आर्टियल फिब्रीलेशन के मरीज को बिल्कुल नहीं लेनी चाहिए एस्प्रिन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 28, 2016

चिकित्सक अक्सर आर्टियल फिब्रीलेशन (एएफ) के एक तिहाई मरीजों को मुंह से लेने वाले एंटी-कोगुलेंट्स की बजाय एस्प्रिन देते हैं। आर्टियल फिब्रीलेशन एक बीमारी है जिसमें दिल के दौरे पड़ते हैं जिसको रोकने के लिए एस्प्रिन दी जाती है। जबकि एस्प्रिन से एएफ की वजह से होने वाले थ्रोम्बियोम्लिजम को रोकने में कोई मदद नहीं मिलती।



हाल ही में अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियॉलॉजी की पिनाकल रजिस्ट्री में एक शोध प्रकाशित हुई है। इस शोध के अनुसार एएफ के मरीजों के नए मूल्यांकन के मुताबिक, तकरीबन 40 फीसदी मरीजों को मुंह से लेने वाले एंटी-कोगुलेंट्स की बजाय केवल एस्प्रिन दी गई। इस शोध में एस्प्रिन लेने वाले और एंटी-कोगुलेंट्स लेने वाले मरीजों के बीच में तुलना की गई। इस शोध में कई तरह के बदलाव देखे गए। जैसे कि जिन मरीजों को एस्प्रिन दी गई है, उनमें दिल के रोगों का खतरा उन लोगों की तुलना में ज्यादा है, जिन्हें मुंह से लेने वाले एंटी-कोगुलेंट्स दी गई।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के ऑनरेरी सक्रेटरी व हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया कि ऐसे ही कई अन्य शोधों से ये प्रमाणित हो चुका है कि एस्प्रिन एंटी-कोगुलेंट्स नहीं है और यह एएफ से होने वाले स्ट्रोक को रोकने में मदद नहीं करती।

उन्होंने बताया कि गलत इलाज के खतरे को समझते हुए आईएमए ने अपने ढाई लाख डॉक्टर सदस्यों को इस बारे में जानकारी देने के लिए सर्कुलर भेज दिया है कि आर्टियल फिब्रीलेशन के मरीज, जिन्हें दिल के दौरे का कम खतरा होता है, उन्हें एस्प्रिन न दी जाए।

 

Read more Health news in Hindi.

Loading...
Is it Helpful Article?YES670 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK