कोविड की जांच के लिए बनाई गई 'इलेक्ट्रिक नाक', सूंघकर ही लगा लेगी पॉजिटिव मरीजों का पता

इजरायल के वैज्ञानिकों ने कोरोना की जांच के लिए एक नई तकनीक का निर्माण किया है, जिसका नाम है इलेक्ट्रिक नाक जानते हैं इसके बारे में सब कुछ...

Garima Garg
Written by: Garima GargPublished at: Jun 07, 2021
कोविड की जांच के लिए बनाई गई 'इलेक्ट्रिक नाक', सूंघकर ही लगा लेगी पॉजिटिव मरीजों का पता

अभी हाल ही में अपने देश में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर (Indian Council of Medical Research- ICMR) ने रैपिड एंटीजन टेस्ट (rapid antigen tests) को मंजूरी दी थी। साथ ही एक एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें मायलैब कोविड-19 होम टेस्ट को घर पर करने का तरीका और सावधानी के बारे में बताया गया था। अब एक और नई तकनीक कोरोना (Covid-19) की जांच के लिए सामने आई है। ये तकनीक इजरायल में पेश की गई है। इजराइल के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक का विकास किया है, जिसके माध्यम से आसानी से कोरोना की जांच की जा सकती है। इस तकनीक का नाम है 'इलेक्ट्रिक नाक' (3D-printed electric nose)। वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि इस नाक के प्रयोग से 94 फीसदी तक कोरोना के सही परिणाम सामने आएंगे। आज का हमारा लेख इसी तकनीक के बारे में है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि इलेक्ट्रिक नाक कैसे काम करती है। साथ ही जानेंगे कि इलेक्ट्रिक नाक को पेन 3 (Pen3) का नाम क्यों दिया गया है। पढ़ते हैं आगे...

वैज्ञानिकों का कहना है, व्यक्ति को इस नाक को लगाकर सूंघना है और ऐसा करने से 80 सेकंड के अंदर कोरोना के नकारात्मक व सकारात्मक परिणाम सामने आ जाएंगे। 

कैसे काम करती है इलेक्ट्रिक नाक?

बता दें कि यह तकनीक विजन इंस्टीट्यूट इजरायल (Weizmann Institute of Science in Israe) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई है। उन्होंने जानकारी दी है कि यह एक 3D प्रिंटेड इलेक्ट्रॉनिक नाक (3D-printed electric nose) है, जिसे नाक में लगाकर प्रयोग किया जा सकता है। जब कोरोना संक्रमित नाक को अपनी नाक में लगाता है तो नाक के अंदर जो रसायन मौजूद होते हैं उनकी इलेक्ट्रिक नोज जांच करके परिणाम बताता है कि मरीज सकारात्मक है या नकारात्मक। अब सवाल यह है कि वह रसायन की स्मैल को यह नोज को कैसे पहचानते हैं? बता दें कि शोधकर्ताओं के अनुसार, हर बीमारी की अपनी एक खुशबू होती है। ऐसे में उस खुशबू से शरीर के मेटाबॉलिक प्रोसेस में बदलाव होता है। इसी फार्मूले का इस्तेमाल नई जांच को तैयार करने के दौरान किया गया है। ऐसे में यह पेन नाक में वोलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स Volatile organic compounds (VOC) की जांच करने में कारगर है।

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इलेक्ट्रिक नोज का नाम पेन3 क्यों रखा गया?

बता दें कि यह एक लंबी ट्यूब की तरह होती है, जिसमें खास सेंसर लगे हैं। ऐसे में यह नाक के अंदर मौजूद वायरस का पता लगाती है इसलिए इसका नाम पेन 3 रखा गया है।

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कैसे की गई इस नई तकनीक की जांच?

इस नई तकनीक की जांच के लिए 503 लोगों की मदद ली गई। उन लोगों से इलेक्ट्रिक नोज देकर सूंघने के लिए कहा गया, जिसके दौरान 27 लोगों की रिपोर्ट कोरोना वायरस पॉजिटिव आई। ये जानकारी नई तकनीक ने एक दम सटीक दी है। प्रोफेसर सोबेन (Scientists Sobel) के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस तकनीक का प्रयोग हम भीड़ वाले इलाकों में कर सकते हैं। इसके अलावा एयरपोर्ट पर भी इस तकनीक में इसका इस्तेमाल करना सुरक्षित है। 

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक नोज के जरिये अब कोरोना के परिणामों के लिए ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं है। कुछ सेकेंडों में ही कोरोना का सकारात्मक या नकारात्मक परिणाम सामने आ जाएगा। हालांकि अभी इसका इस्तेमाल भारत में कोरोना मरीजों पर नहीं किया गया है। बता दें कि 5 अप्रैल के बाद से कोरोना के केस कम होते नजर आ रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1,00,636 नए मामले मिले हैं। हालांकि ये आंकड़े बीते दिनों के मुकाबले कम है।

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