Amniocentesis: प्रेगनेंसी में क्यों जरूरी है एम्‍न‍ियो टेस्ट? इस टेस्ट से कैसे जुड़ी है मां और शिशु की सेहत?

होने वाले बच्‍चे में जन्‍म से पहले की बीमार‍ियों का पता लगाने के ल‍िये एम्‍न‍ियो टेस्‍ट क‍िया जाता है। इससे बच्‍चे मेंं बन रही बीमारी का पता चलता है। 

Yashaswi Mathur
Written by: Yashaswi MathurUpdated at: Jan 18, 2021 12:24 IST
Amniocentesis: प्रेगनेंसी में क्यों जरूरी है एम्‍न‍ियो टेस्ट? इस टेस्ट से कैसे जुड़ी है मां और शिशु की सेहत?

क्‍या आपके पर‍िवार में लंबे समय से कोई बीमारी चलती आ रही है? क्‍या आपको डर है इसका असर होने वाले बच्‍चे पर भी पड़ सकता है? जेनेट‍िक बीमारियां कई पीड़‍ियों पर अपना असर छोड़ती हैं पर इनका पता प्रेगनेंसी के दौरान ही चल जाये तो होने वाले बच्‍चे को इससे कम खतरा रहता है। इसे पता लगाने के ल‍िये डॉक्‍टर एम्‍न‍ियो टेस्‍ट करते हैं ज‍िसे मेड‍िकल भाषा में  एमनियोसेंटेसिस टेस्‍ट के नाम से जाना जाता है। जेनेट‍िक बीमारि‍यों के अलावा भी कई ऐसे कारण हैं ज‍िससे आपको ये टेस्‍ट करवाना पड़ सकता है। प्रेगनेंसी में ये टेस्‍ट क्‍यों जरूरी है और इसके क्‍या फायदे हैं ये जानने के ल‍िये हमने लखनऊ के डफर‍िन अस्‍पताल की प्रमुख च‍िक‍ित्‍सा अधीक्ष‍िका और गाइनोकॉलोज‍िस्‍ट डॉ सुधा वर्मा से बात की।

amnio test in pregnancy

क्‍यों जरूरी है ये टेस्‍ट? (Importance of amniocentesis test)

अगर होने वाली मां की उम्र 35 साल या उससे ज्‍यादा है तो ऐसे मामलों में डॉक्‍टर एम्‍न‍ियो टेस्‍ट करवाने की सलाह देते हैं। देर से कंसीव करने के कारण कई बार कॉमप्‍ल‍िकेशन्‍स आ जाते हैं। क‍िसी कारण से देर से शादी होने या प्रेगनेंट होने के कारण होने वाले बच्‍चे के शरीर पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। सही समय पर इसकी जांच करने के ल‍िये एम्‍न‍ियो टेस्‍ट जरूरी है। कई बार घर में जेनेट‍िक बीमार‍ियों के कारण भी डॉक्‍टर इस टेस्‍टे को करने की सलाह देते हैं ताक‍ि होने वाला बच्‍चा जन्‍म दोष के साथ न जन्‍म ले। होने वाले बच्‍चे में क‍िसी तरह का संक्रमण न हो इसकी पुष्‍ट‍ि करने के ल‍िये ये टेस्‍ट क‍िया जाता है। 

कब क‍िया जाता है ये टेस्‍ट? (Amnio test in pregnancy) 

