अनुष्का शर्मा को हुईं बल्जिंग डिस्क की शिकार, जानें इस बीमारी के लक्षण और जरूरी बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 07, 2018
Quick Bites

  • बल्जिंग डिस्क के कारण डॉक्टर्स ने अनुष्का को बेड रेस्ट की सलाह दी है।
  • बल्जिंग डिस्क रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी बीमारी है।
  • ये बीमारी शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है।

बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा अपनी फिटनेस और बेहतरीन एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं। अनुष्का इस समय अपनी नई फिल्म 'सुई धागा' के प्रमोशन में जोर-शोर से जुटी हुई हैं। इसी बीच उन्हें बल्जिंग डिस्क की बीमारी हो गई है, जिसके कारण डॉक्टर्स ने उन्हें बेड रेस्ट की सलाह दी है। बल्जिंग डिस्क को हर्नियेटेड डिस्क भी कहते हैं। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी ये बीमारी आजकल आम है। बल्जिंग डिस्क के कारण शरीर में तेज दर्द होता है। आइए आपको बताते हैं क्या है बल्जिंग डिस्क और क्या हैं इस बीमारी के लक्षण।

बल्जिंग डिस्क क्या है?

बल्जिंग डिस्क रीढ़ की हड्डियों से जुड़ी बीमारी है। जब आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं, तो आपको इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है। इसी कारण आजकल डेस्क जॉब वाले लोगों में ये बीमारी आम हो गई है। बल्जिंग डिस्क के कारण हिप्स और जांघों में सबसे ज्यादा दर्द होता है। ये बीमारी शरीर के नर्वस सिस्टम को प्रभावित करती है। हर्नियेटेड डिस्क दो तरह से आपके शरीर को प्रभावित कर सकता है।

  • लोअर बैक में हर्नियेटेड डिस्क की समस्या होने पर हिप्स और जांघों में दर्द होता है।
  • गर्दन में हर्नियेटेड डिस्क की समस्या होने पर कंधों और हाथों में इसका दर्द होता है।

क्या है बल्जिंग डिस्क के लक्षण

  • शरीर के एक या दोनों हिस्से में दर्द की समस्या
  • शरीर का एक या दोनों हिस्सों का सुन्न हो जाना
  • हाथों और पैरों में दर्द की समस्या होना
  • रात के समय अंगों को हिलाने-डुलाने में तेज दर्द
  • चलने-फिरने में परेशानी होना
  • मसल्स में बिना कारण कमजोरी आना

क्या हैं बल्जिंग डिस्क से खतरे

बल्जिंग डिस्क होने पर सबसे बड़ी परेशानी ये है कि कई बार इसमें असहनीय दर्द होता है। दर्द के साथ-साथ कई बार झुनझनाहट का अनुभव होने लगता है। आमतौर पर इसका कारण मांसपेशियों की कमजोरी होती है।

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क्या है बल्जिंग डिस्क का इलाज

आमतौर पर बल्जिंग डिस्क की समस्या को फीजियोथेरेपी द्वारा ठीक किया जाता है। मगर कई बार दर्द गंभीर होने पर डॉक्टर सर्जरी की भी सलाह देते हैं। फीजियोथेरेपी से मांसपेशियों में लचीलापन आता है और दर्द से आराम मिलता है। अगर आप नियमित व्यायाम करते हैं या वॉकिंग, स्विमिंग आदि फिजिकल एक्सरसाइज करते हैं, तो इस रोग की संभावना कम होती है।

इसके अलावा बल्जिंग डिस्क से बचाव के लिए आपको किसी एक पोजीशन में देर तक बैठने से बचना चाहिए। अगर आपका वजन बढ़ा हुआ है, तो वजन घटाना जरूरी है क्योंकि मोटापे के कारण भी ये समस्या हो सकती है।

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