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रोज का गुस्सा, दुख, चिढ़ और तनाव भी बढ़ाते हैं दिल की बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के उपाय

मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थितियां दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं, जानें कार्डियोवैस्कुलर डिजीज के मनोवैज्ञानिक खतरे के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Oct 22, 2021 18:01 IST
रोज का गुस्सा, दुख, चिढ़ और तनाव भी बढ़ाते हैं दिल की बीमारियों का खतरा, एक्सपर्ट से जानें बचाव के उपाय

दिल की सेहत का ठीक रहना इंसान के जीवित रहने के लिए बहुत जरूरी होता है। आज के समय में खराब खानपान और अव्यवस्थित जीवनशैली की वजह से लाखों लोग दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। दिल से जुड़े रोग यानी कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा अब कम उम्र के लोगों में भी बढ़ रहा है। कई शोध और अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि कार्डियोवैस्कुलर डिजीज यानी दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां सिर्फ खानपान या खराब जीवनशैली और आनुवांशिक कारणों से ही नहीं बल्कि कई अन्य कारणों से भी हो सकती हैं। दिल से जुड़ी तमाम बीमारियों का सबसे प्रमुख जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर) तनाव और मनोवैज्ञानिक समस्याएं भी हैं। गुस्सा, चिंता, दुःख, चिढ़ और आपकी दूसरी मनोवैज्ञानिक आदतें भी इस समस्या का कारण बन सकती हैं। कोरोनरी हार्ट डिजीज का एक प्रमुख कारण मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति भी बन रही है। आइये विस्तार से जानते हैं इनके बारे में और इससे बचाव के उपाय के बारे में।

दिल की बीमारियों के मनोवैज्ञानिक जोखिम (Psychosocial Risk Factors For Cardiovascular Disease)

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(image source - freepik.com)

दिल से जुड़ी तमाम बीमारियां तनाव (स्ट्रेस) और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं के कारण भी हो सकती हैं। हर इंसान की तनाव झेलने की क्षमता अलग-अलग होती है और एक स्तर तक ही व्यक्ति तनाव जैसी समस्या को कंट्रोल में रख सकता है। आज के समय में लोगों में कामकाज के प्रेशर, रिश्तों में अनबन और आर्थिक स्थितियों के कारण कई तरह की मानसिक समस्याएं हो रही हैं। इन समस्याओं के बढ़ने पर आपको कई तरह की दिक्कतें तो होती ही हैं लेकिन इनकी वजह से आपको दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ संतोष कुमार डोरा (Dr. Santosh Kumar Dora) कहते हैं कि दिल से जुड़ी गंभीर स्थितियों के लिए आपकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति भी जिम्मेदार हो सकती है। ऐसे में आपको इन चीजों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

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हाल के कुछ सालों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बहुत तेजी से बढ़ा है। आज के समय में कोरोनरी हार्ट डिजीज सबसे प्रमुख स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। कम उम्र के लोगों में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट की समस्याएं बेहद चिंताजनक हैं। ईरानी सोसाइटी ऑफ कार्डिएक सर्जन की अनुसंधान समिति ने घोषणा की है कि ईरान में हृदय रोग के संपर्क में आने की आयु अन्य देशों की तुलना में लगभग 7 से 10 वर्ष कम है। विकसित देशों में हर छठा व्यक्ति दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का शिकार है। ऐसे में दिल की बीमारियों से जुड़े सभी जोखिम के बारे में जानना बहुत जरूरी है। कई शोध और अध्ययन इस बात की जानकारी देते हैं कि दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम मनोवैज्ञानिक स्थितियों और मानसिक समस्याओं के कारण भी बढ़ जाता है। आइये जानते हैं इनके बारे में।

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1. अत्यधिक गुस्से की वजह से दिल की बीमारी का खतरा

कई अध्ययन और शोध इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि जिन व्यक्तियों में क्रोध यानी गुस्सा बहुत जल्दी आता है उन्हें दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम अधिक होता है। ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों में ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या भी हो सकती है जिसके कारण दिल से जुड़ी बीमारियां होती हैं।

2. अत्यधिक दुःख के कारण

बहुत ज्यादा दुःख की स्थिति में रहने वाले लोगों को भी दिल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक रहता है। ऐसे लोग जो हर समय दुःख से घिरे रहते हैं उन्हें कई मानसिक बीमारियां हो सकती हैं जिसकी वजह से दिल की बीमारी का जोखिम भी बढ़ जाता है।

