फेफड़ों और सांस के रोगियों को कब पड़ती है चेस्ट फीजियोथेरेपी (CPT) की जरूरत, जानें जरूरी बातें

फेफड़ों और सांस के मरीजों को इलाज के साथ-साथ कई बार चेस्ट फीजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है। जानें आखिर कैसे ये थेरेपीज मरीजों के लिए मददगार हैं।

Anurag Anubhav
Written by: Anurag AnubhavPublished at: Mar 30, 2020
फेफड़ों और सांस के रोगियों को कब पड़ती है चेस्ट फीजियोथेरेपी (CPT) की जरूरत, जानें जरूरी बातें

कोरोना वायरस के चलते इन दिनों फेफड़ों की सेहत एक बार फिर चर्चा में आ गई है। दरअसल कोरोना वायरस सीधे मरीज के श्वसनतंत्र पर अटैक करता है, जिससे मरीज के फेफड़ों में बलगम बढ़ जाता है और उसे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इन समस्याओं के चलते सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों को होता है, जो पहले से फेफड़े की किसी बीमारी का शिकार हैं। फेफड़ों के ऐसे तमाम रोग हैं जिन्हें खतरनाक समझा जाता है, जैसे- अस्थमा, सीओपीडी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आदि।

चूंकि फेफड़े एक ऐसा अंग हैं, जो अक्सर कुछ मिनट के लिए भी काम करना बंद कर दें, तो व्यक्ति का जीवित रहना मुश्किल हो सकता है। इसलिए इन्हें लगातार फंक्शन करते रहने की जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि जब किसी व्यक्ति को फेफड़ों से जुड़ी कोई गंभीर बीमारी होती है, तो उसे इलाज के साथ-साथ कुछ फिजिकल थेरेपीज (शारीरिक थेरेपीज) की भी जरूरत पड़ती है। इसे मेडिकल भाषा में चेस्ट फीजियोथेरेपी कहते हैं। चेस्ट फीजियोथेरेपी (Chest physiotherapy) को CPT या Chest PT भी कहा जाता है।

किन्हें पड़ती है चेस्ट फीजियोथेरेपी की जरूरत?

किसी व्यक्ति के फेफड़े जब ठीक तरह से काम नहीं करते हैं या उसे सांस लेने में कोई तकलीफ आती है, तो उसे चेस्ट फीजियोथेरेपी की सलाह दी जाती है। चेस्ट फीजियोथेरेपी द्वारा मरीजों में फेफड़ों से संबंधित समस्याएं दूर की जाती हैं, ताकि वो अच्छी तरह सांस ले सके और उसके शरीर में ऑक्सीजन की जरूरत पूरी हो सके। ये कई तरह की थेरेपीज का एक ग्रुप है, जिसमें पॉस्च्युरल ड्रेनेज, चेस्ट परक्यूजन, चेस्ट वाइब्रेशन, टर्निंग, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज जैसी कई थेरेपीज को शामिल किया जाता है। ये थेरेपीज फेफड़ों को मजबूत बनाती हैं, उनके फंक्शन्स को अच्छा करती है और फेफड़ों में जमा बलगम को बाहर निकालने में मदद करती हैं।

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फेफड़ों से संबंधित कई तरह की गंभीर बीमारियों जैसे- सिस्टिक फाइब्रोसिस और सीओपीडी आदि के मरीजों को इलाज के साथ-साथ चेस्ट फीजियोथेरेपी की भी जरूरत पड़ती है। कुछ लोगों को सर्जरी के बाद निमोनिया से बचाने के लिए भी इसे करने की सलाह दी जाती है।

क्या ये किसी तरह की बीमारी का इलाज हैं?

कुछ लोगों को लग सकता है कि चेस्ट फीजियोथेरेपी किसी तरह की बीमारी का इलाज हैं। मगर यहां यह बताना जरूरी है कि ये थेरेपी किसी भी तरह के रोग को ठीक करने का दावा नहीं करती है, बल्कि मेडिकल इलाज के साथ-साथ इस थेरेपी की मदद इसलिए ली जाती है, ताकि दवाएं अपना काम करें और इस थेरेपी की मदद से मरीज के फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाया जा सके। आमतौर पर इस तरह की थेरेपीज की जरूरत छोटे बच्चों को पड़ती है, जिन्हें फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होती हैं।

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किन्हें नहीं कराना चाहिए चेस्ट फीजियोथेरेपी?

आपको फीजियोथेरेपी कब कराना चाहिए, इसकी जानकारी तो आपको चिकित्सक ही दे सकते हैं। हां मगर, कुछ विशेष स्थितियों में चेस्ट फीजियोथेरेपी नहीं करानी चाहिए, क्योंकि ये ऐसे समय में घातक हो सकती है। आपको इनके बारे में बताते हैं।

  • जिनके फेफड़ों से खून निकल रहा हो।
  • जिनके सिर या गर्दन में कोई चोट हो।
  • जिनके रिब्स की हड्डी टूट चुकी हो।
  • जिन्हें फेफड़े पूरी तरह से डैमेज हो चुके हों।
  • जो गंभीर अस्थमा (एक्यूट अस्थमा) के रोगी हों।
  • जिन्हें पल्मोनरी एम्बोलिज्म रोग हो।
  • स्पाइनल एंजरी वालों को भी ये थेरेपी नहीं लेनी चाहिए।
  • अगर शरीर में कहीं भी कोई ताजा घाव, कटे का निशान या जली हुई त्वचा है, तो भी ये थेरेपी नहीं लेनी चाहिए।

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