दिख रहे हैं ये 8 लक्षण तो आप भी हो सकते हैं 'टॉक्सिक पॉजिटिविटी' के शिकार, जानें इसे रोकने के उपाय

टॉक्सिक पॉजिटिविटी के शिकार व्यक्ति गंभीर और नामुमकिन परिस्थितियों में भी पॉजिटिव रहने का ढोंग करते हैं, इसका मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Aug 18, 2021 12:01 IST
दिख रहे हैं ये 8 लक्षण तो आप भी हो सकते हैं 'टॉक्सिक पॉजिटिविटी' के शिकार, जानें इसे रोकने के उपाय

इंसान के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण (Positive Mindset) होना बहुत जरूरी होता है। यहां तक की इंसान की ग्रोथ और उसकी सेहत के लिए भी सकारात्मक यानी पॉजिटिव रहना बेहद जरूरी होता है। लेकिन जब पॉजिटिविटी किसी भी इंसान पर हावी हो जाती है तो यह इंसान के लिए घातक हो सकती है। कोई भी व्यक्ति हर वक्त पॉजिटिव नहीं रह सकता है लेकिन कुछ लोगों में यह देखा गया है कि वे हर समय पॉजिटिव रहते हैं। ऐसे इंसान नामुमकिन परिस्थितियों में भी पॉजिटिव दिखते हैं। ऐसी परिस्थितियां जिनमें इंसान का सकारात्मक रह पाना नामुमकिन होता है। नामुमकिन और दर्दनाक परिस्थितियों में इंसान को वास्तविकता को स्वीकार अपनी मनोदशा जरूर व्यक्त करनी चाहिए। कठिन और विषम परिस्थितयां हर इंसान के जीवन में आती हैं लेकिन ऐसी कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी इंसान का सकरात्मक होना खतरे की निशानी है। इस परिस्थिति को मनोवैज्ञानिक टॉक्सिक पॉजिटिविटी (Toxic Positivity) कहते हैं। आइये जानते हैं टॉक्सिक पॉजिटिविटी के कारण, लक्षण और बचाव के बारे में।  

टॉक्सिक पॉजिटिविटी (विषाक्त सकारात्मकता) क्या है? (What is Toxic Positivity?)

इंसान का सकारात्मक और आशावादी होना बहुत जरूरी होता है। अगर आपका दृष्टिकोण सकारात्मक है जीवन में आगे बढ़ने और विपरीत परिस्थितियों से जूझने में आपको आसानी होगी। लेकिन जब इंसान सकारात्मक होने का मुखौटा पहन लेता है तो यह स्थिति खतरनाक हो जाती है। इंसान के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण होने से उसका मानसिक स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। लेकिन झूठी सकारात्मकता या सकारात्मकता का दिखावा करना मानसिक स्वास्थ्य और जीवन दोनों पर विपरीत प्रभाव डालता है। जब इंसान कठिनतम और नामुमकिन परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहने का दिखावा करता है, जिस परिस्थिति में सकारात्मक रहना नामुमकिन है तप इसे टॉक्सिक पॉजिटविटी कहा जाता है। कोई भी इंसान जीवन में हर समय सकारात्मक नहीं रह सकता है। सभी के जीवन में ऐसा समय जरूर आता है कि उस परिस्थिति में इंसान सकारात्मक रह ही नहीं सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपनी वास्तविक भावनाओं को ईमानदारी से व्यक्त करना फायदेमंद होता है। टॉक्सिक पॉजिटिविटी इंसान के सकारात्मक रहने की स्थिति को चरम पर ले जाती है, जिस परिस्थिति में इंसान को पॉजिटिव नहीं रहना चाहिए उस परिस्थिति में भी वह पॉजिटिव रहता है। टॉक्सिक पॉजिटिविटी एक विश्‍वास है जिसमें लोग यह ठान कर बैठ जाते हैं कि कितनी भी बुरी और विपरीत परिस्थिति क्यों न हो हम पॉजिटिव और आशावादी रहेंगे, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में सकारात्मक दिखने की झूठी कोशिश आपकी सेहत और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। 

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टॉक्सिक पॉजिटिविटी के लक्षण (Toxic Positivity Symptoms)

टॉक्सिक पॉजिटिविटी एक ऐसी मनोदशा है जिसमें इंसान खुद को जबरदस्ती पॉजिटिव दिखाता है चाहे परिस्थिति कितनी विपरीत क्यों न हो। यह मनोदशा इंसान के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए हानिकारक होती है। टॉक्सिक पॉजिटिविटी के लक्षण अक्सर इंसान को समझ में नहीं आते हैं। ऐसे में इन संकेतों को पहचानकर आप टॉक्सिक पॉजिटिविटी के लक्षणों को जान सकते हैं।  

1. गंभीर नुकसान और बेहद विपरीत परिस्थिति में भी पॉजिटिव रहने का ढोंग करना। 

2. किसी भी व्यक्ति के साथ हुई गंभीर घटना के बाद भी उसे सकारात्मक रहने की सलाह देना। 

