दूसरे शिशु की देखभाल में न करें ये लापरवाही, जिंदगी भर पड़ेगा पछताना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 07, 2018

किसी घर में किलकारी की आवाज सबसे मधुर आवाज होती है और मां के लिए उसके बच्‍चे की आवाज किसी अमृत से कम नहीं। मां और शिशु के रिश्‍ते से अनमोल रिश्‍ता दुनिया में कोई और दूसरा नहीं है। यह रिश्ता तब और खास हो जाता है जब कोई महिला दूसरी बार मां बनती है। जन्‍म लेने के बाद मां की जिम्‍मेदारियां बहुत बढ़ जाती हैं, मां को जितनी मुश्किलों का सामना 9 महीने के गर्भावस्‍था के दौरान करना होता है उससे कहीं ज्‍यादा मुश्किलें बच्‍चे के जन्‍म के बाद आती हैं। भले ही यह समय बहुत चुनौतियों भरा होता है लेकिन इस समय में कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी होता है। अक्सर लोग यह कहते हैं कि पहले शिशु के जन्म के बाद अक्सर महिलाएं दूसरे बच्चे की देखभाल करने में लापरवाही बरत देती है। जिसका खामियाजा बच्चे को जिंदगी भर भुगतना पड़ता है। आज हम आपको दूसरे बच्चे की देखभाल करने की कुछ खास टिप्स बता रहे हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये।

इसे भी पढ़ें : ऐसे करें मानसून शिशु की देखभाल, कभी नहीं पड़ेगा बीमार

इन बातों का ध्यान रखें

  • जन्‍म के 6 महीने बाद तक बच्‍चे के लिए पहला आहार मां का दूध होता है। मां का गाढ़ा पीला दूध यानी कोलेस्‍ट्रम बच्‍चे की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। चिकित्‍सक भी बच्‍चे को 6 महीने तक केवल मां का दूध पिलाने की सलाह देते हैं, 6 महीने के बाद आप बच्‍चे को अन्‍य आहार दे सकती हैं।
  • बच्‍चे की त्‍वचा बहुत नाजुक होती है, इसलिए नवजात शिशुओं को संक्रमण होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसलिए उन्हें छूने या गोद में उठाने से पहले अपने हाथ साबुन से अच्‍छे से साफ कीजिए या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। बाहरी व्‍यक्ति को बच्‍चा उठाने के लिए बिलकुल न दें।
  • यदि शिशु को कब्ज है तो एक कप गर्म पानी में ब्राउन शुगर डालकर शिशु को पिलाएं। इससे उसे काफी आराम मिलेगा।
  • बच्‍चों की मालिस करते वक्‍त ध्‍यान रखना चाहिए। चिकित्‍सक के सलाह के अनुसार ही बच्‍चे को तेल लगाना चाहिए। मालिश हल्के हाथ से करना चाहिए। मालिश दोपहर के समय करना चाहिए, ताकि बच्चे को ठंड न लगे।
  • बच्‍चों के डायपर समय-समय पर बदलने चाहिए नहीं तो बच्‍चों को डायपर रैश हो सकता है। डायपर का चुनाव करते वक्‍त भी ध्‍यन रखना चाहिए, बच्‍चे को अच्‍छी गुणवत्‍ता का डायपर पहनायें।
  • इसके अलावा बच्‍चे की नियमित जांच करायें, चिकित्‍सक के निर्देशों के अनुसार ही उसका ख्‍याल रखें। नियमित टीकाकरण जरूर करायें।
  • बच्‍चे की त्‍वचा के साथ-साथ उसकी हड्डियां भी बहुत नाजुक होती हैं, शुरुआत के महीनों में बच्चे की गर्दन स्थिर नहीं रहती है इसलिए बच्चे को गोद में लेते वक्त या उसे कंधे से लगाते वक्त उसके सिर और गर्दन को अपने हाथ का सहारा जरूर दीजिए।
  • जब बच्‍चा दूध पीता है तब वह सो जाता है, ऐसे में उसका पेट ठीक से नहीं भर पाता है। ऐसे में दूा पिलाते वक्‍त उसके तलवों को अंगुली से गुदगुदाते रहें, ताकि वह भरपेट दूध पी सके।

ऐसे अन्य स्टोरीज के लिए डाउनलोड करें: ओनलीमायहेल्थ ऐप

Read More Articles On Parenting In Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1700 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK