डीएचटी (DHT) के कारण गंजेपन के शिकार हो सकते हैं आप, जानें क्या है ये

पुरुषों में एक उम्र के बाद कम या ज्यादा गंजापन देखने को मिल सकता है। खासकर कि सिर के बीच के हिस्से में। यह एंड्रोजन सेक्स हार्मोन के कारण होता है।

Monika Agarwal
बालों की देखभालWritten by: Monika AgarwalPublished at: Feb 05, 2022Updated at: Feb 05, 2022
डीएचटी (DHT) के कारण गंजेपन के शिकार हो सकते हैं आप, जानें क्या है ये

जैसे जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती जाती है वैसे वैसे उनके सिर में कई जगह से गंजापन दिखने लगता है खासकर बीच से। इस तरह की पैटर्न बाल्डिंग को एंड्रोजेनिक एलोपेसिया कहा जाता है। इस प्रकार से बाल झड़ना वैसे तो महिलाओं में भी देखने को मिलता है, लेकिन महिलाओं में यह ज्यादा कॉमन नहीं है। मेल पैटर्न लॉस में सेक्स हार्मोन भी एक अहम भूमिका निभाते हैं। डिहाइड्रो टेस्टेस्टरोन (डीएचटी) एक एंड्रोजन है। यह एक सेक्स हार्मोन होता है। इसका काम पुरुषों के बॉडी हेयर उत्पन्न करने में मदद करना है। कोलंबिया एशिया हॉस्पिटल में सीनियर फिजिशियन डॉ विनय भट्ट बताते हैं कि डीएचटी हार्मोन टेस्टोस्टरोन द्वारा उत्पन्न होता है। इस हार्मोन के कारण पुरुषों की आवाज समय के साथ थोड़ी मोटी हो जाती है। पुरुषों के मसल मास के अधिक होने और शरीर पर बाल आने का भी यही कारण है। पेनिस, टेस्टिकल्स और स्क्रोटम के साइज में वृद्धि होना भी इसी के कारण होता है।

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डीएचटी क्या करता है ?

उम्र बढ़ने के साथ डीएचटी के काम भी बढ़ते जाते हैं और यह फर्टिलिटी बेहतर रखने और मसल मास को संतुलित रखने का काम भी करता है। अगर डीएचटी हेयर फॉलिकल के रिसेप्टर से जुड़ जाता है तो फॉलिकल सिकुड़ने लग जाते हैं और वह बालों को उतना सहारा नहीं दे पाते, जितना उनको चाहिए होता है जिस कारण बाल झड़ने लगते हैं।

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डीएचटी का लेवल की भूमिका

डीएचटी का लेवल अगर जरूरत से अधिक या कम हो जाता है तो शरीर में समस्याएं होनी शुरू हो जाती हैं। अगर प्यूबर्टी के समय इसका लेवल कम होता है तो सेक्सुअल रूप से विकास होने में दिक्कत आ सकती हैं। पुरुषों में डीएचटी की मात्रा कम होने पर सेक्स ऑर्गन जैसे पेनिस और टेस्टीज़ का विकास नहीं हो पाना, गाइनेकोमास्टिया जैसी स्थिति होना और एग्रेसिव प्रोस्टेट ट्यूमर का रिस्क बढ़ जाता है।

डीएचटी का गंजेपन से क्या संबंध है?

आपके बाल फॉलिकल से निकलते हैं। फॉलिकल छोटे छोटे कैप्सूल की तरह दिखते हैं। जो हर बाल को अलग से सहारा प्रदान करवाते हैं। जैसे ही बाल दोबारा आने की साइकिल छोटी होने लगती है, जोकि 5 से 6 साल तक होती है (अर्थात् इस समय अगर आप गंजे भी होते हैं तो बाल दोबारा आना शुरू हो जाते हैं) तो शरीर में मौजूद डीएचटी के अधिक लेवल होने के कारण बालों के फॉलिकल सिकुड़ना शुरू हो जाते हैं। इससे बाल काफी कमजोर और आसानी से टूटने लायक हो जाते हैं। डीएचटी के कारण आपके बालों के फॉलिकल दोबारा विकसित होने में भी काफी समय लग सकता है। इस प्रकार डीएचटी लेवल के अधिक होने के कारण गंजापन होना शुरू हो जाता है।

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डीएचटी को कैसे कम किया जा सकता है?

डीएचटी के कारण अगर बाल झड़ते हैं तो इसे कम करने के लिए बाजार में काफी दवाइयां उपलब्ध हैं। इनसे रिसेप्टर बाइंड होने में और डीएचटी की मात्रा सामान्य होने में मदद मिलती है।

ब्लॉकर्स : यह डीएचटी की बालों के फॉलिकल को सिकोड़ देने वाली क्षमता को कम करते हैं।

इन्हिबिटर : यह शरीर में डीएचटी का उत्पादन कम होने में मदद करते हैं।

इसके अलावा माइनोक्सिडीन, बायोटिन, कैफ़ीन, विटामिन बी 6 और बी 12 से युक्त चीजों को खाने से भी राहत मिल सकती है।

डीएचटी का शरीर में संतुलित मात्रा में रहना काफी आवश्यक होता है नहीं तो गंजेपन और काफी सारी शारीरिक स्थितियों जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं। इसका उपचार जरूर शुरू करवाएं।

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