3. समस्याओं का सामना करने के बजाय उन्हें नकार देना। 

4. खुद के उदास या दुखी होने पर गुस्सा करना। 

5. वास्तविक भावनाओं को छिपाना। 

6. जो लोग हर परिस्थिति में पॉजिटिव नहीं हैं उनका मजाक बनाना। 

7. 'यह और भी बुरा हो सकता था' कहकर दूसरों को सकारात्मक रहने की सलाह देना। 

8. आपनी वास्तविक भावनाओं को कभी भी व्यक्त नहीं करना। 

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टॉक्सिक पॉजिटिविटी के कारण (Toxic Positivity Causes)

टॉक्सिक पॉजिटिविटी इंसान की ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें वह हर कठिन और विपरीत परिस्थितियों या दुःख भरे समय में भी सकारात्मक रहने का दिखावा करता है और दूसरों को भी ऐसी कठिन परिस्थितियों में सकारात्मक रहने की सलाह देता है। हालांकि टॉक्सिक पॉजिटिविटी का कोई सटीक कारण नहीं होता है। यह एक ऐसी मनोदशा है जिसमें इंसान खुद को पॉजिटिव दिखाने की कोशिश कुछ अधिक ही करने लगता है और धीरे-धीरे यह उसकी आदत हो जाती है। ऐसे व्यक्ति जो टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार होते हैं वह अपनी जिंदगी से अपनों को खो देने की स्थिति में भी सकारात्मक रहने की कोशिश करते हैं।

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टॉक्सिक पॉजिटिविटी क्यों है खतरनाक? (Why Toxic Positivity is Dangerous?)

आमतौर पर इंसान का सकारात्मक रहना फायदेमंद होता है। इंसान अगर सकारात्मक दृष्टिकोण और आशावादी है तो उसे जीवन में आगे बढ़ने और परिस्थितियों का सामना करना में आसानी होती है। लेकिन जब सकारात्मक रहने की आदत आप पर हावी हो जाती है या यूं कहें आप खुद को पॉजिटिव दिखाने का ढोंग करने लगते हैं तो यह खतरनाक हो सकता है। इंसान का हर परिस्थिति में पॉजिटिव रहना मुश्किल होता है इसलिए आपनी भावनाओं को परिस्थित के हिसाब से व्यक्त करना चाहिए। टॉक्सिक पॉजिटिविटी से ग्रसित लोग सिर्फ खुद को पॉजिटिव दिखाने की कोशिश ही नहीं करते हैं बल्कि दूसरों को भी पॉजिटिव रहने के सलाह भी देते हैं। टॉक्सिक पॉजिटिविटी के कुछ प्रमुख जोखिम इस प्रकार से हैं।

व्यक्तिगत लॉस को नजरअंदाज करना - टॉक्सिक पॉजिटिविटी के शिकार व्यक्ति खुद के लॉस को नजरअंदाज करने का काम करते हैं। ऐसे व्यक्ति जो टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार होते हैं वे पर्सनल लॉस के साथ-साथ अपने आप पास के लोगों को भी प्रभावित करते हैं।

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शर्मिंदगी का अहसास - टॉक्सिक पॉजिटिविटी आपके लिए शर्मिंदगी का कारण भी बन सकती है। ऐसे लोग जबरदस्ती अपनी भावनाओं को दबाने के काम करते हैं जिसका अहसास बाद में होने पर आप शर्मिंदगी महसूस कर सकते हैं।

लोगों से अलगाव - ऐसे लोग जो नामुमकिन परिस्थितियों में भी पॉजिटिव रहने का दिखावा करते हैं या अन्य लोगों को भी इस बात के लिए प्रेरित करते हैं वे कुछ समय बाद लोगों से खुद को अलग महसूस करने लगते हैं। ऐसे व्यक्तियों से लोगों का संपर्क भी खत्म हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव - ऐसे व्यक्ति जो टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार होते हैं उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका गहरा असर पड़ता है।

टॉक्सिक पॉजिटिविटी से उबरने का तरीका (Tips to Overcome Toxic Positivity)

टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार होने पर इंसान हर विपरीत परिस्थिति में सकारात्मक रहने का दिखावा करता है जो कि सेहत और मेंटल हेल्थ के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में आप इस गंभीर समस्या से उबरने के लिए इन बातों का पालन कर सकते हैं।

  • दुःख, निराशा और नकारात्मक भावनाओं को भी एक मानवीय अनुभव मानना। 
  • विपरीत परिस्थितियों को नजरअंदाज करने के बजाय उससे निपटने की कोशिश करें।
  • हरेक व्यक्ति पर अपनी पॉजिटिविटी को थोपने का प्रयास न करें। 
  • नियमित रूप से योग और मेडिटेशन का अभ्यास करें।
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इंसान का पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी और फायदेमंद होता है लेकिन अगर कोई भी व्यक्ति टॉक्सिक पॉजिटिविटी का शिकार हो गया है तो इसकी वजह से उसकी सेहत, जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।  कोई भी इंसान हर समय सकारात्मक यानी पॉजिटिव नहीं रह सकता है इस बात को पहचानें और सकारात्मक रहने के साथ-साथ अपनी असल भावनाओं की भी कद्र करें। 

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