हाइपोसलाइवेशन का कारण हो सकता है लार का कम बनना, जानें इसके 5 बड़े लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 03, 2018
Quick Bites

  • डिहाइड्रेशन, इसकी वजह से लार बनने में बाधा आती है।
  • ज्यादातर मामलों में साधारण इलाज से ही आराम पहुंच जाता है।
  • लार का कम बनना या लार की मात्रा में कमी होना, हाइपोसलाइवेशन कहलाता है।

'नूडल्स देखकर ही मेरे मुंह में पानी आ जाता है।', 'मुझे समोसे बहुत अच्छे लगते हैं, उन्हें देखते ही मेरी लार निकलने लगती है।' इस तरह के वाक्या आपने अपनी जिंदगी में जरूर सुने होंगे। किसी स्वादिष्ट या फिर मनपसंद खाने को देखकर मुंह में लार आना प्राकृतिक प्रक्रिया है। एक स्वस्थ्य व्यक्ति के मुंह में लार का बनना बहुत जरूरी है। यदि किसी को इस चीज में दिक्कत होती है तो यह एक स्वास्थ्य समस्या है। मुंह में बनने वाला यह पानी यानी लार बड़े काम की होती है। यही वजह है कि इसके बनने में आने वाली बाधा समस्याएं खड़ी कर डालती है।

क्यों जरूरी है लार

लार का कम बनना या लार की मात्रा में कमी होना, हाइपोसलाइवेशन कहलाता है। ऐसा तब होता है जब सलाइवरी ग्लैंड्स पर्याप्त मात्रा में लार का उत्पादन या स्राव नहीं कर पातीं। इसकी वजह से मुंह सूखा हो जाता है तथा चबाने, निगलने, स्वाद लेने, बोलने में तकलीफ होने लगती है। साथ ही दांतों में क्षति के साथ ही मुंह में कई इन्फेक्शन के होने का खतरा बढ़ जाता है। मुंह के सूखे होने को अक्सर लोग प्यास लगने का संकेत समझकर अधिक मात्रा में पानी पी लेते हैं और फलस्वरूप होने वाले फ्रीक्वेंट यूरीनेशन को समस्या समझकर घबरा जाते हैं। लार की कमी से होने वाली समस्याएं साधारण तौर पर ठीक होने वाली और गंभीर दोनों ही तरह की हो सकती हैं।

ये कारण हैं जिम्मेदार

  • डिहाइड्रेशन, इसकी वजह से लार बनने में बाधा आती है। यह सबसे आम कारण है। चूंकि इस समय पूरा शरीर ही पानी की कमी से गुजर रहा होता है। अत: इसका असर मुंह पर भी पड़ता है
  • सलाइवरी ग्लैंड में होने वाले किसी इन्फेक्शन की वजह से भी लार की मात्रा में कमी हो सकती है। मम्प्स या अन्य बैक्टीरियल कारण भी इसमें शामिल हो सकते हैं
  • किसी विशेष ऑटोइम्यून सिंड्रोम की वजह से भी लार बनाने वाली ग्रंथियों पर बुरा असर पड़ सकता है। शोध बताते हैं कि रूमेटॉयड आर्थराइटिस से पीड़ित महिलाएं अक्सर इस तरह के सिंड्रोम से ग्रसित हो सकती हैं
  • लार ग्रंथियों में पनपने वाले स्टोन्स के कारण भी कई बार सूजन बढ़ सकती है और लार के निर्माण में दिक्कत आ सकती है
  • कुछ विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन भी कई बार मुंह के सूखने की स्थिति का निर्माण कर सकता है। वहीं कुछ गंभीर रोग या लार ग्रंथियों में सूजन भी ऐसी समस्या ला सकती है।

लक्षणों को भूलकर भी न करें इग्नोर

लार के बनने में बाधा या इसकी मात्रा में कमी से शरीर की कार्यप्रणाली पर भी बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में यदि यह समस्या बार-बार या लंबे समय तक परेशान कर रही है तो इलाज लेना जरूरी है। चिकित्सक इस समस्या के संदर्भ में लक्षणों को जांच कर असल कारण का पता लगाते हैं और उसके मुताबिक औषधियां देते हैं। ज्यादातर मामलों में साधारण इलाज से ही आराम पहुंच जाता है लेकिन गंभीर केसेस में लंबे समय तक दवाइयों लेनी पड़ती हैं। इनसे लार की मात्रा बढ़ाने की कोशिश की जाती है।

क्या हैं इसके बचाव

  • ड्राय माउथ की सामान्य समस्या में कुछ आसान प्राकृतिक या सामान्य उपायों को भी अपनाया जा सकता है, जिससे लार बनने में मदद मिल सकती है, जैसे:
  • कम शुगर वाला च्युंगम चबाएं
  • अधिक से अधिक नाक से सांस लेने की कोशिश करें
  • एक ग्लास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी पावडर डालकर गलारा करें
  • सेलेरी स्टिक चबाएं इससे मुंह में ड्रायनेस की समस्या कम होगी
  • तत्काल लार के लिए नींबू काटकर चाटें।

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