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कान में कौन सा तेल डालना चाहिए? जानें साइंस और आयुर्वेद की नजर से

कान हमारे शरीर का एक अहम अंग है, जो सुनने के साथ-साथ शरीर के संतुलन यानी बैलेंस को बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है, लेकिन अक्सर लोग कानों की देखभाल को उतना महत्व नहीं देते जितना देना चाहिए। यहां जानिए, आयुर्वेद के अनुसार, कान में कौन सा तेल डालना चाहिए और साइंस इसके बारे में क्या कहती है?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखते हैं, लेकिन शरीर के कुछ जरूरी अंगों की देखभाल अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। कान भी उन्हीं अंगों में से एक है, हम रोजाना सुनने, बातचीत करने, म्यूजिक का आनंद लेने और शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए कानों पर निर्भर रहते हैं, लेकिन उनकी सही देखभाल के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। कई बार छोटी-छोटी लापरवाहियां, जैसे नहाते समय कान में पानी चले जाना, बार-बार कॉटन ईयरबड्स से सफाई करना या कान में खुजली होने पर नुकीली चीजें डालना, आगे चलकर बड़ी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। कई लोगों का सवाल होता है कि कान में कौन सा तेल डालना चाहिए? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा से बात की, साथ ही हमने Marengo Asia Hospital की सीनियर कंसल्टेंट, ईएनटी और हेड एंड नेक स्पेशलिस्ट Dr. Shilpi Budhiraja से बात की-

कान में कौन सा तेल डालना चाहिए?

1. आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद में कानों की सेहत बनाए रखने के लिए कई औषधीय तेलों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें बिल्वादि तेल को काफी उपयोगी माना जाता है। डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को सुनने में हल्की परेशानी हो या बैलेंस से जुड़ी समस्या महसूस हो रही हो, तो बिल्वादि तेल का उपयोग फायदेमंद हो सकता है।

बिल्वादि तेल कई औषधीय जड़ी-बूटियों से मिलकर बनाया जाता है, जो कानों के अंदर की नसों को पोषण देने और वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है। इस तेल की कुछ बूंदें कान में डालने से कानों के अंदर सूखापन कम होता है और सुनने की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तेल का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है, ताकि इसे सही तरीके और सही मात्रा में इस्तेमाल किया जा सके।

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2. कई लोगों के कानों में बहुत ज्यादा मैल यानी ईयर वैक्स बनता है, जिससे सुनने में परेशानी या कान बंद-सा महसूस होने लगता है। ऐसे मामलों में आयुर्वेद में क्षार तेल का उपयोग लाभकारी बताया गया है। क्षार तेल कान में जमे हुए मैल को धीरे-धीरे नरम करने में मदद करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल सकता है। इसके उपयोग से कानों की सफाई नेचुरल तरीके से हो जाती है और बार-बार ईयर बड्स का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। ध्यान रखने वाली बात यह है कि कान की सफाई के लिए कभी भी नुकीली या कठोर वस्तु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कान के अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंच सकता है।

नेचुरल ईयर केयर टिप्स

आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार, शरीर के अलग-अलग अंगों का संबंध तीन दोषों वात, पित्त और कफ से होता है। डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि सिर वाले हिस्से को मुख्य रूप से कफ का स्थान माना जाता है, लेकिन कान को वात का स्थान बताया गया है। इसका मतलब है कि कानों में होने वाली कई समस्याएं वात दोष के असंतुलन से जुड़ी हो सकती हैं। आयुर्वेद में कानों की नियमित देखभाल और सही तरीके से तेल का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जिससे वात संतुलित रहता है और कान हेल्दी रहते हैं।

  • आयुर्वेदिक डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, नहाते समय कान में पानी नहीं जाना चाहिए। बहुत से लोग नहाते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते, लेकिन बार-बार कान में पानी जाने से इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
  • पानी कान के अंदर जाने से नमी बनी रहती है, जिससे बैक्टीरिया या फंगस पनपने की संभावना बढ़ जाती है। इससे कान में खुजली, दर्द या इन्फेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • इसलिए नहाते समय कान में हल्का कॉटन लगा लेना एक आसान और सुरक्षित उपाय माना जाता है। इससे पानी कान के अंदर जाने से बच जाता है और कान सुरक्षित रहते हैं।

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ear care tips

ENT स्पेशलिस्ट की सलाह

कान में तेल डालने के बारे में ENT डॉ. शिल्पी बुद्धिराजा सावधानी बरतने की सलाह देती हैं। डॉ. शिल्पी बुद्धिराजा कहती हैं कि बिना जांच के किसी भी प्रकार का तेल कान में नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे इंफेक्शन बढ़ सकता है या कान के पर्दे को नुकसान हो सकता है। कई लोग दर्द या खुजली होने पर सरसों या नारियल का तेल डाल देते हैं, लेकिन यदि कान में फंगस, बैक्टीरिया या पर्दे में छेद हो तो यह नुकसानदायक हो सकता है। ईएनटी एक्सपर्ट पहले कान की जांच करते हैं और जरूरत होने पर ही दवा या ईयर ड्रॉप्स देते हैं। इसलिए कान से संबंधित समस्या होने पर स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से परामर्श लेना बेहतर होता है।

NIH की रिपोर्ट क्या कहती है?

NIH की रिपोर्ट के अनुसार, कान में गुनगुना जैतून (olive) या बादाम का तेल डालना कान की गंदगी (earwax) को नरम करने के लिए सुरक्षित और प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। यह कठोर वैक्स को ढीला करने में मदद करता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है। हालांकि, यदि आपके कान के पर्दे में छेद है या कान में संक्रमण है, तो बिना डॉक्टरी सलाह के तेल का उपयोग न करें। सामान्य स्थितियों में यह अन्य दवाओं की तरह ही कारगर और सुरक्षित है।

निष्कर्ष

एक्सपर्ट्स और रिपोर्ट्स के अनुसार, कान में तेल डालना फायदेमंद और नुकसानदेह दोनों हो सकता है। आयुर्वेद में बिल्वादि और क्षार तेल को कान की सेहत और वैक्स साफ करने के लिए उपयोगी माना गया है, वहीं NIH की रिपोर्ट जैतून या बादाम के तेल को सुरक्षित बताती है। हालांकि, ENT सर्जन चेतावनी देते हैं कि यदि कान के पर्दे में छेद या इंफेक्शन हो, तो तेल डालना गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में बिना डॉक्टरी जांच के कान में कुछ भी डालने से बचें।

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Akanksha Tiwari

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आकांक्षा तिवारी हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 6 साल का अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और फिलहाल जागरण न्यू मीडिया (Onlymyhealth) में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। आकांक्षा को स्वास्थ्य, पोषण और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखने का अच्छा अनुभव है। वे पत्रकारिता और जनसंचार में पोस्ट ग्रैजुएट हैं। रिसर्च, SEO और फैक्ट-चेकिंग में उनकी खास पकड़ है और वे हमेशा प्रमाणिक और भरोसेमंद जानकारी देने की कोशिश करती हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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