वजाइना को टाइट रखने के लिए रोजाना करें ये 4 योगासन

Tighten Vagina : डिलीवरी के बाद वजाइना में कई बदलाव होते हैं। इन्हीं में से एक है वजाइना का ढीला होना। योगासनों की मदद से इसे टाइट किया जा सकता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: Jun 25, 2021Updated at: Jun 25, 2021
वजाइना को टाइट रखने के लिए रोजाना करें ये 4 योगासन

गर्भावस्था और प्रसव या डिलीवरी के बाद महिलाओं की वजाइना का ढीला होना स्वभाविक होता है, लेकिन नियमित रूप से योगा को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करके इसे फिर से टाइट किया जा सकता है। योनि की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और उसे शेप में लाने के लिए आप कुछ योगासन कर सकती हैं। इससे डिलीवरी के बाद आपकी वजाइना धीरे-धीरे फिर से पहले वाली शेप में आने लगेगी। 

अगर आप भी मां बन चुकी हैं और आपकी वजाइना लूज हो चुकी है, तो इसके लिए बालासन, शलभासन, सेतुबंधासन और उष्ट्रासन ट्राई कर सकती हैं। इनके नियमित अभ्यास से आपकी वजाइना दोबारा से टाइट होने लगती है। साथ ही ये सभी योगासन वजाइना की मांसपेशियों को भी मजबूत बनाने में मदद करते हैं। योगा एक्सपर्ट रमेश कुमार से जानें इन योगासनों को करने का सही तरीका-

 ‍Balasana for tightened Vagina

1. बालासन (Balasana)

बालासन को चाइल्ड पोज (Child Pose) के नाम से जाना जाता है। इसके नियमित अभ्यास से महिलाओं की ढीली योनि या वजाइना को टाइट होने में मदद मिलती है। यह पेल्विक एरिया की मसल्स को मजबूत बनाने में सहायक होती है। इसे रोजाना करने से मन और दिमाग को शांति मिलती है। साथ ही यह जांघों और कूल्हों में खिंचाव पैदा करता है। बालासन हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। 

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बालासन करने का तरीका (Balasana Steps)

  • बालासन को करने के लिए सबसे पहले किसी शांतिपूर्ण वातावरण में एक योगा मैट बिछा लें।
  • इस पर वज्रासन (घुटनों से पैरों को पीछे की तरफ मोड़कर) में बैठ जाएं। 
  • अपनी कमर और रीढ़ की हड्डी को एकदम सीधा रखें।
  • लंबी गहरी सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को सिर से ऊपर उठाएं। 
  • अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए हाथों और कमर के ऊपरी भाग को आगे या नीचे की तरफ लाएं। इस दौरान आपका सिर और दोनों हाथ जमीन को छूने चाहिए।
  • इस अवस्था में 30 सेकेंड रुकने के बाद सामान्य अवस्था या वज्रासन में आ जाएं।
  • रोजाना इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहरा सकती हैं।
Salabhasana For Tightened Vagina

2. शलभासन (Salabhasana)

शलभासन को टिड्डी पोज या Locust Pose के नाम से भी जाना जाता है। इस आसन में शरीर का आकार टिड्डी जैसा नजर आता है। शलभासन करने से आप अपनी वजाइना हेल्थ को ठीक रख सकती हैं। डिलीवरी के बाद वजाइना ढीली होने पर इसका अभ्यास नियमित रूप से किया जाए, तो इसे दोबारा से शेप में लाया जा सकता है। यह गर्भाशय से संबंधित परेशानियों को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा शलभासन करने से कमर और पीठ दर्द में काफी आराम मिलता है।

शलभासन करने का तरीका (Salabhasana Steps)

  • शलभासन करने के लिए सबसे पहले किसी शांतिपूर्ण स्थान का चयन कर लें। इस जगह पर एक योगा मैट बिछा लें।
  • इस मैट पर आराम से पेट के बल लेट जाएं।
  • दोनों पैरों, पंजों को पास-पास रखें। 
  • अपनी दोनों हथेलियों को दोनों जांघों के नीचे रखें। हथेलियां नीचे की तरफ होनी चाहिए।
  • अब लंबी गहरी सांस लेते हुए अपने पैरों को ऊपर उठाने की कोशिश करें।
  • इस अवस्था में सांस लें और छोड़ें। आप इस पोजिशन में 10-30 सेकेंड तक रहें।
  • फिर धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं और विश्राम करें।
  • इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहरा सकती हैं।
Setu Bandhsana For Tightened Vagina

