फर्टिलिटी एप का चुनाव करते समय क्यों बरतें सावधानी

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 31, 2017
Quick Bites

  • फर्टिलिटी एप बताता है कि फर्टिलिटी का सही समय क्या है।
  • यह एप महिला के शरीर के तापमान पर आधारित होता है।
  • लेकिन ज्यादातर एप तथ्यपरक होते हैं न कि प्रमाणिक।

दुनिया तकनीक की गिरफ्त में आ चुकी है और लोग बहुतायत में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं। मोबाइल के जरिये स्मार्ट होती दुनिया में ज्यादातर लोगों के पास स्मार्टफोन मौजूद हैं। अब कोई भी काम हो मोबाइल के जरिये आसान हो गया है। लाइफस्टा‍इल से लेकर खानपान संबंधित हर बात का जवाब स्मार्टफोन में मिल रहा है। मोबाइल में तरह-तरह के मोबाइल एप होते हैं, इसमें एक तरह का फर्टाइल एप भी है। इस एप का क्या काम है और इसके चुनाव में क्या सावधानी बरतें, इसके बारे में इस लेख में विस्तार से चर्चा करते हैं।


क्या है फर्टिलिटी एप

परिवार नियोजन के लिए आप फर्टिलिटी एप का सहारा ले सकती हैं, इसके लिए आपको चिकित्सक के पास भी जाने की जरूरत नहीं होगी। यह एप आपकी फर्टिलिटी साइकिल पर नजर रखती है और यह आपको बताती है कि आप कब अधिक फर्टाइल हैं। इसके प्रयोग के दौरान हर रोज आपको अपने शरीर के तापमान का हिसाब रखना होगा। इसमें मात्र 30 सेकेंड में पता चल जाता है कि आप फर्टाइल हैं या नहीं। इससे आप यह निश्चित कर पायेंगी कि आपको मां बनना है या नहीं। इस एप का फायदा यह है कि विवाहिक जीवन बिताने के दौरान आपको यौन संबंध से परहेज करने की जरूरत नहीं बल्कि इस एप के निर्देशों का पालन करना होगा।


फर्टिलिटी एप का चुनाव

आज मोबाइल में 100 से भी ज्यादा तरह के फर्टाइल एप मौजूद हैं, लेकिन यहां बात यह सामने आती है कि इनका प्रयोग करना क्या वाकई में सही है और क्या इनके द्वारा दिया गया समय सही होता है। क्यों कि अगर इसमें दिया गया समय सही नहीं निकला और आपसे चूक हो गई तो बात दूसरी हो सकती है। यानी आप न चाहते हुए भी गर्भवती हो सकती हैं और चाहते हुए भी मां नहीं बन सकतीं।


क्या कहता है शोध

अमेरिकन बोर्ड ऑफ फै‍मिली मे‍डिसिन नामक पत्रिका में एक शोध छपा, जिसने 2013 और 2015 में मौजूद लगभग 100 फर्टिलिटी एप की गुणवत्ता को मापा। इसमें ज्यादातर प्रेगनेंसी एप में यह लिखा था कि ये केवल अनुमान आधारित परिणाम हैं, जिनकी सच्चाई शत-प्रतिशत नहीं हो सकती है। जबकि इसमें कुछ एप ऐसे भी थे जिनपर विश्वास किया जा सकता था।


तकनीक के प्रति निर्भरता बढ़ी

दरअसल गर्भावस्था पूरी तरीके से हार्मोन आधारित है और अगर इस साइकिल को प्राकृतिक रूप से चलने दिया जाये गर्भधारण करने में समस्या नहीं आयेगी। लेकिन फर्टिलिटी एप पर विश्‍वास करने के कारण ज्यादातर महिलायें तकनीक आधारित चार्ट बनाने लगी, इसलिए वे हमेशा अपने टेंपरेचर, सर्विकल म्यूकस और यूरीन के हार्मोन की जांच करने लगीं। इसके कारण हार्मोन में असंतुलन बढ़ने लगा, जिसका असर गर्भधारण में दिखा। जबकि इसके बजाय प्राकृतिक गर्भनिरोध का प्रयोग ज्यादा सही होता, कंडोम का प्रयोग अवांछित गर्भधारण से बचाता है और यह सबसे सुरक्षित तरीका भी है।


गणना सही नहीं होती

जॉर्जटॉउन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन द्वारा किये गये एक अन्य शोध की मानें तो ज्यादातर फर्टिलिटी एप दिये गये निर्देशों के आधार पर काम करने के बजाय पीरियड कैंलेंडर ट्रैकर के आधार पर काम करते हैं। जिससे महिला द्वारा दी गई सूचना और एप द्वारा दी गई सूचना में तालमेल हो भी सकता है और नहीं भी। ऐसे में गलतफहमी पैदा न हो, इसलिए नियमित रूप से चिकित्सक के संपर्क में रहें और उनके निर्देशों का पालन करें।

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