दिल की गंभीर समस्या है 'सडेन कार्डियक अरेस्ट', एक्सपर्ट से जानें इसके कारण और बचाव के टिप्स

अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) की घटनाएं आज के समय में तेजी से बढ़ रही हैं, एक्सपर्ट से जानें इसके कारण और बचाव के उपाय।

 
Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghPublished at: Oct 13, 2021
दिल की गंभीर समस्या है 'सडेन कार्डियक अरेस्ट', एक्सपर्ट से जानें इसके कारण और बचाव के टिप्स

आज के समय में असंतुलित खानपान और जीवनशैली के कारण लाखों लोग दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं। पिछले कुछ सालों में भारत की युवा आबादी दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शिकार हुई है। अचानक होने वाले कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) की घटनाओं में भी हाल के दिनों में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक युवा लोगों में मौत का सबसे बड़ा कारण कार्डियक अरेस्ट बन रहा है। दरअसल, कार्डियक अरेस्‍ट (Cardiac Arrest) का मतलब है अचानक से आपकी दिल का काम करना बंद हो जाना। दरअसल, इसके पीछे सबसे बड़ा कारण होता है आपके ब्लड वेसेल्स का हेल्दी ना होना। आपके ब्लड वेसेल्स में ब्लॉकेज होने पर या फिर ब्लड सर्कुलेशन का सही से ना होने पर कार्डियक अरेस्‍ट होने के चांस बढ़ जाते हैं। इन स्थितियों को मेडिकल भाषा में समझाएं तो, ये कोरोनरी हार्ट डिजीज (Coronary Artery Disease)है। इसमें आपकी धमनियां ब्लॉक होने लगती हैं। इसकी वजह से ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो जाती है। इससे अचानक से दिल काम करना बंद कर देता है और अचानक कार्डियक अरेस्ट आ जाता है। 'सडेन कार्डियक अरेस्ट' दिल से जुड़ी बीमारियों और अन्य स्थितियों के कारण ही हो सकता है। 

इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और अनुवांशिक कारणों से भी लोगों को कार्डियक अरेस्ट होता है। पर इसमें ज्यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि क्या कार्डियक अरेस्ट हमेशा अचानक ही होता है और इसके लक्षण पहले से महसूस नहीं होते? तो ऐसा नहीं है। सडेन कार्डियक अरेस्ट के प्रति लोगों को जागरूक करने और इसके जोखिम कारण आदि के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अक्टूबर महीने को सडेन कार्डियक अरेस्ट अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है। दिल की धड़कन का थमना अक्सर हार्ट अटैक ही नहीं होता है। कई बार लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समस्या समझ बैठते हैं। हालांकि ये दोनों एक दूसरे से अलग हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और अनुवांशिक कारणों से भी लोगों को कार्डियक अरेस्ट होता है। पर इसमें ज्यादातर लोग ये जानना चाहते हैं कि क्या कार्डियक अरेस्ट हमेशा अचानक ही होता है और इसके लक्षण पहले से महसूस नहीं होते? सडेन कार्डियक अरेस्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ संतोष कुमार डोरा, आइये जानते है डॉ संतोष से इसके बारे में।

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सडेन कार्डियक अरेस्ट के कारण (What Causes Sudden Cardiac Arrest?)

हार्ट के पंपिंग सिस्टम के अचानक बंद होने के कारण कार्डियक अरेस्ट की समस्या होती है। इस दौरान या तो दिल की धड़कन एकदम से बंद हो जाती है या इतनी तेजी से धड़कती है कि पूरी तरह से पंपिंग की प्रक्रिया बेअसर हो जाती है। डॉ डोरा के मुताबिक कार्डियक अरेस्ट का सबसे आम कारण हार्ट अटैक है। हार्ट अटैक से पीड़ित लगभग 30 प्रतिशत रोगियों में कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है। हालांकि कार्डियक अरेस्ट के कई और कारण भी होते हैं। कार्डियक अरेस्ट की समस्या कार्डियोमायोपैथी के कारण भी हो सकती है। कार्डियोमायोपैथी दिल की कमजोरी से जुड़ी एक समस्या है जिसमें आपकी दिल की मांसपेशियों बुरी तरह से प्रभावित होती हैं। सडेन कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं।

1. हार्ट अटैक

हार्ट अटैक की समस्या के कारण दिल के मरीजों को कार्डियक अरेस्ट या सडेन कार्डियक अरेस्ट आ सकता है। एक आंकड़े के मुताबिक दिल के दौरे यानी हार्ट अटैक की समस्या से पीड़ित लगभग 30 प्रतिशत मरीजों में कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है। तो इस तरह से देखा जाये तो हार्ट अटैक सडेन कार्डियक अरेस्ट का एक प्रमुख कारण है।

2. वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन

आपके हृदय में चार कक्ष होते हैं। निचले कक्ष को निलय कहा जाता है। वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन में, ये कक्ष नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं। इससे हृदय की लय अचानक से बदल जाती है। इसके बाद दिल की पंपिंग प्रणाली प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में निलय सही ढंग से पंपिंग नहीं कर पाता है और इसकी वजह से जब पंपिंग बंद हो जाता है तो शरीर में खून का संचार बंद हो जाता है और इसकी वजह से मरीज को अचानक कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। इस स्थिति में मरीज की तुरंत मौत हो जाती है। 

