खांसी सूखी हो या गीली सबका रामबाण इलाज है सितोपलादि चूर्ण, जानें इसे बनाने का तरीका और 8 फायदे

अगर आपको लंबे समय से खांसी हो रही है या फिर एलर्जी है, तो आप सितोपलादि की मदद ले सकते हैं। आइए जानते हैं सितोपलादि चूर्ण की होममेड रेसिपी और फायदे। 

Pallavi Kumari
Written by: Pallavi KumariPublished at: Aug 20, 2021Updated at: Aug 20, 2021
खांसी सूखी हो या गीली सबका रामबाण इलाज है सितोपलादि चूर्ण, जानें इसे बनाने का तरीका और 8 फायदे

सितोपलादि चूर्ण (Sitopaladi churna) हमारी दादी-नानी उपयोग किया जाने वाला नुस्खा है जिससे वो खांसी- जुकाम जैसे की समस्याओं का इलाज करती थीं। भारतीय घरों में ये काफी कॉमन है और लगभग हर मां को इसके बारे में पता होता है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल शिशु और छोटे बच्चों पर किया जाता है। खास जब उन्हें सर्दी लग जाती है। पर ये बड़ों के लिए भी बहुत काम की चीज है। सितोपलादि के सेवन से आप पुरानी खांसी-जुकाम को ठीक कर सकते हैं। इसके अलावा सितोपलादि साइनस से पीड़ित लोगों के लिए (sitopaladi churna for sinusitis) मददगार है। पर सितोपलादि को लेकर ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि इसे घर में नहीं बनाया जा सकता और बस ये बाजार में ही मिलता है। जबकि ऐसा नहीं है। सितोपलादि चूर्ण को आप घर में भी बना सकते हैं और प्रकार से इस्तेमाल कर सकते हैं। तो, आइए जानते हैं सितोपलादि चूर्ण को बनाने का तरीका (sitopaladi churna recipe in hindi) और इसके फायदे (sitopaladi churna benefits)

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सितोपलादि चूर्ण बनाने की विधि-Sitopaladi churna recipe in hindi

  • -140 ग्राम मिश्री 
  • -80 ग्राम वंश लोचन
  • -40 ग्राम पिप्पली
  • -20 ग्राम छोटी इलायची 
  • -10 ग्राम दालचीनी ले लें। 
  • -अब सबसे पहले मिश्री को पाउडर जैसे बना लें और इसके लिए इसे मिक्सर में पीस लें। अगर आप बड़ी मिश्री खरीद रहे हैं तो उसे कूट कर रख लें।
  • -फिर वंश लोचन और पिप्पली को पीस लें।
  • -इसके बाद छोटी इलायची को छिल कर इलायची के दानों को अलग कर लें।
  • -अब दालचीनी और इलायची दोनों को मिला कर पीस लें।
  • -अब सभी पीसी हुई चीजों को एक साथ एक बड़े बर्तन में मिलाएं। 
  • -इसे एक एयर टाइट कंटेनर में भर कर रख लें।

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सितोपलादि चूर्ण के खास गुण-Medicinal Properties of Sitopaladi 

  • -कफरोधक
  • -एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल
  • -एंटी इंफ्लेमेटरी
  • -एंटीअल्सरोजेनिक
  • -डिटॉक्सिफायर
  • -ज्वरनाशक
  • -टॉनिक

सितोपलादि चूर्ण के फायदे- Sitopaladi churna benefits in hindi

1. गले की खराश दूर करता है 

गले की खराश को दूर करने के उपाय के रूप में सितोपलादि चूर्ण बहुत ही कारगर है। दरअसल, एंटीइंफ्लेमेटरी है, जो गले में आए सूजन और खराश को कम करता है। दूसरा ये कि ये एंटीबैक्टीरियल है जो कि स्ट्रेप थ्रोट जो कि एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है उसे भी कम करने में मदद करता है। अगर आपको ठंड लग जाने के कारण या बारिश के मौसम में वायरल होने पर या किसी भी वजह से गले में खराश हो रही है, तो रात में इसे शहद मिला कर चाट लें और आप देखेंगे कि सुबह गले की खराश कम हो जाएगी। इसके अलावा आप इसका सेवन सौंफ के साथ भी कर सकते हैं, जो कि गले में खुजली, गले में दर्द और गला बैठ जाने जैसे लक्षणों को कम करने में मदद करता है। 

