अगर आपके बच्चे को भी आता है तेज गुस्सा तो ऐसे करें कंट्रोल

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 29, 2018
Quick Bites

  • बच्चों का दिमाग पैदा होने के साथ बिल्कुल कोरा होता है।
  • आजकल ज्यादातर बच्चे हाइपर एक्टिव होते हैं।
  • ऐसे बच्चों में तेज गुस्सा और मार-पीट करने की बुरी आदत भी देखी जाती है।

कहते हैं बच्चों का दिमाग पैदा होने के साथ बिल्कुल कोरा होता है। इसके बाद बच्चा अपने आस-पास की चीजों से धीरे-धीरे सीखता जाता है। जो काम बच्चे जल्दी-जल्दी करते हैं उन्हें उसकी आदत हो जाती है। आजकल की जनरेशन में ज्यादातर बच्चे पैदा होने के साथ ही बेहद तेज दिमाग के होते हैं इसलिए हाइपर एक्टिव होते हैं। हाइपर एक्टिव होना कई मायनों में अच्छा है तो कई मायनों में ये खराब भी है। ऐसे बच्चे चीजों को जल्दी सीखते, समझते हैं और दुहरा सकते हैं लेकिन इसके साथ-साथ कई बार ऐसे बच्चों में तेज गुस्सा करने और मार-पीट करने की बुरी आदत भी देखी जाती है। बच्चों के स्वभाव में ये परिवर्तन कुछ तो हार्मोन्स की गड़बड़ी के कारण होता है लेकिन ज्यादातर इसका कारण उसके आसपास का माहौल ही होता है। अगर आपका बच्चा भी हाइपर एक्टिव है तो इन तरीकों से उसे समझा सकते हैं।

बच्चों को दूसरों के सामने न डाटें

हम सबका अपना आत्मसम्मान होता है जिसको अगर ठेस लगे तो हमें बुरा लगता है। आमतौर पर 3 से 4 साल के हाइपर एक्टिव बच्चों में आत्मसम्मान की भावना विकसित हो जाती है। ऐसे में अगर बच्चों को आप उनके दोस्तों या रिश्तेदारों के सामने डांटते हैं और मारते हैं तो उन्हें बुरा लगता है और उनके आत्मसम्मान को धक्का लगता है। अगर बच्चों को आप अक्सर सबके सामने डांटते हैं तो इससे बच्चों का आत्मविश्वास भी कमजोर होता है और वो बाद में अपनी हाइपर एक्टिविटी को खो सकते हैं। अगर बच्चे ने कोई गलती की है तो कोशिश करें कि उसे अकेले में समझाएं और शांति के साथ समझाएं न कि चिल्लाकर बताएं। बच्चों से गलतियां होना स्वाभाविक है क्योंकि उनका मन वयस्क से ज्यादा चंचल होता है और ये उनका स्वभाव होता है।

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बच्चों को कभी भी मारें मत

बहुत से माता-पिता बच्चों को छोटी-छोटी गलतियों पर मारने लगते हैं। मार खाने पर बच्चे सहम जाते हैं और डर जाते हैं इसलिए संबंधित काम को सुधारने का प्रयास करने लगते हैं। लेकिन अगर आप बच्चों को बहुत ज्यादा मारते-पीटते हैं और अक्सर ही ऐसा करते हैं तो बच्चों का डर धीरे-धीरे जाता रहता है और इसकी जगह नफरत और गुस्से की भावना आनी शुरू हो जाती है। ऐसे में कुछ समय तक बच्चे गुस्से को कंट्रोल करते हैं और उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है जबकि थोड़े दिन बाद ही वो आपको गुस्से का जवाब देने लगते हैं।

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बच्चों की गतिविधि पर रखें नजर

बच्चे अगर अचानक से बेवजह गुस्सा करने लग जाएं तो उनकी तमाम गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दें। कई बार दोस्तों से लड़ाई-झगड़े के कारण, स्कूल में बार-बार डांट खाने के कारण या किसी के बार-बार परेशान करने के कारण भी बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है। ऐसी स्थिति में आप बच्चों के स्कूल में उसकी स्कूल टीचर या स्कूल ले जाने वाली गाड़ी के ड्राइवर से भी पूछ सकते हैं। कई परिवारों में शुरुआत से ही बच्चों और खासकर लड़कियों को तमाम तरह के बंधनों में रखा जाता है, जिसके कारण कई बार बच्चे घर के अंदर या बाहर कुछ गलत होने पर मां-बाप से कुछ नहीं बताते हैं और सबकुछ सहते जाते हैं। इन बातों का बालमन पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके कारण भी बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं।

बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान देना जरूरी है

कई मां-बाप बच्चों को दिनभर सिर्फ पढ़ने के लिए ही टोकते रहते हैं। बार-बार टोकने से बच्चों में खीझ पैदा होने लगती है और वो गुस्सा करने लगते हैं। हाइपर एक्टिव बच्चों का ज्यादातर दिमाग खेलने-कूदने में ही लगा रहता है। लेकिन ऐसे बच्चे आम बच्चों से कम समय में ही अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं इसलिए बच्चों पर दिनभर पढ़ने का दबाव न बनाएं। उन्हें खुद से थोड़ा समय खेलने के लिए दें ताकि उन्हें किताबी के साथ-साथ सामाजिक और व्यवहारिक ज्ञान भी अच्छा हो।

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