ये टेस्‍ट प्रेगनेंसी के 15 से 18 हफ्ते के बीच क‍िया जाता है। अल्‍ट्रासाउंड में ही कई बार डॉक्‍टर को अंदाज़ा हो जाता है क‍ि होने वाले बच्‍चे में क‍िसी तरह की कोई परेशानी है या नहीं। वैसे तो डॉक्‍टर इस टेस्‍ट को करने की सलाह देते हैं पर अगर आपके घर में कोई जेनेट‍िक बीमारी है तो आप खुद भी ये टेस्‍ट करवा सकते हैं। जेनेट‍िक बीमारियों में सेल रोग, हीमोफ‍िल‍िया, थैलेसीम‍िया जैसी बीमार‍ियां शाम‍िल हैं। इस टेस्‍ट को करने से पहले अल्‍फा फिटोप्रोटीन टेस्‍ट क‍िया जाता है। इस टेस्‍ट का र‍िजल्‍ट पॉजिटिव आता है तो एम्‍न‍ियो टेस्‍ट क‍िया जाता है। 

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कैसे होता है एम्‍न‍ियो टेस्‍ट? (Process of amniocentesis test)

इस टेस्‍ट में यूट्रस से एम्‍न‍ियोट‍िक ल‍िक्‍व‍िड न‍िकालकर उसकी जांच की जाती है। इसी ल‍िक्‍व‍िड की मदद से से पेट में पल रहा बच्‍चा सेफ रहता है। इस ल‍िक्‍व‍िड में सेल्‍स, प्रोटीन्‍स मौजूद होते हैं ज‍िससे बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में जानकारी म‍िलती है। अगर समय रहते ये टेस्‍ट हो जाये तो बच्‍चे में बन रही बीमारी का इलाज जन्‍म के साथ शुरू क‍िया जा सकता है। इस टेस्‍ट को करने में 45 म‍िनट का समय लगता है। इंजेक्‍शन की मदद से ल‍िक्‍व‍िड होने वाली मां के शरीर से न‍िकाला जाता है। सुई को एब्‍डोम‍िनल वॉल और यूट्रस के पास डाला जाता है। इंजेक्‍शन से न‍िकले ल‍िक्‍व‍िड को न‍िकालकर लैब में उसकी जांच होती है।

एम्‍न‍ियो टेस्‍ट में क‍िन बातों का ध्‍यान रखें? (Precautions during amniocentesis test) 

amnio test in pregnancy helps child

एम्‍न‍ियो टेस्‍ट करवाने से पहले इस बात का ध्‍यान रखें क‍ि आप ये टेस्‍ट अच्छी लैब से करवायें। इसमें इंफेक्‍शन का खतरा भी रहता है इसल‍िये इसमें साफ-सफाई का अहम रोल है। ध्‍यान दें क‍ि आपके टेस्‍ट के ल‍िये नई सीरींज इस्‍तेमाल की गई हो। खराब या इंफेक्‍टेड सीरींज से एड्स, यूटेर‍िन इंफेक्‍शन, ह‍िपेटाइट‍िस सी जैसी बीमारी का खतरा हो सकता है। इस टेस्‍ट को करने के ल‍िये यूट्रस में सीरींज डाली जाती है ज‍िससे पेट में ऐंठन या पेल्‍व‍िक एर‍िया में दर्द उठ सकता है। अगर ऐसी समस्‍या होती है तो डॉक्‍टर से संपर्क करें। अगर आपको इस टेस्‍ट के बाद बुखार आता है तो भी आपको च‍िक‍ित्‍सक मदद की जरूरत है। सुई से होने वाली सूजन या लाल न‍िशान के बढ़ने को भी नजरअंदाज न करें। गर्भ में कोई हरकत होने पर अपने गाइनोकॉलोजिस्‍ट से म‍िलें। 

