सोशल फोबिया के शिकार हैं आप भी? ऐसे निपटें इससे!

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 28, 2016
Quick Bites

  • आत्मविश्वास की कमी से होता है सोशल फोबिया
  • मनोवैज्ञानिक थेरेपी है इससे निपटने में कारगर
  • सामाजिक मेल-मिलाप बढ़ाकर भी होता है फायदा


सोशल फोबिया या सामाजिक भय आप में से बहुत लोगों ने महसूस किया होगा। आप जब मंच पर जाते हैं, तब आप सोचते हैं कि कहीं आप कोई गलती ना कर बैठें और लोग आप पर हंसें। हालांकि मंच पर जाने का भय सिर्फ सोशल फोबिया नहीं है, मूलतः आप जब भी लोगों से घिरे होते हैं, और आपको  कुछ बोलना या करना होता है, तब आपको  बहुत ज्यादा डर लगता है।

आप उस स्थिति से दूर रहना चाहते हैं, इसका मतलब यह भी है की आपको दोस्तों का साथ, या परिवार का साथ अच्छा नहीं लगता। ऐसे में आपको लोगों से रिश्ते बनाने या डेटिंग करने में दिक्कत आती है।

समाज में ऐसे लोग शर्मीले और पिछड़े माने जाते हैं। मुश्किल तो तब आती है, जब ऐसे लोग अपनी उन्नति के सारे अवसर सामाजिक भय की वजह से छोड़ते चले जाते हैं। उनके अंदर सामाजिक डर हमेशा बना रहता है और ऐसे लोग अपनी क्षमता से नीचे की नौकरियां पकड़ लेते हैं।

social phobia


सामाजिक भय के कारण

मनोवैज्ञानिक शोधों से पता चला है की बच्चे की परवरिश में माता-पिता का बहुत बड़ा योगदान होता है, और उसके अंदर का यह सामाजिक भय भी उसी परवरिश की देन हो सकती है।

बच्चे की उसके द्वारा किये गए कार्य के लिए कभी सराहना ना करना, या अनदेखी करना, उनके साथ कठोरता से पेश आना, इन सभी कारणों से बच्चे के अंदर खुद के प्रति हीन भावना घर कर लेती है। इससे उनके आत्मसम्मान में कमी आती है।

 

जब भी कोई घटना होती है उस स्थिति में एक व्यक्ति जिसे अपने ऊपर भरोसा है, एक अवसर के रूप में देखता है। उसकी सोच होती है की उसे यह अवसर उसकी काबिलियत दिखाने के लिए मिली है, इसे गंवाना नहीं चाहिए।

 

वहीं जिस व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर होता है वह सोचता है कि मैं इस कार्य के लायक नहीं हूं या मेरे अंदर इतनी काबिलियत नहीं है। ऐसे व्यक्ति किसी भी गलत कार्य के लिए खुद को जिम्मेदार मान बैठते हैं और एक धारणा बना लेते हैं की वे किसी लायक नहीं हैं।

 

अब सवाल यह उठता है कि क्या यह भय समाज से दूर हो सकता है ?

 

जी हां, न सिर्फ समाज में बोलने का भय बल्कि और दूसरे प्रकार की चिंता विकार आप अपने मनोचिकित्सक की सहायता से दूर कर सकते हैं। चिकित्सक इस डर पर काबू पाने में 'सामाजिक कौशल प्रशिक्षण' ‘सोशल स्किल्स ट्रेनिंग’ प्रदान करते हैं। जिसमें चिकित्सक आपसे बात करके आपको निम्न बातों की ट्रेनिंग देते हैं जो कि आपके लिए सोशल फोबिया से उबरने में मददगार होती है। इस ट्रेनिंग में आपको सिखाया जाता है कि

 

चेहरे के सही भाव कैसे होने चाहिए?

 

बातें कैसे शुरू करें उसे जारी रखें?

 

कैसे किसी की तारीफ करें?

 

और कैसे सही दिशा में तर्क करें? आदि का प्रशिक्षण बहुत मददगार साबित होता है ।


मनोचिकित्सक थेरेपी

मनोचिकित्सक थेरेपी के दौरान उस व्यक्ति से बात करके उसके विचारो को जानने की कोशिश करते हैं। किस तरह के नकारात्मक विचारों की वजह से व्यक्ति समाज से दूर रहना चाहता है, जैसे कि उसका विचार है कि वो जो भी कार्य करे वह बेस्ट होना चाहिए, ऐसी सोच एक अवास्तविक सोच है जिसकी वजह से व्यक्ति की चिंता बढ़ जाती है।

चिकित्सक उन विचारों को स्वस्थ विचारों में बदलकर व्यक्ति को सोचने की सही दिशा प्रदान करते हैं। धीरे-धीरे वह व्यक्ति अपने आप अपने विचारों में परिवर्तन कर सही दिशा में सोचना शुरू कर देता है, और जिसकी वजह से उसकी चिंता कम और मन हल्का महसूस होता है।

अगर आपको यह लगता है कि आपके किसी दोस्त के अंदर यह दिक्कत है, तो कृपया उसे यह ना कहें की यह इतना सरल कार्य है तुम क्यों नहीं कर सकते। अगर यह कार्य उसके लिए इतना ही आसान होता तो यह उसने पहले ही कर लिया होता। उन्हें आपकी मदद की जरूरत है, जितनी जल्दी उनकी मदद होगी, उतनी जल्दी उनके अन्य चिंता जनक विकार भी कम होंगे।

 

खुद की जगह दूसरों पर दें ध्यान

सामाजिक भय से निपटने का सबसे अच्छा उपाय है कि आप खुद पर ध्यान ही न दें। आप जैसे हैं जो हैं, अच्छे हैं। यह देखें कि दूसरे लोग कैसे हैं, दूसरे लोग क्या अच्छा कर रहे हैं, आप उनसे क्या सीख सकते हैं। याद रखें कि हुनर और कमी दोनों ही हर व्यक्ति के अंदर होती हैं, लेकिन खुद की कमी को हुनर में बदल देना ही असली व्यक्तित्व है।                 

 

बढ़ाएं अपना आत्मसम्मान

इस तरह का विशेष स्वभाव अनुवंशिक होता है या बचपन में हुई किसी घटना के कारण ऐसा होता है। ऐसे में जरूरी है कि खुद का आत्मसम्मान बढ़ाए जाने संबंधी कार्य किया जाएं। जरूरत में दूसरों की मदद करके, सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने आदि से खुद का आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं।


बातचीत और संपर्क बढ़ाएं

व्यक्तित्व में परिवर्तन करने के लिए कोई भी प्रयास हमेशा धीरे-धीरे और व्यवस्थित होना चाहिए। आपको लोगों से मिलने जुलने में भले हिचक या शर्म महसूस होती हो लेकिन धीरे-धीरे लोगों से संपर्क बढाएं। इससे आपको मानसिक ताकत मिलेगी। आप चाहें तो कोई एनजीओ या संस्था भी जॉइन कर सकते हैं।

तरीका भले ही कोई भी हो, लेकिन आप यह याद रखें कि जीवन एक बार ही मिलता है, इसे आप जितना बेहतर बना सकते हैं, बनाने का प्रयास करें। सामाजिक बंधनों से मुक्त होकर या खुद को दबाकर न सिर्फ आप खुद की स्वतंत्रता को रोकते हैं बल्कि कामयाब होने से भी आप पिछड़ जाते हैं।

 

Writer: मोटिवेशनल ट्रेनर संदीप अत्रे

Image source: Orchard Park Counseling&Fox News

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