जानें क्या होता है माइग्रेन और कब पड़ती है स्कैनिंग की जरूरत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Oct 11, 2018
Quick Bites

  • माइग्रेन एक तेज सिरदर्द है, जो संवेदी चेतावनी संकेतों के साथ आता है।
  • यह सिरदर्द 15 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को अधिक परेशान करता है।
  • माइग्रेन में स्ट्रोक का खतरा अन्य लोगों की तुलना में दोगुना होता है।

सिरदर्द का एक गंभीर रूप जो बार-बार या लगातार होता है, उसे माइग्रेन कहते हैं। इसे आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं। माइग्रेन एक तेज सिरदर्द है, जो आमतौर पर संवेदी चेतावनी संकेतों के साथ आता है। लोगों को तेज रोशनी, ब्लाइंड स्पॉट, हाथ-पैर में झुनझुनी, मितली, उल्टी और रोशनी व आवाज से संवेदनशीलता का बढ़ना जैसे संकेत नजर आते हैं। इसका दर्द 4-72 घंटे तक रह सकता है।

ये होते हैं कारण

माइग्रेन सिरदर्द के दौरान मितली, डायरिया और उल्टी जैसी शिकायतें हो सकती हैं। इसके चलते भोजन छोटी आंत में देर से पहुंचता है। यानी इससे पाचन क्रिया पर विपरीत असर होने लगता है। साथ ही रोशनी और आवाज के प्रति संवेदनशीलता बढ़ जाती है। एक अनुमान के अनुसार देश में करीब 15 फीसदी माइग्रेन सिरदर्द पीड़ित हैं। महिलाओं को माइग्रेन होने का खतरा पुरुषों की अपेक्षा अधिक होता है।

इन लोगों को होती है ज्यादा दिक्कत

यह सिरदर्द 15 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को अधिक परेशान करता है। ऐसे लोग जिनके परिवार में माइग्रेन का इतिहास है, उन्हें यह बीमारी होने का खतरा तीन से चार गुना अधिक होता है। यदि आपको माइग्रेन है तो आपके परिवार में माइग्रेन के कारण सिरदर्द का इतिहास है तो उसकी मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर विशेषज्ञ इलाज करते हैं।

  • इन स्थितियों में कराएं ब्रेन स्क्रीनिंग
  • अचानक तेज सिरदर्द होना
  • पहले से अलग या पहले से बहुत ज्यादा दर्द होना
  • सिरदर्द के साथ उल्टी, हाथ-पैरों में कमजोरी, नजर की कमजोरी, बेहोश होना
  • पहला सिरदर्द बचपन में या 50 वर्ष की उम्र के बाद
  • सिरदर्द के कारण सुबह-सुबह नींद टूट जाए।

माइग्रेन और ब्रेन स्ट्रोक

माइग्रेन से पीड़ित लोगों में स्ट्रोक का खतरा अन्य लोगों की तुलना में दोगुना होता है। वैज्ञानिकों का दावा है कि उनके इस नए शोध से स्ट्रोक के प्रति संवेदनशीलता का अध्ययन करने में मदद मिल सकेगी। धूम्रपान के साथ दिनचर्या से जुड़ी अस्वस्थ आदतें भी माइग्रेन का कारण हो सकती हैं, ऐसे में सिर के आधे हिस्से में दर्द है तो इसे गंभीरता से लें और चिकित्सक से संपर्क करें।

माइग्रेन से बचाव के घरेलू नुस्खे

  • अगर माइग्रेन हो तो सबसे पहले हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम किसी दवा से ज्यादा असर करता है। सरदर्द होने पर कंधों और गर्दन की भी मालिश करनी चाहिए। इससे दर्द से राहत मिलती है।
  • एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। माइग्रेन में बर्फ के टुकडों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
  • सिर दर्द होने पर अपनी सांस की गति को थोड़ा धीमा कर दीजिए, लंबी सांसे लेने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। आराम से सांस लेने से आपको दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से भी राहत मिलेगी।
  • माइग्रेन में दर्द होने पर कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश कुछ देर तक मालिश कीजिए।
  • बटर में मिश्री को मिलाकर खाने से माइग्रेन में राहत मिलती है।
  • नींबू के छिलके को पीसकर, इसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन में होने वाले सिरदर्द से राहत मिलती है और माइग्रेन ठीक होता है।
  • माइग्रेन में अरोमा थेरेपी सिरदर्द से राहत दिला सकती है। अरोमा थेरेपी में हर्बल तेलों का प्रयोग किया जाता है। इसमें हर्बल तेलों को एक तकनी‍क के माध्यपम से हवा में फैला दिया जाता है और उसके बाद भाप के जरिए तेलों को चेहरे पर डाला जाता है।
  • माइग्रेन में सिर दर्द होने पर धीमी आवाज में संगीत सुनना बहुत फायदेमंद होता है। दर्द से राहत पाने के‍ लिए बंद कमरे में हल्की आवाज में अपने पसंदीदा गानों को सुनिए, सिरदर्द कम होगा और आपको राहत मिलेगी।

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