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नए साल का रिज़ॉल्यूशन प्रेरणा देने के बजाय चिंता क्यों बढ़ाते हैं? डॉक्टर से जानें

अक्सर लोग नए साल में रिज़ॉल्यूशन करते हुए अपनी आदतों में सुधार करते हैं, लेकिन कई बार लोग इन रिज़ॉल्यूशन को पूरा नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण लोगों की एंग्जायटी बढ़ जाती है, लेकिन ऐसा क्यों? आइए लेख में जानें -
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नए साल का रिज़ॉल्यूशन प्रेरणा देने के बजाय चिंता क्यों बढ़ाते हैं? डॉक्टर से जानें

Why New Year Resolutions Increase Anxiety Instead Of Motivation In Hindi: नए साल की शुरुआत के साथ अक्सर लोगों के अपनी आदतों में सुधार करने और फिट रहने के लिए रिज़ॉल्यूशन यानी संकल्प लेते है। इस साल फिट होना है। इस साल ज्यादा पैसे बचाने हैं, इस साल रिश्ते सुधारने हैं, इस साल खुद को पूरी तरह बदल देना है, शुरुआत में यह सब सुनने और सोचने में बहुत मोटिवेटिंग लगता है। लेकिन कुछ ही हफ्तों में यही रिज़ॉल्यूशंस भारी लगने लगते हैं और मन में बेचैनी, डर और एंग्जायटी बढ़ने लगती है। सवाल यह है कि जो चीज हमें आगे बढ़ाने के लिए बनाई जाती है, वही हमें परेशान क्यों करने लगती है। लेकिन कई बार इसके पूरा न होने के कारण लोगों को एंग्जयटी होने और स्ट्रेस होने की समस्या होती है। ऐसे में आइए गेटवे ऑफ हीलिंग की संस्थापक और निदेशक, एमडी (ए.एम.), मनोचिकित्सक, जीवन रसायनज्ञ, कोच और उपचारक डॉ. चांदनी तुगनाइट (Dr. Chandni Tugnait, MD (A.M) Psychotherapist, Life Alchemist, Coach & Healer, Founder & Director, Gateway of Healing) से जानें नए साल का रिज़ॉल्यूशन प्रेरणा देने के बजाय चिंता क्यों बढ़ाते हैं?


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हमारे रिज़ॉल्यूशंस एंग्जायटी क्यों बढ़ा देते हैं? - Why Do Our Resolutions Increase Anxiety?

डॉ. चांदनी तुगनाइट के अनुसार, हर नया साल आते ही लोग एक नई लिस्ट बनाते हैं, लेकिन समय के साथ रिज़ॉल्यूशंस के पूरा न होने के कारण लोगों को एंग्जयटी, स्ट्रेस और बेचैनी होने जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसा कई कारणों से हो सकता है।

1. परफेक्ट बनने का दबाव

नए साल के रिज़ॉल्यूशंस अक्सर “परफेक्ट वर्जन” की मांग करते हैं और हम तय कर लेते हैं कि अब कोई गलती नहीं होगी। ऐसे में रोज एक्सरसाइज करेंगे, जंक फूड नहीं खाएंगे और कभी आलस नहीं करेंगे। अक्सर यह सोच असल जिंदगी से मेल नहीं खाती। जब हम तय किए गए मानकों पर खरे नहीं उतरते, तो खुद को फेल मानने लगते हैं। यही सोच धीरे-धीरे एंग्ज़ायटी में बदल देती है।

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2. बहुत ज्यादा उम्मीदें, बहुत कम समय

हम एक साल में वह सब हासिल करना चाहते हैं जो शायद कई सालों में नहीं होता है। रिज़ॉल्यूशंस अक्सर बहुत बड़े और भारी होते हैं। जब दिमाग को लगता है कि समय कम है और लक्ष्य बहुत बड़े हैं, तो वह अलर्ट मोड में चला जाता है। यही वजह है कि मोटिवेशन की जगह तनाव महसूस होने लगता है।

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3. खुद से लगातार तुलना

नए साल पर सोशल मीडिया पर हर कोई अपनी प्लानिंग, गोल्स और सक्सेस शेयर करता है। कोई सुबह पांच बजे उठ रहा है, कोई मैराथन दौड़ रहा है, कोई पैसे कमाने का लक्ष्य लिख रहा है। हम अनजाने में अपनी ज़िंदगी की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। इससे लगता है कि हम पीछे रह गए हैं, और यही भावना एंग्ज़ायटी को और बढ़ा देती है।

4. खुद को बदलने की ज़िद, समझने की कमी

रिज़ॉल्यूशंस अक्सर इस सोच से आते हैं कि हमारे अंदर कुछ गलत है, जिसे ठीक करना है। हम खुद को स्वीकार करने की बजाय खुद से लड़ने लगते हैं। जब बदलाव आत्म-दबाव से आता है, तो वह थकाने वाला बन जाता है। दिमाग को लगातार लगता है कि वह पर्याप्त नहीं है।

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5. मोटिवेशन नहीं, सुरक्षा चाहिए

सच यह है कि नए साल में हमें मोटिवेशन से ज़्यादा मानसिक सुरक्षा की जरूरत होती है। दिमाग तब बेहतर काम करता है, जब उसे सुरक्षित और समर्थ महसूस होता है। छोटे कदम, लचीले लक्ष्य और खुद के प्रति दयालु रवैया एंग्जायटी को कम करता है।

डॉ. चांदनी तुगनाइट कहती हैं कि रिज़ॉल्यूशंस की जगह इरादे बनाएं। ऐसे इरादे जो दबाव नहीं, दिशा दें। हर दिन खुद से यह पूछें कि आज मैं अपने लिए क्या थोड़ा बेहतर कर सकता हूं। परफेक्ट नहीं, प्रोग्रेस पर ध्यान दें। खुद को बदलने की बजाय खुद को समझने से शुरुआत करें। नया साल कोई दौड़ नहीं है, जहां सबसे पहले पहुंचना जरूरी हो। जिसे धीरे और समझदारी से पढ़ा जाना चाहिए। जब हम रिज़ॉल्यूशंस को सेल्फ केयर और रियलिटी से जोड़ते हैं, तब मोटिवेशन डर नहीं बनता। तब नया साल सच में नई उम्मीद लेकर आता है, न कि नई एंग्ज़ायटी।

निष्कर्ष

नए साल के रिज़ॉल्यूशंस के कारण अक्सर लोगों को एंग्जायटी, स्ट्रेस और बेचैनी होने की समस्या हो सकती है। परफेक्ट बनने का दबाव, बहुत ज़्यादा उम्मीदें, बहुत कम समय, खुद से लगातार तुलना, खुद को बदलने की ज़िद, समझने की कमी और सुरक्षा प्रदान करें। इसके लिए नए साल पर ऐसे रिज़ॉल्यूशंस बनाएं, जिससे प्रेशर महसूस न हो। अधिक स्ट्रेस और एंग्जायटी महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

All Images Credit- Freepik

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  • Jan 02, 2026 19:10 IST

    Published By : Priyanka Sharma

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