3. सेतुबंधासन (Setu Bandhasana)

सेतुबंधासन में शरीर एक ब्रिज के समान नजर आता है। इसलिए इसे ब्रिज पोज के नाम से भी जाना जाता है। इसे पीठ के बल लेट कर किया जाता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से पेल्विक एरिया की मसल्स मजबूत बनती हैं और वजाइना या योनि धीरे-धीरे सही शेप में आने लगती है। सेतुबंधासन थायरॉइड, डिप्रेशन में आराम दिलाने के लिए एक बेहतरीन योगासन है। इससे कमर दर्द की समस्या भी ठीक होती है। इसके अलावा यह आसन पीठ, पैर और हाथों की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मददगार होता है।

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सेतुबंधासन करने का तरीका (Setu Bandhasanas Steps)

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। 
  • अपने दोनों घुटनों को मोड़ें और तलवों को जमीन पर रखें।
  • अपनी दोनों हथेलियों से दोनों एंकल पकड़ लें। 
  • अब लंबी गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे कमर, हिप्स और जांघों को ऊपर उठाने की कोशिश करें। 
  • इस अवस्था में 20-30 सेकेंड तक रहें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इस प्रक्रिया को भी आप 3-5 बार कर सकती हैं।
Ustrasana For Tightened Vagina

4. उष्ट्रासन (Ustrasana)

उष्ट्रासन में शरीर ऊंट के समान नजर आता है। इसमें उष्ट्र का मतलब ऊंट होता है। इसलिए इसे उष्ट्रासन कहा जाता है। इस आसन के अभ्यास से महिलाओं की डिलीवरी के बाद ढीली होने वाली योनि या वजाइना को टाइट किया जा सकता है। यह घुटनों के बल किया जाने वाला एक योगासन है, जिसके नियमित अभ्यास से स्वास्थ्य को कई फायदे मिलते हैं। गुस्से को शांत करने के लिए उष्ट्रासन करना बेहद लाभकारी होता है। इसके अलावा कमर दर्द, गर्दन दर्द की समस्या में राहत दिलाता है। साथ ही फेफड़ों की मजबूती और डायबिटीज रोगियों के लिए भी उष्ट्रासन करना फायदेमंद होता है।

उष्ट्रासन करने का तरीका (Ustrasana Steps)

  • इस आसन को करने के लिए सबसे वज्रासन में बैठ जाएं।
  • दोनों जांघों और पैरों को पास-पास रखें।
  • अब अपने घुटनों पर खड़ी हो जाएं।
  • सांस लेते हुए पीछे की तरफ झुकें। झुकते हुए गर्दन पर झटका न लगने दें।
  • अपनी दोनों हथेलियों को दोनों एड़ियों पर रखें।
  • इस अवस्था में आपका सिर पीछे की तरफ झुका होगा।
  • इस अवस्था में धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें।
  • अपनी क्षमतानुसार इस अवस्था में रहें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।
  • इस प्रक्रिया को 3-5 बार दोहराया जा सकता है।

योगासन करते हुए सावधानियां (Precautions During Yoga)

  • अगर आपकी हाल ही में डिलीवरी हुई है, तो डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह पर ही इसे करें।
  • सिजेरियन डिलीवरी वालों को कोई भी योगासन एक्सपर्ट की सलाह पर ही करना चाहिए।
  • शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द होने पर इस योगासन को करने से बचें।
  • आप अपनी वजाइना को स्वस्थ रखने के लिए भी इन योगासनों को कर सकती हैं।

जरूरी नहीं डिलीवरी के बाद ही वजाइना ढीली हो, शारीरिक संबंध बनाने के दौरान भी वजाइना लूज हो सकती है। ऐसे में आप इन योगासनों को नियमित रूप से करके अपनी वजाइना को टाइट कर सकती हैं और उसकी मांसपेशियों को मजबूत बना सकती हैं। शुरुआत में आपको किसी एक्सपर्ट की सलाह और देखरेख में ही इन योगासनों को करना चाहिए। 

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