ऐसे करें मानसून शिशु की देखभाल, कभी नहीं पड़ेगा बीमार

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 21, 2018
Quick Bites

  • घर में आये इस नये मेहमान की जिम्‍मेदारी आसान काम नहीं है
  • नवजात का शरीर बहुत नाजुक होता है इसलिए कोई भी गलती उसे अस्‍वस्‍थ कर सकती है
  • नवजात की देखभाल करने की कुछ स्पेशल टिप्स

शिशु की देखभाल करना आसान काम भी है और मुश्किल काम भी है। कभी कभी शिशु की सही तरह से देखभाल कर पाना मां के लिए एक चुनौती भरा हो जाता है। प्रसव के बाद मां की जिम्‍मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्‍योंकि उसे नयी जिम्‍मेदारी मिल जाती है। घर में आये इस नये मेहमान की जिम्‍मेदारी आसान काम नहीं है, इसके लिए जानकारी के साथ-साथ विशेष देखभाल की भी जरूरत होती है। नवजात का शरीर बहुत नाजुक होता है इसलिए कोई भी गलती उसे अस्‍वस्‍थ कर सकती है। आज हम आपको नवजात की देखभाल करने की कुछ स्पेशल टिप्स बता रहे हैं।

 

क्यों जरूरी है शिशु की देखभाल

सभी नवजात शिशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत है, चाहे वह स्वस्थ हो या अस्वस्थ। हर मां को अपने बच्चे को स्तनपान ज़रूर कराना चाहिये क्योकि एक नवजात शिशु के लिए यह पोषक तत्वों का सबसे अच्‍छा स्रोत है, जो बच्चे के विकास में मदद करता है। नवजात देखभाल का यह पहला पहलू है। यह बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए और भविष्य में सभी संक्रमणों से लड़ने में सहायक होता है। स्तनपान के विभिन्न फायदे हैं। वो माताओं जो पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित है मानती है और यह मानती हैं कि उन्‍हें अपने बच्चे को स्तनपान नही कराना चाहिये, यह एक पूरी तरह से गलत अवधारणा है।

 

स्तनपान है जरूरी

नवजात शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है। यह बच्‍चे का पहला आहार होता है और बच्‍चे को कई बीमारियों से बचाता भी है, यदि बच्‍चे ने मां का दूध नहीं पिया तो भविष्‍य में भी उसे कई प्रकार के बीमारियों के होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए हर मां को चाहिए कि वह अपने नवजात को स्‍तनपान करायें। छह महीने की आयु तक तो बच्‍चे को सिर्फ मां का दूध ही पिलाना चाहिए। स्‍तनपान कराने से मां भी ब्रेस्‍ट कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचती है।

इसे भी पढ़ें: कब और कैसे छुड़ाएं शिशु का स्तनपान? इन बातों का रखें ध्यान 

शिशु की देखभाल की अन्य टिप्स

  • बच्चा जितना आराम करना चाहे, उसे आराम करने दें और बच्चे को नींद से ना जगायें।
  • बच्चे को समय-समय पर मां का दूध दें क्योंकि मां का दूध शिशु की आहार पूर्ति करता है।
  • मानसून में बच्चे को कम से कम घर से बाहर ले जाने का प्रयास करें। कमरे में हीटर को बहुत तेज न चलाएं, और अचानक तापमान परिवर्तन से बचें।
  • मानसून में संक्रमण अधिक होता है। कोई भी व्यक्ति जिसे सर्दी-जुकाम या कोई संक्रामक‍ बीमारी है, उसे बच्चे से या मां से दूर रखें।
  • अगर बच्चे को डायरिया या हाइपोथर्मिया की समस्या लगती है, तो तुरंत चिकित्सक को दिखायें।
  • शिशु की नैपी समय-समय पर बदलते रहें क्योंकि गीलेपन से संक्रमण फैल सकता है।
  • बच्‍चे को रोज 15 से 20 मिनट तक सुबह की धूप में टहलायें।
  • बच्चे को नहलाने से पहले उसकी मालिश भी जरूर करें।

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