Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Karuna Malhotra , Cosmetologist, Skin specialist & Homoeopath Physician

गंदे बेडशीट पर सोने से होते हैं ये 4 नुकसान, जानें कितने दिनों में इसे बदलना चाहिए?

What Happens When You Sleep On Dirty Sheets: गंदे बेडशीट में सोने से कई तरह के स्वास्थ्य नुकसान हो सकते हैं। इसलिए, बहुत जरूरी है कि आप नियमित रूप से बेडशीट चेंज करें। कितने दिनों में गंदे बेडशीट को चेंज कर देना चाहिए? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।

जरा सोचिए कि आप अपनी बेडशीट कितने दिनों में बदलते हैं? एक हफ्ता, 15 दिन या एक महीना? जिन घरों में पति-पत्नी दोनों वर्किंग और घर में हाउसहेल्प भी नहीं है, उन घरों में देखा गया है कि कई-कई दिनों तक पुरानी बेडशीट का ही यूज किया जाता है। जब भी उन्हें मौका मिलता है, वे अपनी बेडशीट चेंज कर लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि गंदे बेडशीट पर सोने से आप बीमार हो सकते हैं? जी, हां! यह पूरी तरह सच है। आइए, राजौरी गार्डन स्थित कॉस्मेटिक स्किन क्लिनिक की कॉस्मेटोलॉजिस्ट और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. करुणा मल्होत्रा से जानते हैं गंदे बेडशीट पर सोने के नुकसान।

गंदे बेडशीट पर सोने के नुकसान- Sleeping On Dirty Bedsheet Side Effects

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स्किन प्रॉब्लम

गंदे बेडशीट पर सोने से स्किन से जुड़ी कई तरह की परेशानी हो सकती है। असल में जब आप कई-कई दिनों तक एक ही बेडशीट पर सोते हैं, तो इसकी वजह से आपका बॉडी ऑयल, पसीना और आपकी स्किन पर पर जमा हो जाते हैं, जो बैक्टीरिया का घर बन सकते हैं। जब आपकी स्किन दोबारा इन सब चीजों के संपर्क में आती है, तो इसकी वजह से एक्जिमा या अन्य स्किन कंडीशन और भी ज्यादा बिगड़ जाती है। Sleep Foundation में प्रकाशित एक लेख की मानें तो प्रत्येक सप्ताह बेडशीट बदल देनी चाहिए।

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इंफेक्शन होना

अगर आप रोजाना गंदे बेडशीट पर सो रहे हैं, तो इसकी वजह से स्किन इंफेक्शन का रिस्क भी बढ़ जाता है। खासकर, उन लोगों के साथ होता है, जिन्हें पहले से ही स्किन से जुड़ी प्रॉब्लम है या स्किन में रैशेज हैं। अगर वे उसकी सही तरह से देखभाल नहीं करते हैं और गंदे बेडशीट पर सोना नहीं छोड़ते हैं, तो इसकी वजह से परेशानी ट्रिगर हो सकती है।

सांस संबंधी समस्या

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जिनकी इम्यूनिटी पहले से ही कमजोर है या धूल-मिट्टी से एलर्जी है, तो उन्हें भूलकर भी गंदे बेडशीट में नहीं सोना चाहिए। इससे उनकी समस्या ट्रिगर हो सकती है। यहां तक कि अस्थमा या रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम भी बढ़ सकती है। जिन लोगों को आंखों में इचिंग या नाक बहने की समस्या है, उनकी समस्या भी गंदे बेडशीट पर सोने से बढ़ जाती है। वैसे भी National Institutes of Health (NIH) | (.gov) की एक रिपोर्ट कहती, "आप जितना ज्यादा गंदे बिस्तर पर सोते हैं, उतना बीमार, एलर्जी होने का रिस्क ज्यादा होता है।"

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इम्यूनिटी पर असर

आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि गंदे बेडशीट में सोने की वजह से लोगों की इम्यूनिटी भी प्रभावित होती है। जैसे अगर किसी को पहले से ही बुखार या सर्दी-जुकाम है, तो ऐसे में गंदे बेडशीट में सोना या गंदे पिलो कवर का इस्तेमाल करना आपकी कंडीशन को सुधारने की बजाय बिगाड़ सकते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह

गंदे बेडशीट में सोने से सबको बचना चाहिए। यह सही नहीं है। इससे आपकी तबियत बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट यहां आपको कुछ जरूरी सलाह दे रहे हैं, इन्हें फॉलो करें-

  • प्रत्येक 1 से 2 सप्ताह में गंदे बेडशीट बदलें।
  • गंदे बेडशीट को हमेशा गर्म पानी से धोएं।
  • गंदे बेडशीट को धोने के बाद धूप में सुखाना न भूलें।
  • बेडशीट में डिनर या किसी भी तरह का स्नैक्स न खाएं।

निष्कर्ष

किसी के लिए भी गंदे बेडशीट में सोना सही नहीं है। खासकर, जिन घरों में छोटे बच्चे हैं, उन्हें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इसका ओवर ऑल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही जिन्हें स्किन कंडीशन की दिक्कत है, गंदे बेडशीट को नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए। विशेषज्ञ हर स्वस्थ व्यक्ति को यह सलाह देते हैं कि गंदे बेडशीट में सोने से बचें। अगर किसी को स्किन प्रॉब्लम है, तो वे इस नियम का सख्ती से पालन करें।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या गंदी बेडशीट के कारण पिंपल हो सकते हैं? 

    हां, जब आप गंदे बेडशीट पर कई दिनों तक सोते हैं, तो इसकी वजह से आपके रोमछिद्र ब्लॉक हो सकते हैं, जिससे पिंपल होने का जोखिम बढ़ जाता है।
  • क्या नहाकर सोने के बावजूद बेडशीट बदलना जरूरी है?

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आप चाहें नहाएं या नहीं, प्रत्येक सप्ताह बेडशीट जरूर बदलें। ऐसा न करने पर स्किन से जुड़ी परेशानी होने का जोखिम बना रहता है।
  • बीमार होने के बाद बेडशीट कब बदलनी चाहिए?

    अगर आप बीमार हैं या कोई संक्रामक बीमारी है, तो बेहतर है कि आप ठीक होने के तुरंत बाद बेडशीट बदल लें। इससे आपके दोबारा बीमार होने का रिस्क कम हो जाएगा।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Meera Tagore

Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Feb 11, 2026 19:23 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Feb 11, 2026 19:23 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dr Karuna Malhotra

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