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3. डिप्रेशन की वजह से दिल की बीमारी का खतरा

डिप्रेशन की समस्या इंसान को सिर्फ मानसिक रूप से ही नहीं बल्कि शारीरिक रूप से भी परेशान करती है। डिप्रेशन या अवसाद ग्रस्त व्यक्ति को दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा अन्य व्यक्तियों की तुलना में अधिक होता है। कुछ समय पहले डेनमार्क के आरहूस विश्वविद्यालय में हुई शोध के मुताबिक डिप्रेशन की समस्या के कारण व्यक्ति के दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है जिसके बाद उसे दिल से जुड़ी गंभीर स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है।

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4. एंग्जायटी की वजह से कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा

अवसाद और एंग्जायटी जैसी समस्याओं के कारण दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बना रहता है। जिन लोगों में लंबे समय से एंग्जायटी और अवसाद की समस्या बनी रहती हैं उन्हें भी कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा ज्यादा होता है। सीएचडी रोगियों में चिंता के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक लक्षणों के बारे में किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि चिंता शारीरिक कारकों से संबंधित है जैसे कि बिना किसी शारीरिक व्यायाम के धड़कन, चेहरे पर क्रोध और लालिमा, असामान्य दिल की धड़कन और मांसपेशियों में तनाव दिल की बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने का काम करता है। 

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5. काम का मनोवैज्ञानिक असर

कामकाज के प्रेशर की वजह से भी लोगों में दिल से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। नौकरी का तनाव सीएचडी के जोखिम कारकों के बढ़े हुए स्तर से जुड़ा हुआ है। नौकरी वाले पुरुषों और महिलाओं में कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम के बीच संबंध पर एक अध्ययन के मुताबिक कामकाज के प्रेशर और नौकरी न मिलने की वजह से लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

6. चिंता की वजह से हार्ट अटैक का खतरा

डिप्रेशन और चिंता आदि से ग्रसित व्यक्ति के दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। डिप्रेशन की स्थिति में हृदय में रक्त का प्रवाह भी कम हो जाता है और शरीर में कोर्टिसोल जैसे तनाव हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थितियों के कारण हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। अनियमित दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर के स्तर में बदलाव की वजह से व्यक्ति को हार्ट अटैक, हार्ट स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। 

हार्ट डिजीज से बचाव के टिप्स (Heart Disease Prevention Tips)

स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी समस्या के लंबे समय तक शिकार होने के कारण आपको दिल से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का खतरा होता है। चिंता और तनाव के कारण आपके ब्लड प्रेशर के स्तर में उतार-चढ़ाव हो सकता है जिसकी वजह से आपको कई समस्याएं होती हैं। तनाव और डिप्रेशन के कारण होने वाली दिल की बीमारियों से बचाव के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें। 

  • तनाव और चिंता की समस्या बढ़ने पर एक्सपर्ट डॉक्टर से इलाज जरूर कराएं।
  • खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव करें।
  • अल्कोहल के सेवन से बचें।
  • स्मोकिंग की लत को छोड़ें।
  • जंक फूड्स या प्रोसेस्ड फूड का सेवन न करें।
  • चीनी और साल्ट के सेवन से भी परहेज रखें।
  • हार्ट के लिए फायदेमंद ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें।
  • रोजाना एक्सरसाइज या योग जरूर करें।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण (पॉजिटिव थिंकिंग) बनाए रखें, इससे स्ट्रेस को दूर करने में फायदा मिलेगा।
  • लक्षण दिखने पर लापरवाही न बरतें।
  • समय-समय पर हार्ट हेल्थ की जांच कराएं।
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मानसिक और मनोवैज्ञानिक कारणों की वजह से दिल से जुड़ी गंभीर स्थितियों के खतरे को कम करने के लिए आपको ऊपर बताई गयी बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। स्ट्रेस और डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं के लक्षण दिखने पर इनसे बचाव के लिए एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। इन समस्याओं को नजरअंदाज करना आप पर भारी पड़ सकता है। इसके अलावा समय-समय पर अपने दिल के सेहत की जांच जरूर करें।

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