अल्‍ट्रासाउंड मशीन आपके डॉक्‍टर को शरीर के विभिन्‍न अंगों की जांच करने में मदद करता है। अन्य इमेजिंग तकनीकों के विपरीत, अल्ट्रासाउंड कोई विकिरण का उपयोग नहीं करता है। इस कारण इससे गर्भावस्था के दौरान विकसित हो रहे भ्रूण को देखने के लिए पसंदीदा तरीका माना जाता है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं अल्‍ट्रासाउंड के प्रयोगों के बारे में...

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कब पड़ती है अल्‍ट्रासाउंड कराने की जरूरत, जानें शरीर पर कैसे डालता है असर

अल्‍ट्रासाउंड मशीन आपके डॉक्‍टर को शरीर के विभिन्‍न अंगों की जांच करने में मदद करता है। अन्य इमेजिंग तकनीकों के विपरीत, अल्ट्रासाउंड कोई विकिरण का उपयोग नहीं करता है। इस कारण इससे गर्भावस्था के दौरान

Atul Modi
Written by: Atul ModiUpdated at: Oct 08, 2018 10:32 IST
कब पड़ती है अल्‍ट्रासाउंड कराने की जरूरत, जानें शरीर पर कैसे डालता है असर

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अल्ट्रासाउंड स्कैन एक चिकित्सा परीक्षण है जो आपके शरीर के अंदर से लाइव तस्‍वीरों को कैप्चर करने के लिए उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग करता है। इसे सोनोग्राफी के रूप में भी जाना जाता है। इसमें उसी तकनीक का प्रयोग किया जाता है जिसका उपयोग आर्मी के जवान समुद्री जहाज और विमान को डिटेक्‍ट करने के लिए किया जाता है। अल्‍ट्रासाउंड मशीन आपके डॉक्‍टर को शरीर के विभिन्‍न अंगों की जांच करने में मदद करता है। अन्य इमेजिंग तकनीकों के विपरीत, अल्ट्रासाउंड कोई विकिरण का उपयोग नहीं करता है। इस कारण इससे गर्भावस्था के दौरान विकसित हो रहे भ्रूण को देखने के लिए पसंदीदा तरीका माना जाता है। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं अल्‍ट्रासाउंड के प्रयोगों के बारे में...

 

कब पड़ती है अल्‍ट्रासाउंड की जरूरत 

आपको कई कारणों से एक अल्ट्रासाउंड से गुजरना पड़ सकता है... 

  • भ्रूण का आकलन
  • पित्ताशय की थैली रोग का निदान
  • रक्त वाहिकाओं में प्रवाह का मूल्यांकन
  • बायोप्सी या ट्यूमर के इलाज के लिए
  • एक स्तन गांठ का मूल्यांकन
  • अपने थायरॉयड ग्रंथि की जाँच
  • अपने दिल का अध्ययन
  • संक्रमण के कुछ रूपों का निदान
  • कैंसर के कुछ रूपों का निदान
  • जननांग और प्रोस्टेट में असामान्यताएं के बारे में पता लगाया जा सकता है। 

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कैसे होता है अल्ट्रासाउंड

अल्ट्रासाउंड मुलायम या तरल पदार्थ से भरे अंगों की उत्कृष्ट छवियों का उत्पादन करता है, लेकिन यह हवा से भरे अंगों या हड्डियों की जांच के लिए कम प्रभावी है। अल्ट्रासाउंड एक सुरक्षित और दर्दरहित परीक्षण है। इसमें आमतौर पर 15 से 30 मिनट ही लगते हैं। अल्ट्रासाउन्ड में अपके शरीर के भीतरी संरचनाओं की अपेक्षाकृत सटीक छवियों का उत्पादन करने के लिए उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है। अल्ट्रासाउंड के जरिए आप शरीर के भीतर होने वाली हलचल या किसी भी गड़बड़ी को पारदर्शिता से देख सकते हैं यानी अल्ट्रांसाउंड फोटो कॉपी की तरह होता है। जो ध्वनि तरंग टकराकर वापस आती है, उन्हे अल्ट्रासाउंड मशीन द्वारा मापा जाता है, और शरीर के उस विशेष क्षेत्र को एक छवि में बदला जाता है। अधिकांश अल्ट्रासाउंड परीक्षाओं में आपके शरीर के बाहर एक सोनार डिवाइस का उपयोग किया जाता है। हालांकि कुछ अल्ट्रासाउंड में डिवाइस को शरीर के अंदर भी रखा जाता है।

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अल्‍ट्रासाउंड के बाद क्‍या?

अल्‍ट्रासाउंड परीक्षण के बाद, आपका डॉक्टर इमेज की समीक्षा करेगा और शरीर में होने वाली असामान्यताओं की जांच करेगा। जांच से निकले निष्कर्षों पर चर्चा करने के लिए आपको दोबारा बुलाएंगे। अगर अल्‍ट्रासाउंड से वह पूरी तरह से सहमत नहीं होते तो वह आपको जांच की गई क्षेत्र के आधार पर सीटी स्कैन, एमआरआई या ऊतक के बायोप्सी नमूने जैसे अन्य तकनीकों से गुजरना पड़ सकता है। यदि आपका डॉक्टर आपके अल्ट्रासाउंड के आधार पर आपकी हालत का निदान करने में सक्षम है, तो वे तुरंत आपका उपचार शुरू कर सकते हैं।

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