Fri Sep 11, 2026 | 09:17 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shrey Sharma , BAMS

बिस्तर पर जाते ही आ जाएगी नींद! रात में बस 10 मिनट करें 'पाद स्नान', जानें इसके आयुर्वेदिक फायदे

आयुर्वेद में पाद स्नान करना सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे करने से न सिर्फ पैरों को आराम मिलात है, बल्कि मानसिक तनाव भी कम होता है। आइए आयुर्वेदिक डॉक्टर से जानते हैं पाद स्नान के फायदे और इसे करने के तरीके के बारे में।

दिनभर चलने, काम करने आदि कारणों से शरीर में थकान और तनाव दोनों ही समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। रात होते-होते महसूस होने लगता है कि जैसे हमारे शरीर की सारी एनर्जी खत्म हो गई है। ऐसे में दिनभर की थकान कम करने के लिए कुछ न कुछ उपाय अपनाते हैं। ऐसे में कई लोग रात को सोने से पहले अपने पैरों की मालिश करते हैं वहीं कुछ लोग पैरों को नमक वाले पानी में भी भिगोकर रखते हैं। आयुर्वेद में इसे पाद स्नान के रूप में जाना जाता है, जिसमें गुनगुने नमक के पानी में में पैरों को डालकर बैठा जाता है, जिससे आपको कई तरह के फायदे मिलते हैं। ऐसे में आइए हरियाणा के सिरसा में स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से जानते हैं कि पाद स्नान क्या है और इसके क्या फायदे हैं?

पाद स्नान के फायदे

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में पाद का अर्थ होता है अभ्यंग यानी तेल की मालिश, जो पैरों पर की जाती है। उससे नींद अच्छी आती है, मसल्स थोड़ी ढीली हो जाती है। इसके साथ ही यह वात को कम करने में मदद करता है। पैरों में वात बढ़ने के कारण होने वाली जकड़न, सूजन, सुन्नता और कमजोरी को दूर किया जा सकता है। स्नान करने का अर्थ है शरीर को साफ करना।  पाद स्नान करने से आपके पैर साफ होते हैं, पैरों में इंफेक्शन होने की संभावना कम होती है, लिगामेंट्स और मसल भी थोड़े लूज होते हैं। इसके साथ ही दिनभर का तनाव कम होता है और रात में अच्छी नींद आती है। इसके साथ ही, पद स्नान करने से पैरों की मांसपेशियां रिलैक्स करती हैं, नसों को पोषण मिलता है और शरीर को शांति मिलती है। नींद जल्दी आती है और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।

इसे भी पढ़ें: तनाव से राहत दिलाता है कांसा फुट मसाज, इस मसाज को करने से सेहत को मिलते हैं ये 5 फायदे

तेल मालिश के फायदे

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा का कहना है कि, पैरों को गुनगुने पानी में भिगोकर रखने के बाद तेल से मालिश करने से वात संतुलित रखने में मदद मिलती है, जिससे आपको चलने-फिरने और तनाव को कम करने में मदद मिलती है। आयुर्वेद में उम्र और शरीर की प्रकृति के अनुसार तेल चुनना आपके पैरों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है। आमतौर पर आप तिल का तेल इस्तेमाल कर सकते हैं, जो वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है। इसके अलावा आप नारियल तेल, घी और औषधीय तेलों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।  

इसे भी पढ़ें: सिर्फ कुछ मिनटों की फुट मसाज से आपको मिलते हैं ये 5 फायदे, जानें क्या है पैरों की मसाज का सही तरीका

01 (85)

कैसे करें पाद स्नान?

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा के मुताबिक, पाद स्नान करने के लिए आप सबसे पहले एक टब या बाल्टी में गुनगुना पानी ले लें। अब इसमें थोडा सा तेल और सेंधा नमक डालें और चाहे तो त्रिफला भी डाल सकते हैं। इसके बाद 5 से 10 मिनट तक पैरों को पानी में डुबोकर रखें। इसके बाद पैरों को अच्छी तरह पोंछ लें और फिर तेल से हल्के हाथों से अपने तलवों, एड़ियों और पैर की उंगलियों की मालिश करें। खासकर तलवों के बीच और एड़ी पर हल्के हाथों से मसाज करें।

निष्कर्ष

पाद स्नान पैरों के तनाव को कम करने और शरीर को आराम दिलाने में मदद मिल सकती है। इसलिए आप रात को सोने से पहले 10 मिनट अपने पैरों को गुनगुने नमक के पानी में भिगोकर रख सकते हैं और उसके बाद अपने पैरों को तेल से मसाज कर सकते हैं, जो आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • गर्म पानी में पैर धोने के क्या फायदे हैं?

    गर्म पानी में 10 से 15 मिनट पैरों को भिगोकर रखने से तनाव को कम करने, थकी मांसपेशियों को आराम दिलाने और ब्लड सर्कुलेशन में सुधार करने में मदद मिलती है।
  • अपने पैरों को गर्म पानी में कितनी देर तक भिगोना चाहिए?

    पैरों की थकान, सूजन और तनाव को कम करने के लिए गुनगुने पानी में 10 से 15 मिनट तक अपने पैरों को भिगोकर रखें। इतनी देर तक पैरों को भिगोकर रखने से पैरों की स्किन को मुलायम बना सकते हैं।
  • पैरों की सूजन खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए?

    पैर की सूजन कम करने के लिए पैरों को ऊपर उठाएं, गुनगुने नमक के पानी में पैरों को डुबोएं और फिर पैरों को हल्का मसाज करें। 

Read Next

ब्रेन सेल्स को बेहतर करने के लिए सोने से पहले पिएं ये आयुर्वेदिक ड्रिंक, जानें इसके फायदे

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Feb 07, 2026 16:46 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Feb 07, 2026 16:46 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
  • Feb 07, 2026 16:46 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content