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मल के साथ अनपचा खाना क्‍यों न‍िकलता है? जानें कारण और खाना पचाने के उपाय

खराब पाचन या पेट से जुड़ी कई समस्‍याओं के कारण मल के साथ अनपचा खाना न‍िकल सकता है। जानें मुमक‍िन कारण और बचाव के उपाय।
मल के साथ अनपचा खाना क्‍यों न‍िकलता है? जानें कारण और खाना पचाने के उपायमल के साथ अनपचा खाना क्‍यों न‍िकलता है? जानें कारण और खाना पचाने के उपाय

क्‍या अपने कभी मलद्वार के जर‍िए खाना न‍िकलने की समस्‍या का सामना क‍िया है? कई बार खाना ठीक तरह से पच नहीं पाता और ब‍िना पचे ही खाने के टुकड़े मलद्वार के जरिए शरीर के बाहर न‍िकल आते हैं। आपको ये आहार टुकड़े या अलग रंग के रूप में मल के साथ न‍िकलते हुए नजर आते हैं। लेक‍िन इसका कारण क्‍या है? सामान्‍य तौर पर देखा जाए, तो खाना डाइजेस्‍ट होने में 24 से 72 घंटे का समय लगता है। लेक‍िन खाना पचने का अंतराल इस बात पर न‍िर्भर होता है क‍ि आपने क्‍या खाया है। अगर पाचन से जुड़ी कोई समस्‍या है, तो खाना पचने में द‍िक्‍कत हो सकती है। इस लेख में हम जानेंगे क‍ि आख‍िर क्‍यों मल के साथ खाना शरीर के बाहर न‍िकल आता है और इससे बचने के ल‍िए क्‍या करना चाह‍िए। इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने लखनऊ के केयर इंस्‍टिट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज की एमडी फ‍िजिश‍ियन डॉ सीमा यादव से बात की। 

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मल के सा‍थ खाना न‍िकलने के कारण 

गैस्ट्रोइन्टेस्टनल ट्रैक्ट चार चीजों से म‍िलकर बनती है। इसोफेगस, पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत। हर एक अंग खाने को पचाने की प्रक्र‍िया में अपना काम करता है। लेक‍िन कई बार इन अंगों की मदद से खाना नहीं पच पाता। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे- 

1. न पच पाने वाले आहार खाना 

हमारे शरीर में मौजूद बैक्‍टीर‍िया खाने को अच्‍छी तरह से तोड़कर पचने लायक बना देते हैं। लेक‍िन ऐसे आहार ज‍िनमें फाइबर की ज्‍यादा हो, उन्‍हें पचा पाना थोड़ा मुश्‍क‍िल होता है। फाइबर हमारे पेट के ल‍िए फायदेमंद है, लेक‍िन इसका ज्‍यादा सेवन करने से फाइबर ब‍िना पचे शरीर के बाहर मल के रास्‍ते न‍िकल आता है। खाना अच्‍छी तरह से पेट में पच जाए, इसके ल‍िए अपनी सब्‍ज‍ियों को अच्‍छी तरह से उबालकर खाएं। इससे सब्‍ज‍ियां मुलायम हो जाती हैं। कॉर्न, स‍ीर‍ियल्‍स, गाजर, सीड्स, नट्स आद‍ि का सेवन करने से पहले सावधानी बरतनी चाह‍िए।  

इसे भी पढ़ें- सेहत के लिए जरूरी है मजबूत पाचनतंत्र, जानें पाचन को बेहतर बनाने के लिए क्या करें और क्या नहीं    

2. खाने को चबाकर न खाना 

कुछ लोगों की आदत होती है वो खाने को अच्‍छी तरह से चबाए ब‍िना ही न‍िगल लेते हैं। ऐसा करने से खाना पेट में जाकर अच्‍छी तरह से पच नहीं पाता और ब‍िना पचे ही शरीर से बाहर आ जाता है। दांतों की मदद से आहार को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है। सलाइवा के साथ म‍िलकर खाना मुलायम बनता है और फ‍िर उसे पचा पाना आसान होता है। खाना अच्‍छी तरह से चबाकर नहीं खाएंगे, तो डाइजेस्‍ट‍िव इंजाइम्‍स खाने को सीधा शरीर के बाहर न‍िकाल देंगे। . 

3. बीमारी का संकेत

मलद्वार से खाना बाहर न‍िकल आना हमेशा उतनी गंभीर समस्‍या नहीं होती। कई बार क‍िसी बीमारी के कारण भी ऐसा हो सकता है। डायर‍िया होने पर भी ऐसा होता है। लेक‍िन पैंक्र‍ियाज में कोई बीमारी होना या वजन घटने के कारण खाना ठीक से पच नहीं पा रहा है, तो आपको डॉक्‍टर से सलाह लेनी चाह‍िए। इसके अलावा भी कुछ बीमार‍ियां हैं ज‍िनके कारण मलद्वार से खाना बाहर न‍िकल सकता है- 

  • एसिड रिफ्लक्‍स (Acid reflux)
  • सीलिएक डिसीज (Celiac disease)
  • कब्ज (Constipation)
  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिसीज (Inflammatory bowel disease)
  • पेट में अल्सर (Stomach Ulcer)
  • लैक्टोज इंटॉलरेंस (Lactose intolerance)

पाचन क्र‍िया को बेहतर कैसे करें?

  • खाने के बाद तुरंत न सोएं, कुछ देर टहलें। 
  • खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन न करें।
  • खाने को अच्‍छी तरह से चबाकर खाएं। 
  • रोजाना कसरत करें। 
  • खाने और सोने का समय तय करें। 
  • खाने और सोने के बीच 4 से 5 घंटे का गैप रखें। 
  • रोजाना पर्याप्‍त मात्रा में पानी का सेवन करें। 
  • ताजा और गरम खाना खाएं।
  • अपनी डाइट में हेल्‍दी फैट, दही को शाम‍िल करें।

इन ट‍िप्‍स की मदद से पेट से जुड़ी समस्‍या से बच पाएंगे और पाचन क्रि‍या सुधर जाएगी। लेख पसंद आया हो, तो शेयर करना न भूलें। 

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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  • Current Version

    Oct 27, 2022 10:20 IST

    Published By : Yashaswi Mathur

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