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इन 2 तरह के लोगों को होता है थैलेसीमिया का अधिक जोखिम, जानें इसके लक्षण

World Thalassemia Day 2022: 8 मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर जानें थैलेसीमिया होने का जोखिम किसे अधिक रहता है।

Anju Rawat
Written by: Anju RawatPublished at: May 06, 2022Updated at: May 06, 2022
इन 2 तरह के लोगों को होता है थैलेसीमिया का अधिक जोखिम, जानें इसके लक्षण

World Thalassemia Day 2022: थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है, यह एक दुर्लभ बीमारी है। यह बीमारी विरासत में मिली एक बीमारी है, जो शरीर में दोषपूर्ण हीमोग्लोबिन संश्लेषण और आरबीसी (RBC) उत्पादन की विशेषता है। इसका मतलब है कि एक थैलेसीमिक रोगी को जीवन को बनाए रखने के लिए लंबे समय तक रक्त आधान की आवश्यकता होती है। कम जागरूकता एक कारण है कि भारत में बच्चों सहित कई लोगों को लंबे समय तक बिना निदान के देखा जाता है। दुनियाभर में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं कि किन लोगों को थैलेसीमिया का जोखिम अधिक रहता है। चलिए हेमेटोपैथोलॉजी मेदांता, द मेडिसिटी, गुडगांव की डायरेक्टर डॉक्टर रेनु सक्सेना से जानते हैं इस बारे में-

थैलेसीमिया के लक्षण (Thalassemia Symptoms in Hindi)

थकान, कमजोरी, पीली त्वचा, पेट की सूजन, चेहरे की हड्डी की विकृति धीमी वृद्धि, गहरे रंग का पेशाब आदि थैलेसीमिया के मुख्य लक्षण होते हैं। ये लक्षण जन्म लेने के दो वर्षों के दौरान विकसित करते हैं। कुछ लोग जिनमें केवल एक प्रभावित हीमोग्लोबिन जीन होता है, उनमें थैलेसीमिया के लक्षण नहीं होते हैं।

थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों के शरीर में बहुत अधिक आयरन हो सकता है, या तो बीमारी से या बार-बार रक्त चढ़ाने से। बहुत अधिक आयरन आपके हृदय, यकृत और अंतःस्रावी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है। थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। थैलेसीमिया माइनर वह स्थिति होती है, जब माता-पिता में से केवल एक से ही दोषपूर्ण जीन प्राप्त करता है।

इन लोगों को रहता है थैलेसीमिया का अधिक जोखिम

1. पारिवारिक इतिहास

जिनके माता-पिता को थैलेसीमिया की दिक्कत होती है, उनमें थैलेसीमिया विकसित होने की अधिक संभावना रहता है। उत्परिवर्तित हीमोग्लोबिन जीन के माध्यम से माता-पिता से बच्चों में थैलेसीमिया का संचरण होता है। इसके लिए अगर आपको थैलेसीमिया है, तो पहले से ही अपनी पूरी जांच करवा लें, ताकि बच्चे को इस समस्या से बचाया जा सके।

इसे भी पढ़ें - थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को कोरोना में क्यों है सावधानी की जरूरत? जानें थैलेसीमिया पर कैसे असर डालता है कोरोना 

2. बाहरी लोगों

थैलेसीमिया भारत में इतना अधिक देखने को नहीं मिलता है। अफ्रीकी अमेरिकियों और भूमध्यसागरीय और दक्षिण पूर्व एशियाई मूल के लोगों में थैलेसीमिया विकसित होने का जोखिम अधिक बना रहता है।

थैलेसीमिया से बचने के उपाय (thalassemia prevention tips in hindi)

  • ज्यादातर मामलों में आप थैलेसीमिया को नहीं रोक सकते हैं। अगर आपको थैलेसीमिया है, या आपके पास थैलेसीमिया जीन है, तो अगर आप बच्चा पैदा करना चाहते हैं, तो मार्गदर्शन के लिए किसी आनुवंशिक परामर्शदाता से बात करें।
  • रिप्रोडक्टिव टैक्नोलॉजी की मदद से भ्रूण को उसके प्रारंभिक चरण में स्क्रीन किया जा सकता है। यह उन माता-पिता की मदद कर सकता है जिन्हें थैलेसीमिया है या जो दोषपूर्ण हीमोग्लोबिन जीन के वाहक हैं, उनके स्वस्थ बच्चे हैं।
  • दोषपूर्ण जीन के लिए भ्रूण का परीक्षण किया जाता है, और केवल आनुवंशिक दोषों के बिना ही गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। 

इन सभी तरीकों से बच्चे को थैलेसीमिया से बचाया जा सकता है। लेकिन अगर आपको थैलेसीमिया है, आप कंसीव की प्लानिंग कर रहे हैं, तो पहले एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

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