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माता-पिता से बच्चों को होती है खून से जुड़ी गंभीर बीमारी थैलेसीमिया, जानें इसके प्रकार और लक्षण

थैलेसीमिया एक गंभीर आनुवांशिक बीमारी है जो माता-पिता के जीन्स से बच्चों में होती है, जानें थैलेसीमिया के प्रकार और लक्षण।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: May 09, 2022Updated at: May 09, 2022
माता-पिता से बच्चों को होती है खून से जुड़ी गंभीर बीमारी थैलेसीमिया, जानें इसके प्रकार और लक्षण

शरीर में मौजूद ब्लड की मात्रा में कमी या इससे जुड़ी किसी भी तरह की समस्या होने पर कई गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है। शरीर में मौजूद ब्लड के भीतर लाल रक्त कणिकाएं पायी जाती हैं जो फेफड़ों से ऑक्सीजन की सप्लाई शरीर के अलग-अलग अंगों में करने का काम करती हैं। शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी होने पर एक गंभीर बीमारी का खतरा बना रहता है जिसका नाम है थैलेसीमिया। थैलेसीमिया (Thalassemia in Hindi) खून से जुड़ी एक आनुवंशिक बीमारी है जो ज्यादातर बच्चों में माता-पिता के जींस से होती है। इस स्थिति में शरीर में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन का निर्माण नहीं हो पाता है। दरअसल हीमोग्लोबिन की कमी होने पर शरीर में मौजूद लाल रक्त कणिकाएं (Red Blood Cells) सही ढंग से अपना काम नहीं कर पाते हैं जिसकी वजह से खून में मौजूद लाल रक्त कणिकाओं की कमी तो होती ही है साथ ही कई अन्य समस्याएं भी होती हैं। इस बीमारी में मरीज के शरीर के अंग सही ढंग से काम नहीं कर पाते हैं और इसकी वजह से मौत का खतरा बढ़ जाता है। आइये इस लेख में जानते हैं थैलेसीमिया की बीमारी के प्रकार और इसके लक्षण के बारे में।

थैलेसीमिया के प्रकार (Types of Thalassemia in Hindi)

थैलासीमिया की बीमारी एक आनुवांशिक बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में होती है। यह बीमारी जीन के म्यूटेशन के कारण बच्चों में पहुंचती है। ज्यादातर मामलों में थैलेसीमिया की बीमारी जन्म के समय से ही होती है। कुछ बच्चों में थैलेसीमिया के हल्के लक्षण देखने को मिलते हैं वहीं कुछ मामलों में यह बीमारी बहुत गंभीर हो जाती है। थैलेसीमिया माइनर होने पर बच्चे को इसका खतरा कम रहता है लेकिन जब यह बीमारी ज्यादा गंभीर होती है तो बच्चों की समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। मुख्य रूप से थैलेसीमिया की बीमारी 3 प्रकार की होती है और 4 अलग-अलग सबटाइप भी होते हैं। इन सभी प्रकार की थैलेसीमिया की बीमारी के शुरुआत का समय अलग-अलग हो सकता है। इसके लक्षण और इसके प्रभाव भी अलग-अलग मरीजों में अलग-अलग देखे जाते हैं। डॉ सूरज चिरानिया, हेमेटो ऑन्कोलॉजी और बीएमटी, एचसीएच सेंटर मुंबई के मुताबिक थैलेसीमिया की बीमारी के मुख्य 3 प्रकार इस तरह से हैं।

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1. थैलेसीमिया माइनर (Thalassemia Minor in Hindi)

थैलेसीमिया की बीमारी कई तरह की होती है। उनमें से सबसे आम रूप थैलेसीमिया माइनर होता है। यह बीमारी ज्यादातर उन बच्चों में पायी जाती है जो इसके जीन्स अपने माता-पिता से प्राप्त करते हैं। इस तरह की बीमारी से पीड़ित मरीजों में लक्षण भी बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होते हैं। थैलेसीमिया माइनर से पीड़ित मरीजों को कैरियर भी माना जाता है। दरअसल यह तरह की बीमारी से पीड़ित मरीजों में माइल्ड एनीमिया के लक्षण देखे जाते हैं। थैलेसीमिया माइनर की बीमारी को बीटा थैलेसीमिया भी कहा जाता है। इसके अलावा जिन लोगों में मेजर थैलेसीमिया की बीमारी होती है उनमें बीटा थैलेसीमिया के दो जीन पाए जाते हैं। थैलासीमिया मेजर से पीड़ित मरीजों में दिखने वाले लक्षण गंभीर हो सकते हैं।

