आंखों का लेंस लगाकर सोना हो सकता है खतरनाक, 'केराटाइटिस' का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 11, 2018
Quick Bites

  • कॉन्टैक्ट लेंस के इस्तेमाल में हर समय सावधानी बरतनी पड़ती है।
  • कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर सोने से केराटाइटिस का होता है खतरा।
  • केराइटिस होने पर आंखें लाल हो जाती हैं और दर्द होता है।

आंखों की समस्या दूर करने के लिए आप कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते हैं। मगर कई बार कॉन्टैक्ट लेंस ही आंखों की समस्या का कारण बन जाते हैं। जी हां, अगर आप कॉन्टैक्ट लेंस लगाते हैं, तो आपको हर समय अतिरिक्त सावधानी की जरूरत पड़ती है। आमतौर पर डॉक्टर आपको ये हिदायत देते हैं कि अगर आप सोने जा रहे हैं, तो कॉन्टैक्ट लेंस आंखों से जरूर निकाल दें। मगर कई बार भूलवश या नींद ज्यादा होने के कारण आप कॉन्टैक्ट लेंस लगाकर ही सो जाते हैं। ये आदत आपकी आंखों के लिए खतरनाक है क्योंकि इसके कारण आपको केराटाइटिस नामक रोग हो सकता है।

क्या है केराटाइटिस

केराइटिस में आंखों की कॉर्निया में सूजन आ जाती है। कई बार केराइटिस का कारण आंखों का इंफेक्शन हो सकता है। इसके अलावा कॉन्टैक्ट लेंस बहुत देर तक पहने रहने से भी केराइटिस हो जाता है। आमतौर पर केराइटिस होने पर आंखें लाल हो जाती हैं और दर्द होता है। केराइटिस सामान्य अवस्था में खतरनाक नहीं है मगर यदि इसका इलाज न किया जाए, तो आपके आंखों की रौशनी भी छीन सकता है। हालांकि जो लोग सिलिकन हाइड्रोजेल लेंस के साथ सोते हैं उनमें केराटाइटिस जैसे संक्रमण के होने की आशंका कम होती है मगर कई बार उनमें भी संक्रमण हो सकता है।

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क्यों होता है केराइटिस का खतरा

कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से आंखों के प्राकृतिक माइक्रोबियल पर्यावरण में बदलाव होता है, जिस कारण आंखों में संक्रमण होने का जोखिम बढ़ जाता है। दरअसल कॉन्टैक्ट लेंस से आंखों के भीतर प्राकृतिक जीवाणुओं के मुकाबले त्वचा पर रहने वाली जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में यही वायरस आपकी आंखों को संक्रमित कर सकते हैं।

सिलिकन हाइड्रोजेल लेंस में रखें ख्याल

सिलिकन हाइड्रोजेल लेंस को आंखों में लंबे समय तक लगाए रखा जा सकता है। मगर एक निश्चित समय के बाद इन्हें बदलना जरूरी होता है। लेंस का बदलने का समय भी इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस तरह का लेंस प्रयोग कर रहे हैं। हो सकता है कि उसे एक-दो हफ्ते में बदलने की जरूरत पड़े या कुछ महीने में बदलने की जरूरत पड़ें। इस बारे में अपने नेत्र चिकित्सक से पहले ही बात कर लें। अपने लेंस को समय-समय पर बदलने पर ही आपकी आंखे स्वस्थ रहेंगी। अगर आप लेंस पहन कर सोते हैं तो उसे समय पर बदलना और भी जरूरी है।

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कॉन्टैक्ट लेंस के साथ सोते हैं, तो ध्यान रखें ये बातें

अगर आप लेंस के साथ सोते हैं तो अपनी आंखों की गतिविधि पर नजर रखें। इससे आप आंखों में होने वाले संक्रमण को जल्दी महसूस कर पाएंगे। अगर आपकों आंखों की रोशनी या गतिविधि में किसी तरह का बदलाव जैसे डबल दिखना, खुजली होना या लेंस लगाने में परेशानी महसूस होना। ये सब इशारे हैं कि आप अपने लेंस को बदल दें। अगर इसके बाद भी आराम ना मिलें तो डॉक्टर से मिलें और समस्या के बारे में बताएं।

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