What Is Thrombocytopenia In Hindi: थ्रोम्बोसाइटोपेनिया एक तरह की मेडिकल कंडीशन होती है, जिसमें ब्लड में प्लेटलेट काउंट कम हो जाता है। इससे पहले कि हम आगे बढ़ें और यह जानें कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की क्या है और इसके लक्षणों के बारे में विस्तार से बात करें। यह जान लीजिए कि प्लेटलेट्स क्या होते हैं? प्लेटलेट्स छोटे सेल के टुकड़े होते हैं जो खून को जमने और रक्तस्राव को रोकने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। जब प्लेटलेट्स की संख्या कम होती है, तो इससे चोट लगने पर खून बहना आसानी से बंद नहीं होता है। यह एक गंभीर समस्या हो सकती हैं, क्योंकि अगर किसी व्यक्ति का लगातार खून बहता है, तो उससे बॉडी में ऑक्सीजन सप्लाई और कई अन्य परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। अब जानते हैं कि थ्रोम्बोसाइटोपेनिया क्यों होता है? इसके कारण और लक्षण क्या हैं? साथ ही इसके इलाज के बारे में भी जानेंगे। इस बारे में हमने न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स में Consultant Pathologist डॉ. आकाश शाह से बात की।
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का क्या कारण है?- Causes Of Thrombocytopenia In Hindi
प्लेटलेट काउंट किसी के भी शरीर में कम हो सकता है। इसके पीछे अलग-अलग कारण जिम्मेदार होते हैं। जैसे जब हमारी बॉडी बोन मैरो में पर्याप्त मात्रा प्लेटलेट्स नहीं बनाता है। इस तरह की स्थिति ल्यूकेमिया और कैंसर जैसी घातक बीमारियों के कारण हो सकती है। यही नहीं, जो लोग बहुत अधिक मात्रा में शराब का सेवन करते हैं, उनमें भी थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की समस्या देखी जा सकती है। कुछ मामलों में ऐसा भी देखा जाता है कि किसी इंफेक्शन या इम्यून सिस्टम डिस्ऑर्डर के कारण मरीज को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया बीमारी हो जाती है।
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थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लक्षण- Symptoms Of Thrombocytopenia In Hindi
सामान्यतः थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के शुरुआती दिनों में कोई लक्षण नजर आते हैं। लेकिन, जैसे-जैसे बॉडी में प्लेटलेट काउंट कम हो जाता है, तो इसके लक्षण न सिर्फ नजर आने लगते हैं, बल्कि उनकी ओर ध्यान दिया जाना भी जरूरी है। थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं-
- आसानी से और बार-बार चोट लगना
- बार-बार नाक से खून आना
- मसूड़ों से खून आना
- कहीं चोट लगने पर लंबे समय तक खून बहना
- त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के धब्बे नजर आना
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थ्रोम्बोसाइटोपेनिया के गंभीर लक्षण
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की स्थिति गंभीर होने पर यानी प्लेटलेट काउंट कम होने पर डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में ब्लीडिंग हो सकती है और कुछ मामलों में इंटरन ब्लीडिंग भी बढ़ सकती है।
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का निदान- Diagnosis Of Thrombocytopenia In Hindi
आमतौर पर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किए जाते हैं, जिसे कंप्लीट ब्लड काउंट कहा जाता है। इस टेस्ट के जरिए डॉक्टरों को पता चलता है कि किसी व्यक्ति के ब्लड में कितने प्लेटलेट्स हैं। डॉक्टर प्लेटलेट काउंट देखकर बताते हैं कि ये ज्यादा हैं या सामान्य से कम हैं। एक सामान्य प्लेटलेट काउंट प्रति माइक्रोलीटर ब्लड में 150,000 और 450,000 प्लेटलेट्स के बीच होता है। 150,000 से कम काउंट को कम माना जाता है। कई बार प्लेटलेट काउंट कम क्यों है, यह जानने के लिए बोन मैरो बायोप्सी या इमेजिंग टेस्ट जैसे कुछ अन्य टेस्ट भी करवाए जाते हैं।
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का ट्रीटमेंट- Treatment Of Thrombocytopenia In Hindi
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया का ट्रीटमेंट इस बात पर निर्भर करता है कि कम प्लेटलेट काउंट कम होने का क्या कारण है? कुछ मामलों में जब प्लेटलेट काउंट में मामूली सा फर्क दिखे, तो यह चिंता का विषय नहीं होता है। इस स्थिति में डेली लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव कर व्यक्ति थ्रोम्बोसाइटोपेनिया की स्थिति को नियंत्रित कर सकता है। वहीं, अगर प्लेटलेट काउंट बहुत ज्यादा कम हो, तो मरीज को प्रॉपर ट्रीटमेंट करवाना पड़ता है। कुछ मामलों में प्लेटलेट काउंट को बढ़ाने के लिए ब्लड या प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन या कुछ मामलों में स्प्लीन को हटाने के लिए सर्जरी की जाती है।
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