2.  थैलेसीमिया इंटरमीडिया (Thalassemia Intermedia in Hindi)

थैलेसीमिया इंटरमीडिया की बीमारी में मरीजों में दिखने वाले लक्षण माइल्ड से अधिक गंभीर होते हैं। इसके अलावा थैलेसीमिया इंटरमीडिया की समस्या में मरीजों की परेशानियां भी ज्यादा होती हैं। इस बीमारी में जीन्स का म्यूटेशन दो जीन के साथ भी होता है। इसके अलावा थैलेसीमिया इंटरमीडिया की बीमारी भी माता-पिता के जीन्स के जरिए बच्चों में होती है। थैलेसीमिया इंटरमीडिया से पीड़ित मरीजों में एनीमिया के गंभीर लक्षण देखने को मिलते हैं। 

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3.  एल्फा थैलेसीमिया (Alpha Thalassemia in Hindi)

एल्फा थैलेसीमिया की बीमारी में चार जीन्स का म्यूटेशन होता है और ये सभी जीन्स माता-पिता से मिलते हैं। इस बीमारी में अगर 1 जीन का म्यूटेशन होता है तो आपमें इस बीमारी के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन आप इस बीमारी के वाहक या कैरियर बन जाते हैं और आप इस बीमारी को अपने बच्चों में पास कर सकते हैं। इसके अलावा अगर 2 जीन का म्यूटेशन होता है तो इससे आपमें थैलेसीमिया के हल्के लक्षण दिखाई देते हैं और इस स्थिति को मेडिकल की भाषा में एल्फा-थैलेसीमिया ट्रेट के नाम से भी जाना जाता है। अगर आपमें 3 जीन्स का म्यूटेशन होता है तो इसमें मरीज में दिखने वाले लक्षण मध्यम से गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा अगर आपमें 4 जीन्स का म्यूटेशन होता है तो ऐसे बच्चे जन्म के बाद कुछ समय तक ही जीवित रहते हैं। यह बीमारी बहुत कम देखने को मिलती है और ज्यादातर मामलों में भ्रूण को गंभीर रूप से एनीमिया की समस्या होती है। इस बीमारी में इलाज के लिए ट्रांसफ्यूजन और बोन मेरो ट्रांसप्लांट का इस्तेमाल किया जाता है। 

थैलेसीमिया के लक्षण (Thalassemia Symptoms in Hindi)

थैलेसीमिया की बीमारी के अलग-अलग प्रकार होते हैं और हर एक तरह की बीमारी में दिखने वाले लक्षण भी अलग-अलग ही होते हैं। कुछ मामलों में इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं तो वहीं कुछ मरीजों में इसके लक्षण बेहद गंभीर होते हैं। थैलेसीमिया की बीमारी होने पर हड्डियों से जुड़ी समस्या, चेहरे की बनावट में बदलाव जैसी कई गंभीर समस्याएं होती हैं। थैलेसीमिया की बीमारी के लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • हड्डियों से जुड़ी समस्याएं।
  • बच्चों का विकास न होना।
  • स्किन का रंग पीला या फीका पड़ जाना।
  • हाथ और पैर का ठंडा होना।
  • सही से चलने-फिरने में दिक्कत।
  • लगातार सिरदर्द।
  • पैरों में ऐंठन।
  • वजन कम होना।
  • हमेशा बीमार रहना।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • पेशाब से जुड़ी समस्या।
  • दिल की धड़कन का अनियमित होना।

थैलेसीमिया की बीमारी में दिखने वाले लक्षण हर मरीज में अलग-अलग हो सकते हैं। इस बीमारी में मरीज को हल्के से लेकर गंभीर लक्षण तक दिखाई देते हैं। कुछ बच्चों में शुरुआत में इसके लक्षण न के बराबर दिखाई देते हैं लेकिन आगे चलकर समस्या गंभीर होने पर इसके लक्षण भी बढ़ने लगते हैं। थैलेसीमिया एक दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी है जिसके लक्षण दिखने पर आपको तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

(All Image Source - Jagran.com)

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