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2. अस्थमा में फायदेमंद

सितोपलादि चूर्ण अस्थमा की दवा नहीं है, लेकिन सांस की नलियों की सूजन, इंफेक्शन और बलगम के उत्पादन को कम करने में आपकी मदद कर सकता है। इससे आप अस्थमा का इलाज तो नहीं कर सकते पर अस्थमा के लक्षण को कंट्रोल कर सकते हैं। आप एक बार इस्तेमाल करें और तब भरोसा करें। 

3. ब्रोंकाइटिस में मददगार

ब्रोंकाइटिस में आपके फेफड़ों और सांस की नलियों में सूजन आ जाती है। ये एक तरह का लंग इंफेक्शन जैसा ही होता है। ऐसे में अगर फेफड़े में कफ बहुत ज्यादा जमा हो जाए तो, कई बार सांस लेने में बहुत परेशानी होती है। तो, इस स्थिति को कम करने में सितोपलादि चूर्ण आपकी मदद कर सकता है। ये छाती में कंजेशन को कम करता है और कफ को पिघला देता है और जल्दी बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही इसका एंटी इंफ्लेमेटरी गुण फेफड़ों के सूजन को कम कर के आपको छोड़ा आराम पहुंचाता है। 

4. एलर्जी दूर करता है

कुछ लोगों को सुबह उठते ही छींक होने लगती है। ये एक प्रकार की एलर्जी है। तो, कुछ लोगों को साइन की परेशानी होता है, जिसमें कि नाक हमेशा बहती रहती है। ऐसे में सितोपलादि चूर्ण एलर्जी का इलाज करने का एक प्राकृतिक तरीका है। दरअसल, एलर्जी में हिस्टामाइन को शांत करना बेहद जरूरी होता है और सितोपलादि एंटीहिस्टामिनिक गुणों से भरपूर है जो कि ऐसे एलर्जी के लक्षणों को नियंत्रित करते में मदद करता है।

5. गीली खांसी में फायदेमंद

गीली खांसी या कफ वाली खांसी में फेफड़ों में बलगम जम जाता है। ऐसे में सितोपलादि का एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण कफ को पिघला देता है और इसे बाहर निकालने में मदद करता है। गीली खांसी होने पर लगातार कुछ दिनों तक सुबह शाम सितोपलादि का सेवन करें। 

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6. सूखी खांसी में फायदेमंद 

सूखी खांसी होने पर सितोपलादि इसे शांत करने में मदद करता है। ये इंफेक्शन को शांत करता है और फेफड़ों को साफ करता है। इसके अलावा, सितोपलादि चूर्ण में खांसी को शांत करने की एक शक्तिशाली क्षमता है। इसे आप लगातार कुछ दिनों को इस्तेमाल करें तो, ये सूखी खांसी को जड़ से खत्म कर देगा। 

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7. पाचन तंत्र को सही रखता है

विभिन्न पाचन समस्याओं से निपटने के लिए सितोपलादि चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है। यह चमत्कारी चूर्ण पाचन, भूख को बढ़ावा देने और सिस्टम से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मददगार है। इसके अलावा, ये पित्त को भी शांत करका है और गैस और सूजन जैसी पाचन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। 

8. एनीमिया का इलाज करता है

सितोपलादि चूर्ण में मौजूद सामग्री, खनिजों का एक उत्कृष्ट मिश्रण है जो हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करने में प्रभावी है। चूर्ण का नियमित सेवन थकान, चिड़चिड़ापन और कमजोरी को दूर करने में मदद मिलती है।  साथ ही रेगुलर सेवन करने से ये एनीमिया को ठीक करता है।

सितोपलादि चूर्ण लेने का तरीका

1. सुबह घी के साथ

बड़े हो या बच्चे अगर आपको सर्दी-जुकाम या फिर कोई भी मौसमी कॉल्ड हो गया है तो 1 चम्मच सितोपलादि को देसी घी में मिला कर लें। अगर आप शिशु या फिर छोटे बच्चे के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं तो, आप इसे छोटे चम्मच में मिलाएं और उसे चटा दें। अगर वो खाना नहीं चाहता तो नाभि पर गर्म कर के लगा दें। 

2. रात में शहद के साथ 

सितोपलादि को अगर आप रात में ले रहे हैं या शाम को ले रहे हैं तो, इसे शहद में मिला कर लें। इसे आपको बड़े और बच्चे, दोनों के लिए ही इसी तरह से इस्तेमाल करना है। 

सितोपलादि चूर्ण के तमाम फायदे के लिए आप इनका इस तरह से सेवन कर सकते हैं। पर ध्यान रहे कि ज्यादा मात्रा में इसका सेवन ना करें। इससे पेट की समस्याएं हो सकती हैं और शरीर के दोष असंतुलित हो सकते हैं।

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