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एम्‍न‍ियोसेंटेसिस टेस्‍ट के फायदे (Benefits of amniocentesis test)

benefits of amnio test

  • 35 या उससे ज्‍यादा उम्र में प्रेगनेंसी या जेनेट‍िक ड‍िसऑर्डर का पता लगाने के ल‍िये ये टेस्‍ट सबसे ज्‍यादा क‍िया जाता है। इसके अलावा क‍िसी भी कारण से जब प्रेगनेंसी के बाद अल्‍ट्रासाउंड के नतीजे नेगेट‍िव होते हैं तो ये टेस्‍ट क‍िया जाता है। 
  • होने वाले बच्‍चे के लंग्‍स ठीक तरह से काम कर रहे हैं या नहीं ये पता लगाने के ल‍िये भी एम्‍न‍ियो टेस्‍ट क‍िया जाता है। कई बार फेफड़ों में ऑक्‍सीजन नहीं पहुंचती ज‍िससे होने वाले बच्‍चे को खतरा हो सकता है। 
  • प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले बच्‍चे में इंफेक्‍शन का पता भी इसी टेस्‍ट से लगाया जाता है। कई बार ऐसे संक्रमण दवा की मदद से ही ठीक हो जाते हैं। इसल‍िये समय रहते जांच करवायें। 
  • होने वाले बच्‍चे में  एनीमि‍या यानी खून की कमी का पता लगाने के ल‍िये भी एम्‍न‍ियो टेस्‍ट क‍िया जाता है। ज‍िन मांओं को पहले से एनीम‍िया है उन्हें भी ये टेस्‍ट करवाने की सलाह दी जाती है।
  • कभी-कभी मां के शरीर में एम्‍न‍ियोट‍िक ल‍िक्‍व‍िड की मात्रा बढ़ जाती है उसे कम करने के ल‍िये भी ये टेस्‍ट होता है।  
  • होने वाले बच्‍चे का द‍िमाग या रीढ़ की हड्डी की सही ग्रोथ देखने के ल‍िये भी डॉक्‍टर एम्‍न‍ियो टेस्‍ट करते हैं। 

होने वाले बच्‍चे को जेनेट‍िक बीमार‍ियों से कैसे बचायें? (Protect newborn from genetic disorder)

डॉ सुधा ने बताया क‍ि जेनेटि‍क बीमार‍ियों के चलते ज्‍यादातर मह‍िलाओं को ये टेस्‍ट करवाना पड़ता है। क्रोमोजोम्‍स के जरि‍ये होने वाले बच्‍चे में मां या प‍िता के शरीर से कुछ बीमार‍ियां ट्रांसफर हो जाती हैं। इन्‍हें ही हम जेनेट‍िक या ह‍िरेड‍िट्री ड‍िसीज़ कहते हैं। डायब‍िटीज़, हाई कोलेस्‍ट्रॉल, हार्ट प्रॉब्‍लम भी जेनेट‍िक बीमार‍ियां हैं जि‍नका इलाज समय पर जरूरी है। लंबे समय से घर में चली आ रही बीमारी से होने वाले बच्‍चे को 90 प्रत‍िशत खतरा होता है। इसके साथ ही अगर दादी-नानी को ब्रेस्‍ट कैंसर है तो भी आपको ध्‍यान देने की जरूरत है। बच्‍चे की प्‍लान‍िंग करने से पहले आपको डॉक्‍टर से म‍िलकर अपने पर‍िवार में मौजूद बीमार‍ियों के इत‍िहास के बारे में बताना चाह‍िये। अगर आपको इस दौरान पता चलता है क‍ि पुरूष के पर‍िवार में बीमार‍ियों का इत‍िहास है तो आईवीएफ तकनीक की मदद से होने वाले बच्‍चे को सुरक्षित रख जा सकता है। प्रेगनेंसी के 2 से 3 महीने बाद आपको डॉक्‍टर से संपर्क करना चाह‍िये। ये सही समय होता है जब आप बच्‍चे में हो रही बीमारी का पता लगा सकते हैं।

अगर आप अपने होने वाले बच्‍चे को स्‍वस्‍थ्‍य देखना चाहते हैं तो ये टेस्‍ट जरूर करवायें। एम्‍न‍ियो टेस्‍ट से होने वाले बच्‍चे के अंदर बन रही बीमारी का पता समय पर लग जाता है ज‍िसका इलाज कर उसे ठीक क‍िया जा सकता है। 

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