Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

घी बनाते समय पान का पत्ता डालने से कैसे बेहतर हो सकती है गट हेल्थ? एक्सपर्ट से जानें

घी बनाते समय उसमें पान का पत्ता म‍िलाना एक पुराना नुस्‍खा है। पान का पत्ता घी की खुशबू को और बेहतर बना देता है और उसमें मौजूद नमी को एब्‍जॉर्ब कर लेता है। जानें क्‍या वाकई इस कॉम्‍बि‍नेशन से गट हेल्‍थ सुधरती है?

घी और पान के पत्ते का कॉम्‍ब‍िनेशन नया नहीं है। पुराने समय में घरोंं में इसका चलन था। घी को लंबे समय तक खराब होने से बचाने के ल‍िए उसमें पान का पत्ता डाला जाता है क्‍योंक‍ि उसमें मौजूद एंटीबैक्‍टीर‍ियल गुण घी को खराब नहीं होने देते। घी बनाने समय लोग उसमें कई चीजें म‍िलाते हैं ज‍िसमें से एक है पान का पत्ता। घी में जब पान का पत्ता म‍िलाया जाता है, तो पूरे घर में उसकी महक फैल जाती है। माना जाता है क‍ि यह नुस्‍खा गट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंद होता है और इससे पाचन की समस्‍याएंं दूर होती हैं। जानते हैं क‍ि क्‍या वाकई घी बनाते समय पान का पत्ता डालने से गट हेल्‍थ सुधरती है या यह केवल एक रसोई का सामान्‍य नुस्‍खा है? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Shrey Sharma, Ayurveda Expert, Ramhans Charitable Hospital, Haryana से बात की।

घी में पान का पत्ता डालने से बढ़ जाते हैं गुण

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Ayurveda Expert, Dr. Shrey Sharma ने बताया क‍ि जब हम घी बनाते समय उसमें पान का पत्ता डालते हैं, तो पान का रस या तत्‍व घी में म‍िल जाते हैं। इससे घी के गुण बढ़ जाते हैं। आयुर्वेद में पान के पत्ते को अग्‍न‍िवर्धक माना है इसल‍िए यह पाचन के ल‍िए अच्‍छा है और हार्ट के ल‍िए भी फायदेमंंद है। पान के पत्ते में एंंटीऑक्‍सीडेंट्स होते हैं जो कब्‍ज और अन्‍य गैस्‍ट्र‍िक समस्‍याओंं को दूर करने में मदद करता है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2020 में Pharma Innovation Journal नामक जर्नल में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, घी में 1.5 प्रत‍िशत पान के पत्ते का अर्क म‍िलाने से उसमें एंटीऑक्‍सीडेंट गुण बढ़ जाते हैं जो क‍ि गट हेल्‍थ के ल‍िए फायदेमंंद होते हैं और क‍िसी स‍िंथेट‍िक एड‍िट‍िव को डाले बगैर घी में ऑक्‍सीडेशन को रोका जा सकता है।

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गट हेल्‍थ के ल‍िए क्‍यों बेस्‍ट है घी और पान के पत्ते का कॉम्‍बि‍नेशन?

  • जब पान के पत्ते के गुण घी में म‍िल जाते हैं, तो मेटाबॉल‍िज्‍म को तेज करने में मदद म‍िलती है ज‍िससे गैस और अपच जैसी समस्‍याएंं दूर होती हैं।
  • पान के पत्ते की तासीर ठंडी होती है। यह पेट को ठंडा रखता है। पान का पत्ता जीईआरडी (GERD) में बहुत फायदेमंद माना जाता है क्‍योंंक‍ि यह शरीर में मौजूद व‍िषाक्‍त पदार्थों को कम करने में मदद करता है।
  • पान के पत्ते में पॉलीफेनॉल, फ्लेवोनोइड्स जैसे तत्‍व और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं जो न्‍यूट्र‍िएंट्स को बेहतर ढंंग से एब्‍जॉर्ब होने में मदद करते हैं और गट हेल्‍थ को सुधारते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

गट हेल्‍थ को मजबूत बनाने के ल‍िए घी और पान के पत्ते का कॉम्‍बि‍नेशन बेहद फायदेमंद है। इससे गैस, अपच, जीईआरडी जैसी पाचन समस्‍याएंं दूर होती हैं, मेटाबॉल‍िज्‍म तेज होता है और पोषक तत्‍व बेहतर ढंग से शरीर में एब्‍जॉर्ब हो पाते हैं।

image credit: esakal

FAQ

  • द‍िनभर में क‍ितने पान के पत्ते खा सकते हैं?

    द‍िनभर में एक से दो पान के पत्ते ही खाएं। इससे ज्‍यादा खाने से मुंह में जलन हो सकती है या मुंह में छाले भी हो सकते हैं।
  • पाचन के ल‍िए क्‍योंं फायदेमंद है घी?

    घी मल त्‍याग की प्रक्र‍िया को आसान बनाकर कब्‍ज से राहत द‍िलाता है और पेट की जलन और एस‍िड‍िटी को दूर करने में मदद करता है।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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