LGBT को इन स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का करना पड़ता है सामना, जानें क्‍या है समाधान

शोध से पता चला है कि एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्‍सुअल और ट्रांसजेंडर) व्यक्तियों को स्वास्थ्य असमानताओं का सामना करना पड़ता है, मुख्य रूप से सामाजिक कलंक, भेदभाव, और उनके नागरिक और मानवाधिकारों से इनकार क

Atul Modi
Written by: Atul ModiPublished at: Sep 07, 2018Updated at: Sep 07, 2018
LGBT को इन स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का करना पड़ता है सामना, जानें क्‍या है समाधान

समलैंगिक संबंध को अपराध बताने वाली धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि सहमति से बनाया गया समलैंगिक संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं आता। ये फैसला एलजीबीटी समुदाय और देश भर में इसके कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है। बतौर कार्यकर्ता यह निर्णय सामाजिक परिवर्तन लाएगा और उनसे जुड़े कलंक को हटा देगा। ये तो हुई एलजीबीटी समुदाय के हक की बात, लेकिन यहां हम आपको ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्‍हें किस तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है और इसका समाधान क्‍या हो सकता है।

शोध से पता चला है कि एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्‍सुअल और ट्रांसजेंडर) व्यक्तियों को स्वास्थ्य असमानताओं का सामना करना पड़ता है, मुख्य रूप से सामाजिक कलंक, भेदभाव, और उनके नागरिक और मानवाधिकारों से इनकार किया जाता है। और एलजीबीटी व्यक्तियों के खिलाफ भेदभाव आत्महत्या, मनोवैज्ञानिक विकारों और पदार्थों के दुरुपयोग की उच्च दर से जुड़ा हुआ है। 

 

आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के बढ़ते जोखिम के साथ, यह बेहद महत्वपूर्ण है कि एलजीबीटी समुदाय के लोगों की भावनाओं को समझा जाए उनका समर्थन किया जाए, उसी प्रकार जैसे कोई औसत बच्‍चा स्‍कूल में अच्‍छे अंक प्राप्‍त करने की कोशिश करे और लोग उसका समर्थन करें। फिर भी, एक औसत एलजीबीटी टीनएजर के पास ये सब कुछ होगा खुद को समझने के संघर्ष के अलावा। उनके मन में ये सवाल हमेशा उठते हैं कि क्‍या वह सामान्‍य हैं? क्‍या उनका जेंडर भी बाकी लोगों की तरह ही है? मैं अपने इन संदेहों का समाधान किससे लूं। ऐसे ही न जाने कितने सवाल होते हैं जो एलजीबीटी समुदाय के लोगों को किशोरावस्‍था के दौरान उनके मन में आते हैं जो मानसिक रोगों का कारण बन सकते हैं।

LGBT समुदाय में मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या  

विशेषज्ञों के अनुसार, समलैंगिकता मानसिक विकार नहीं है। हालांकि, कुछ मानसिक स्थितियां और अन्य मुद्दे हैं जो इस आबादी के बीच उच्च दर पर देखे जाते हैं, जोकि बहुत आम हैं। 

अवसाद

इस समुदाय में अवसाद की समस्‍या बहुत ही आम है, क्‍योंकि ऐसा ये अपने दिल की बात खुद से विपरीत स्‍वाभाव वाले लोगों से बयां नहीं कर पाते हैं और न ही लोगों से घुलमिल पाते हैं। 

चिंता

मन में उठ रहे अलग-अलग सवालों और उसके जवाबों के खोजने में चिंतित रहना। कई लोग कहते हैं कि उन्‍हें अपने प्रियजनों से लड़ना पड़ता है उसके लिए जो उनके मन में विचार आते हैं। 

स्वीकरोक्ति

कभी-कभी उन्‍हें समाज में स्‍वीकरोक्ति प्राप्त नहीं होती है। वह चाहे स्‍कूल-कॉलेज हो, कार्यस्थल, रिश्तेदारों के बीच या अन्य किसी जगह पर उन्‍हें दुत्‍कार छेलना पड़ता है। 

बॉडी इमेज से संबंधित मुद्दे

कई ट्रांसजेंडर अपनी बॉडी इमेज को लेकर खुद से लड़ते हैं। विपरीत लिंग के प्रति अपनी इच्‍छाओं को परखने की कोशिश करते हैं, कि क्‍या उन्‍हें बाकी लोगों की तरह भी इमोशंस आते हैं या नहीं। 

अस्‍वीकार किए जाने का डर 

समाज में खासकर ट्रांसजेंडर के प्रति अस्‍वीकार की भावना देखने को मिलती है। अक्‍सर माता-पिता ऐसे बच्‍चों का पालन पोषण करने के बजाए उन्‍हें अस्‍वीकार कर देते हैं। 

रिश्ते के मुद्दे

कई बार रिश्‍तों के मुद्दे पर एलजीबीटी समुदाय मानसिक समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। 

क्‍या है इन समस्‍याओं का समाधान 

अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो एलजीबीटी समुदाय से संबंधित है, तो उनके प्रति तरस या दया भावना रखने के बजाए उन्हें स्वीकार करें। उनके प्रति अपना व्‍यवहार सामान्‍य रखें। जिस प्रकार आप जबरदस्‍ती किसी कलर, फूड को नहीं चुन सकते हैं। जिस प्रकार आप कामुकता और आकर्षण को किसी के दबाव में स्‍वीकार नहीं कर सकते हैं उसी प्रकार से एलजीबीटी समुदाय के लोगों में भी ये चीजें प्राकृतिक हैं, उनकी भी अपनी यौन आकांक्षाएं होती हैं जिसे बदला नहीं जा सकता है और सिर्फ यौन वरीताओं के अनुसार किसी को पैरेटिंग और बचपन के अनुभवों से वंचित नहीं रखा जा सकता है। 

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