तनाव करता है बालों को सफेद

तनाव न सिर्फ कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें दे सकता है, बल्कि समय से पहले बालों को सफेद भी कर सकता है।

एजेंसी
लेटेस्टWritten by: एजेंसीPublished at: Jun 12, 2013
तनाव करता है बालों को सफेद

चिन्‍तनशील आदमी

तनाव न सिर्फ आपको कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍यायें दे सकता है, बल्कि समय से पहले आपके बालों को सफेद भी कर सकता है। अमेरिकी वैज्ञानिक शोध के बाद इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि बालों को काला बनाये रखने के लिए उत्तरदायी हार्मोन तनाव की स्थिति में गायब हो जाते हैं। दुर्भाग्‍य की बात यह है कि जो हार्मोन एक बार चले जाते हैं, वे दोबारा लौटकर नहीं आते। यानी एक बार जो बाल सफेद हो गए, शरीर उन्‍हें स्‍वयं प्राकृतिक रूप से काला नहीं कर पाता।

अमेरिकी वैज्ञानिक चूहों पर शोध करने के बाद इस चौंकाने वाले नतीजे पर पहुंचे हैं। ब्रिटिश अखबार डेली मेल में छपी खबर के अनुसार वैज्ञानिकों ने यह पता लगाया है कि तनाव आपको समय से पहले ही 'बूढ़ा' बना सकता है।

वैज्ञानिक जानते हैं कि जब मानव शरीर चोटिल होता है, तो मेलानिन (गाढ़ा रंगद्रव्‍य जो हमें सूर्य की रोशनी से बचाता है) उत्‍पादित करने के लिए उत्तरदायी स्‍टेम सेल, बालों की बजाय त्‍वचा की ओर चला जाता है। जिससे त्‍वचा को कम नुकसान हो। इसी तरह की प्रक्रिया उन्‍होंने चूहों पर उस समय पायी ज‍ब उनके तनाव के लिए उत्तरदायी हार्मोन को उत्तेजित किया गया। इससे शोधकर्ता यह पता लगाने में भी कामयाब रहे हैं कि तनाव में पिगमेंटेशन क्‍यों होती है, जिससे त्‍वचा काली लगने लगती है।

अधिकतर लोगों को 25 की उम्र में अपने एकाध बाल सफेद होते नजर आने लगते हैं, और इसके लिए हम अनुवांशिक कारणों से लेकर एल्‍कोहल और तम्‍बाकू को जिम्‍मेदार ठहराते हैं। हम ऐसी कहानियां भी सुन चुके हैं कि जबरदस्‍त मानसिक आघात के बाद एक रात में ही लोगों के सारे बाल सफेद हो गये।

प्रमुख शोधकर्ता न्‍यूयार्क विश्वविद्यालय की डॉक्‍टर मायुमी का कहना है कि इस बात के सबूत थे कि तनाव के दौरान मेनालिन बालों से त्‍वचा की ओर चला जाता है। उन्‍होंने कहा कि हम यह जानने का प्रयास कर रहे थे कि क्‍या अधिक तनाव से इसके विस्‍पाथन की गति भी बढ़ जाती है।

न्‍यूयार्क विश्वविद्यालय अब तनाव से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दवा बनाने को लेकर आशांवित है। यह उन लोगों के लिए अधिक मददगार होगी, जो अत्‍यधिक दबाव में काम करते है। यह शोध नेचर मेडिसन में प्रकाशित हुआ है।




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