Fri Sep 11, 2026 | 07:39 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

रोटी और घी खाकर मजबूत करें पाचन अग्नि, आयुर्वेद‍िक एक्‍सपर्ट ने बताए शानदार फायदे

क्‍या आप भी पाचन समस्‍याओं से पर‍ेशान हैं? रोटी और घी का सेवन करने से पाचन अग्नि को मजबूत बनाया जा सकता है और पाचन की समस्‍याएं जैसे पेट में गैस, अपच वगैरह को दूर करने में मदद म‍िलती है।

आयुर्वेद के अनुसार, अच्‍छी सेहत के ल‍िए पाचन का मजबूत होना जरूरी है। जब हम पौष्‍ट‍िक भोजन करते हैं तो पाचन अग्नि (डाइजेस्टिव फायर) संंतुल‍ित रहती है और भोजन ठीक से पच जाता है और शरीर को पोषण म‍िलता है। मेरी मां अपने बचपन में घी और रोटी खाया करती थीं। वह कहती थीं क‍ि स्‍कूल से घर आते ही नानी उन्‍हें रोटी पर घी लगाकर देती थीं और वह शौक से खाती थीं। मां बताती हैं क‍ि शरीर की कमजोरी दूर करने के ल‍िए भी रोटी और घी का सेवन फायदेमंद है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेड‍िस‍िन के एक अध्‍ययन के मुताब‍िक, घी का सेवन पाचन के ल‍िए फायदेमंद होता है। घी में मौजूद ब्यूटिरिक एसिड आंतों के स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए फायदेमंद होते हैं। घी का सेवन करने से पाचन क्र‍िया में सुधार होता है। इस लेख में जानेंगे पाचन अग्नि मजबूत करने के ल‍िए रोटी और घी खाने के फायदे (Roti Or Ghee Khane Ke Fayde)। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

पाचन अग्नि कमजोर क्‍यों होती है?- Why Digestive Fire Become Weak

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  • पाचन अग्नि कमजोर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अन‍ियम‍ित खानपान, देर रात भोजन करना, जंक फूड का ज्‍यादा सेवन वगैरह।
  • कई बार शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि की कमी, पानी की कमी या जीवनशैली खराब होने के कारण भी पाचन तंत्र ब‍िगड़ जाता है।
  • ज्‍यादा तनाव, च‍िंता और नींद की कमी के कारण भी पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है।
  • जरूरत से ज्‍यादा दवाओं का सेवन, ओवरईट‍िंग भी कमजोर पाचन अग्नि का कारण बन सकती है।

यह भी पढ़ें- सर्दियों में घी की रोटी खाने से सेहत को म‍िलते हैं 5 जबरदस्‍त फायदे

घृत पाचन अग्नि को संतुलि‍त करता है

Ayurveda Expert Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि गाय का घी पाचन के ल‍िए फायदेमंद होता है। रोटी पर घी लगाकर खाने से पाचन बेहतर होता है। घी शरीर के डीपर ट‍िशूज तक पहुंच जाता है इसल‍िए घी का सेवन शरीर के सेल्‍स के ल‍िए फायदेमंद है। आयुर्वेद की मानें, तो घृत पाचन अग्नि को संतुलि‍त करता है ज‍िससे पाचन बेहतर होता है। पाचन के ल‍िए घी अग्नि का काम करता है। घी के साथ गेहूं की राटी, रागी, ज्‍वार या बाजरे की रोटी का सेवन कर सकते हैं। गर्मि‍यों में जौ की रोटी खाना फायदेमंद होता है और सर्दि‍यों में मक्‍के की रोटी का सेवन फायदेमंद है। मक्‍के को गुरु अन्‍न कहा जाता है इससे शरीर में गर्मी बनी रहती है। मल्‍टीग्रेन रोटी खा रहे हैं, तो चना या सोया को म‍िक्‍स करके खा सकते हैं।

रोटी और घी खाने के फायदे- Roti Or Ghee Khane Ke Fayde

  • रोटी और घी खाने से गैस और अपच की समस्‍या दूर होती है।
  • घी का सेवन करने से मल त्‍याग में आसानी होती है।
  • रोटी और घी का सेवन करने से शरीर को एनर्जी म‍िलती है।
  • घी के साथ रोटी का सेवन करने से शरीर की इम्‍यूनि‍टी मजबूत होती है इससे मेटाबॉल‍िज्‍म मजबूत होती है और गट हेल्‍थ भी मजबूत होती है।

रोटी और घी खाकर पेट भारी नहीं लगता

  • रोटी के साथ घी खाने पेट भारी नहीं लगता और पेट में जलन की समस्‍या दूर होती है। जब रोटी पर घी लगाकर खाते हैं, तो भोजन आसानी से पच जाता है।
  • ताजा रोटी बनाकर उस पर घी लगाकर खाएं।
  • आधे से एक चम्‍मच देसी घी का सेवन काफी है।
  • अगर एस‍िड‍िटी, फैटी लि‍वर या मोटापे की समस्‍या है, तो घी का सेवन सीम‍ित करें और डॉक्‍टर की सलाह से सेवन करें।

न‍िष्‍कर्ष:

रोटी और घी का सेवन पाचन अग्नि को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है। रोटी में कार्ब्स होते हैं और घी में हेल्‍दी फैट्स होते हैं ज‍िससे शरीर को एनर्जी म‍िलती है।

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FAQ

  • पाचन अग्नि क्‍या होता है?

    पाचन शक्‍त‍ि को आयुर्वेद में पाचन अग्नि कहा जाता है। यह भोजन को पचाकर शरीर को एनर्जी देती है और पोषण में बदलती है। जब पाचन अग्नि संतुल‍ित रहती है, तो खाना आसानी से पच जाता है और शरीर स्‍वस्‍थ रहता है।
  • घी खाने के क्‍या फायदे हैं?

    घी का सेवन करने से शरीर को एनर्जी म‍िलती है, इम्‍यून‍िटी मजबूत होती है और कब्‍ज से राहत म‍िलती है। घी का सेवन करने से पाचन मजबूत होता है और आंतों को च‍िकना बनाकर मल त्‍याग की प्रक्र‍िया आसान बनती है।
  • सर्दि‍यों में कौन सी रोटी खानी चाह‍िए?

    सर्दि‍यों में बाजरा, ज्‍वार, गेहूं, मक्‍का की रोटी बनाकर खाना फायदेमंद होता है। इससे शरीर को गर्मी म‍िलती है, शरीर में एनर्जी रहती है और ये पाचन के ल‍िए फायदेमंद मानी जाती हैं।

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Feb 03, 2026 16:31 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Feb 03, 2026 16:31 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
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