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नाक में कौन सा तेल डालना है सबसे ज्यादा फायदेमंद? जानें साइंस और एक्सपर्ट की सलाह

नाक सिर्फ सांस लेने का माध्यम ही नहीं बल्कि पूरे रेस्पिरेटरी सिस्टम और दिमाग की सेहत से भी जुड़ी होती है। आयुर्वेद में नाक के लिए कई तेलों का वर्णन मिलता है, ऐसे में ये जानना जरूरी हो जाता है कि नाक में कौन सा तेल डालना चाहिए और इसके बारे में साइंस क्या कहती है?
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हम अक्सर आंखों, स्किन और बालों की देखभाल पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन नाक की सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि नाक हमारे शरीर का बेहद जरूरी अंग है, यह न सिर्फ सांस लेने का रास्ता है बल्कि शरीर को धूल, एलर्जी और प्रदूषण से बचाने का भी काम करती है। बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और लाइफस्टाइल की वजह से आजकल कई लोगों को नाक से जुड़ी समस्याएं जैसे एलर्जी, साइनस, बार-बार जुकाम, नाक में सूखापन और सिरदर्द जैसी दिक्कतें होने लगी हैं। आयुर्वेद में नाक की देखभाल को बहुत महत्व दिया गया है, कहा जाता है कि नाक के जरिए किया गया उपचार सीधे सिर और मस्तिष्क पर प्रभाव डाल सकता है। इसी कारण आयुर्वेद में नाक की सेहत बनाए रखने के लिए नस्य कर्म नाम की विशेष प्रक्रिया बताई गई है, जिसमें नाक में औषधीय तेल की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। इस लेख में हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चेरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा और Marengo Asia Hospital की सीनियर कंसल्टेंट, ईएनटी और हेड एंड नेक स्पेशलिस्ट Dr. Shilpi Budhiraja से जानिए, नाक में कौन सा तेल डालना चाहिए और इसके बारे में साइंस क्या कहती है?

नाक में कौन सा तेल डालना चाहिए?

आयुर्वेद में शरीर के ऊपरी हिस्से यानी सिर, आंख, कान और नाक को उत्तमांग कहा जाता है। इन अंगों की सेहत का सीधा संबंध हमारी इंद्रियों और मस्तिष्क से होता है। इसलिए इनकी देखभाल पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर श्रेय शर्मा बताते हैं कि जब नाक के रास्ते औषधीय तेल डाला जाता है तो यह सिर के अंदर जमा कफ और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसे शिरो विरेचन कहा गया है। यह प्रक्रिया सिर को हल्का करती है और कई समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है।

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1. नाक में डालने के लिए अणु तेल को आयुर्वेद में बेहद प्रभावी माना गया है। आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी इसके बारे में विस्तार से बताया गया है, डॉक्टर श्रेय शर्मा के अनुसार, अणु तेल को तिल के तेल के आधार पर लगभग 40 तरह की औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर तैयार किया जाता है। यह तेल नाक के अंदर की नलिकाओं को साफ रखने में मदद करता है और सिर से जुड़े कई रोगों में उपयोगी माना जाता है। अणु तेल नियमित रूप से इस्तेमाल करने से नाक में सूखापन कम होता है और सांस लेने में आसानी होती है। इसके अलावा, यह तेल वात और कफ दोष को संतुलित करने में भी मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में इन दोषों का संतुलन बनाए रखना अच्छी सेहत के लिए जरूरी होता है।

2. अणु तेल के अलावा नाक में शीरबला तेल का उपयोग भी किया जा सकता है। आयुर्वेद में इसे भी काफी प्रभावी औषधीय तेल माना जाता है। शीरबला तेल खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है जिन्हें सिर में भारीपन, कमजोरी या नसों से जुड़ी समस्याएं होती हैं। यह तेल शरीर में वात दोष को संतुलित करने में मदद करता है और नाक के रास्ते सिर तक पोषण पहुंचाने का काम करता है। इससे मानसिक थकान और तनाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

3. अगर किसी के पास औषधीय आयुर्वेदिक तेल उपलब्ध नहीं है, तो बादाम तेल भी नाक के लिए उपयोग किया जा सकता है। बादाम तेल प्राकृतिक रूप से पोषक तत्वों से भरपूर होता है और नाक के अंदर की सूखापन को दूर करने में मदद करता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जिन्हें ठंड के मौसम में नाक में ड्राईनेस या जलन महसूस होती है। बादाम तेल नाक की त्वचा को मॉइश्चराइज करता है और आराम पहुंचाता है।

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ENT स्पेशलिस्ट की सलाह

ENT डॉ. शिल्पी बुद्धिराजा के अनुसार, नाक में तेल डालना सूखापन दूर करने और इंफेक्शन से बचाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसे सावधानी से करना चाहिए। तेल की ज्यादा मात्रा या गलत तरीके से इसका फेफड़ों में जाना गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। यदि आपको साइनस, एलर्जी या सांस की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना नाक में तेल न डालें।

क्या कहती है रिपोर्ट?

NIH की रिसर्च के अनुसार, नाक में तिल के तेल (Sesame Oil) की बूंदें डालना श्वसन स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता सुधारने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। स्टडी के अनुसार, यह प्रक्रिया नाक की श्लेष्मा झिल्ली (nasal barrier) को मजबूत करती है और नींद की क्वालिटी में सुधार के साथ नाक के pH स्तर को संतुलित रखती है। भविष्य में इसे श्वसन रोगों के बचाव के रूप में व्यापक रूप से अपनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयुर्वेद और मॉडर्न साइंस दोनों ही नाक में तेल डालने (नस्य) को रेस्पिरेटरी हेल्थ के लिए फायदेमंद मानते हैं। अणु तेल, शीरबला या बादाम तेल का सीमित उपयोग नाक की सूखापन दूर करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक शांति में सहायक है। हालांकि, तेल की ज्यादा मात्रा फेफड़ों में जाने से गंभीर समस्याओं का खतरा हो सकता है। ऐसे में किसी एक्सपर्ट की देखरेख में और सही विधि से ही इसका अभ्यास करना चाहिए।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 05, 2026 16:13 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Mar 05, 2026 16:13 IST

    Published By : Akanksha Tiwari
    Reviewed By : Dr Shrey Sharma