति की जागृति

इस आसन को करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। इसके तहत हम अपने चक्रों को भी जागृत कर सकते हैं। 

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पाचन शक्ति

आजकल खराब होती है जीवनशैली की वजह से पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं। इन परेशानियों से बचने के लिए आप सिद्धासन योग कर सकती हैं। जब हम यह आसन करते हैं तब हम मन को शांत रखते हैं और लंबी गहरी सांसों का अभ्यास करते हैं जिससे मन की शांति आती है और पाचन अच्छा होता है। 

ऊर्जा की प्राप्ति

सिद्धासन योग करने से मन शांत होता है साथ ही शरीर को ऊर्जा भी प्राप्त होती है। यह आध्यत्मिक ऊर्जा होती है। आध्यात्म से शारीरीक ऊर्जा भी मिलती है। 

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सिद्धासन करने का तरीका

  • अपनी जगह पर पांव को सामने रखते हुए बैठ जाएं। 
  • सबसे पहले अपने बाएं पैर को मोड़कर अपनी बाईं एड़ी को अपने पेल्विस (जहां पर दोनों पैरों का जोड़ होता है) के समीप लगाएं।
  • अब अपने दाएं पैर के घुटने को मोड़ें और अपने दाएं एड़ी को लेफ्ट एड़ी के सामने रख दें।
  • इस प्रकार आप यह पाएंगे कि आपके दोनों घुटने जमीन से लगे हुए हैं जो कि एक उपयुक्त स्थिति होती है ध्यान करने के लिए, प्राणायाम करने के लिए व मुद्राबंद आदि करने के लिए। 
  • कमर, गर्दन सीधी रखें। जिस मुद्रा का अभ्यास करना है उस मुद्रा का अभ्यास करें।
  • सामान्यत: हम ज्ञान मुद्रा का अभ्यास करते हैं।  बाकी आप किसी भी मुद्रा का अभ्यास कर सकते हैं।

सावधानियां

  • जिनको घुटने में दर्द, लोअर बैक पेन है वे न करें।
  • इस को करते समय ध्यान रहे कि बाईं एड़ी को ही पेल्विस के पास रखें। क्योंकि बाएं एड़ी चंद्रमा को denote करती है। 
  • अगर कमर में हल्का दर्द है तो दीवार के सहारे इस आसन को कर सकते हैं। 

सिद्धासन एक ध्यानात्मक आसन है। इस आसन में आप हाथों की किसी भी मुद्रा का प्रयोग कर सकते हैं। इस आसन को करने से मन को शांति मिलती है। साथ ही यह आसन शरीर को ऊर्जा देता और पाचन संबंधी परेशानियों को भी दूर रखता है। अगर आपको स्वस्थ जीवन जीना है तो इस आसन का अभ्यास कर सकते हैं। 

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