बच्चे को जन्मजात बीमारियों और समस्याओं से बचाने के लिए गर्भावस्था में इन 5 बातों का ध्यान रखें महिलाएं

अगर आप भी नए माता-पिता बनने जा रहे हैं और अपने बच्चे को जन्मजात से होने वाली बीमारियों से दूर रखना चाहते हैं तो इन तरीकों को अपनाएं। 

Vishal Singh
Written by: Vishal SinghUpdated at: Jan 08, 2021 16:53 IST
बच्चे को जन्मजात बीमारियों और समस्याओं से बचाने के लिए गर्भावस्था में इन 5 बातों का ध्यान रखें महिलाएं

बच्चों में अक्सर कई तरह की बीमारी और समस्याएं पैदो होती रहती है, कई बीमारियां ऐसी है जो बच्चों को जन्मजात से ही रहती है। हालांकि बच्चों में जन्मजात से कई बीमारियों को लेकर दरों में गिरावट आई है लेकिन अभी भी हजारों की संख्या में बच्चे जन्मजात से होने वाली बीमारियों का शिकार होते रहते हैं। जरूरी नहीं कि बच्चों में बहुत गंभीर बीमारियां ही हो, बल्कि कुछ हल्की बीमारियां भी हो सकती है जो सही इलाज के जरिए आसानी से दूर की जा सकती है। आमतौर पर ये जानना उन लोगों के लिए ज्यादा जरूरी है जो पहली बार माता-पिता बनने का सपना देख रहे हैं। अब आपका सवाल होगा कि किन जन्मजात से तो कई प्रकार की बीमारियां हो सकती है लेकिन इससे बचाव कैसे किया जा सके। तो इसके लिए अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है बल्कि हम आपको इस लेख के जरिए बताएंगे कि आप कैसे अपने बच्चों को जन्मजात से होने वाली बीमारियों से दूर रख सकते हैं। हमने इस विषय पर बात की डॉ. अनार सिंह आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, शल्य तंत्र की डॉक्टर राखी मेहरा से। जिन्होंने कई तरह के तरीके और उपाय बताए जिससे बच्चों में जन्मजात से होने वाली समस्याओं को दूर रखा जा सकता है। 

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रोजाना 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड लें

फोलिक एसिड आपके स्वास्थ्य और बच्चे के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है इससे बच्चे के मस्तिष्क और रीढ़ में होने वाले रोगों या खामियों को दूर किया जा सकता है। एक्सपर्ट राखी मेहरा के मुताबिक, इस तरह की समस्याएं बच्चों को गर्भावस्था के दौरान काफी होती है और ये एक आम समस्या है। इसके लिए जरूरी है कि आप अपने डॉक्टर के साथ संपर्क कर फोलिक एसिड को सुनिश्चत करें। आपको गर्भावस्था के दौरान कम से कम एक महीने पहले तक फोलिक एसिड को लेना चाहिए और इसे पूरी गर्भावस्था तक पालन करना चाहिए। इससे आपको अपने और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर देखने को मिलेगा।

गर्भावस्था के दौरान शराब, तंबाकू और दूसरे ड्रग्स से दूरी बनाएं

एक्सपर्ट राखी मेहरा के मुताबिक, कई महिलाओं की आदत होती है कि वो गर्भावस्था के दौरान भी शराब और धूम्रपान करती रहती है, जिसका असर उन्हें अपने बच्चे पर देखना पड़ता है। जबकि ऐसा करना आपके लिए बेहतर गलत कदम हो सकता ह। आपको बता दें कि गर्भावस्था में अल्कोहल का सेवन आपके लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है और ये बच्चे के शरीर में होने वाले विकास में बाधा पैदा करता है जिससे बच्चे को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप शराब और तंबाकू का सेवन पूरी तरह से बंद कर दें। इससे आपके बच्चे का स्वास्थ्य स्वस्थ रह सकता है और अच्छी तरह से विकसित हो सकता है।

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गर्भावस्था में वजन को नियंत्रित बनाए रखें

मोटापा कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है, जिससे आपके बच्चे पर नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। मोटापा गर्भावस्था के दौरान कई तरह की समस्याएं देता है जो सही नहीं है। एक्सपर्ट के मुताबिक, किसी भी वर्ग के वजन वाले लोगों को हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क कर ये जानें कि आपको किस तरह से वजन को बनाए रखना चाहिए जो आपके बच्चे को स्वस्थ रखें। अगर आप बहुत ज्यादा मोटापे का शिकार होते हैं तो इससे बच्चे को हृदय रोग और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। जिससे बचाव के लिए जरूरी है कि आप अपने वजन को नियंत्रण में रखें और खुद को एक शारीरिक गतिविधियों में शामिल रखें। 

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हेल्दी डाइट लें

एक्सपर्ट का कहना है कि कई महिलाएं अब भी ऐसी हैं जिन्हें सिर्फ बाहर का भोजन करने की आदत होती है या फिर वो तैलीय भोजन का सेवन करती है। जबकि ऐसे भोजन से उन्हें और उनके बच्चे को कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है। आपको गर्भावस्था के दौरान अपनी डाइट में बहुत सारे फल, सब्जियां और नेचुरल फूड्स की ओर रुख अपनाना चाहिए, जिससे आप अपने बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखें साख ही उनके शरीर को बेहतर तरीके से विकसित होने में मदद करें। 

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डॉक्टर के पास नियमित जांच कराएं

एक्सपर्ट बताते हैं कि कई न्यू पैरेंट्स में ऐसी आदत होती कि वो नियमित रूप से जांच कराने से पीछे रहते हैं, जिसके कारण गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी मिलना मुश्किल हो जाता है। जबकि नियमित रूप से जांच कराना पैरेंट्स के लिए एक अच्छी आदत हो सकती है जिसकी मदद से बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है और कई तरह की मानसिक और शारीरिक स्थिति को पहचाना जा सकता है। 

(इस लेख में दी गई जानकारी डॉ. अनार सिंह आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष , शल्य तंत्र की डॉक्टर राखी मेहरा से बातचीत पर निर्भर है)।

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