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3. दिल की अनियमित धड़कन

अतालता या दिल की अनियमित धड़कन के कारण भी अचानक कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। दिल के ऊपरी कक्षों में अतालता की समस्या के बाद दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है जिसकी वजह से मरीज को सडेन कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है।

4. कार्डिएक टैम्पोनैड

एक ऐसी स्थिति जब द्रव हृदय के चारों ओर जमा हो जाता है और हृदय कक्ष को संकुचित कर देता है, जिससे हृदय गति रुक सकती है क्योंकि हृदय अधिक पंप नहीं कर सकता है। इस स्थिति के कारण भी सडेन कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

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5. हार्ट ब्लॉक

हार्ट में ब्लॉकेज या एक विद्युत चालन असामान्यता कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती है।

6. लो हार्ट पंपिंग फंक्शन

लो हार्ट पंपिंग फंक्शन के कारण भी मरीजों को सडेन कार्डियक अरेस्ट का खतरा रहता है।

7. सीरम इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन

सीरम इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन यानी हाइपोकैलिमिया और हाइपरकेलेमिया कार्डियक अरेस्ट के प्रमुख कारण हैं।

इसके अलावा कई तरह की दिल से जुड़ी बीमारियां और हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और अनुवांशिक कारणों से भी लोगों को कार्डियक अरेस्ट होता है। 

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कार्डियक अरेस्‍ट के लक्षण (Symptoms of Cardiac Arrest)

दिल की धड़कन के अनियमित होने और दिल के सही ढंग से रक्त को पंप न कर पाने के कारण आपको सडेन कार्डियक अरेस्ट की समस्या हो सकती है। कार्डियक अरेस्ट की समस्या अचानक होने पर आप लक्षणों के बारे में समझ नहीं सकते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सडेन कार्डियक अरेस्ट होने से पहले शरीर में ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  • अचानक बेहोश हो जाना
  • सांस न चलना
  • छाती में दर्द
  • सांस लेने में कठिनाई
  • कमजोरी और जी मिचलाना 
  • अत्यधिक पसीना होना

कार्डिएक अरेस्ट से बचाव के उपाय (Tips To Prevent Sudden Cardiac Arrest)

अचानक कार्डियक अरेस्ट को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है कि हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जाए। यह दिल के दौरे के जोखिम कारकों को कम करके किया जा सकता है। इसके अलावा कार्डियक अरेस्ट के अन्य जोखिम कारक जैसे धूम्रपान, मधुमेह और उच्च रक्तचाप का कुशल नियंत्रण, डिस्लिपिडेमिया का नियंत्रण, आहार की आदतों में बदलाव और मोटापे से बचने के लिए नियमित व्यायाम आदि को अपनाने से आप इन समस्याओं से बच सकते हैं। इसके अलावा दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित रूप से हेल्थ चेकअप जरूर करना चाहिए। इसके अलावा स्वचालित इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर और डिफाइब्रिलेटर एक पेसमेकर जैसा उपकरण है जो उन रोगियों में लगाया जाता है जिन्हें कार्डियक अरेस्ट या कार्डिएक अरेस्ट सर्वाइवर्स के लिए उच्च जोखिम होता है। आपका डॉक्टर तय करता है कि इस उपकरण को आपको लगाया जा सकता है या नहीं। यह उपकरण कार्डियक अरेस्ट की तेजी से पहचान करने में मदद करता है और फिर शॉक थेरेपी को पेसिंग या डिलीवर करके कार्डियक अरेस्ट को सामान्य लय में बदल देता है। आजकल कई संस्थाएं लोगों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन उपायों के बारे में शिक्षित कर रही हैं ताकि कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित व्यक्ति को चिकित्सा सहायता मिलने तक प्रबंधित किया जा सके। सडेन कार्डियक अरेस्ट से बचाव के लिए आप इन बातों का ध्यान जरूर रखें।

  • कार्डियक अरेस्ट की स्थिति से बचाव करने के लिए आपको एक अच्छे लाइफस्टाइल की जरूरत है।  
  • मधुमेह, उच्च रक्तचाप और डिस्लिपिडेमिया जैसी बीमारियों वाले लोगों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। 
  • पूरी तरह से धूम्रपान बंद कर दें। 
  • इसके अलावा आहार वसा और चीनी में कम होना चाहिए। 
  • नियमित रूप से आपको व्यायाम करना चाहिए। 
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कार्डियक अरेस्ट की हिस्ट्री वाले मरीजों को अपने परिवार के सदस्यों और सहकर्मियों को आपातकालीन नंबर जरूर देना चाहिए, ताकि कभी भी गंभीर स्थिति पैदा होने पर वे किसी से मदद मांग सके। इसके आलावा उपर डॉक्टर की बताई गयी बातों का ध्यान रखने से आप इस समस्या से बच सकते हैं। स्वस्थ आहार का सेवन और नियमित रूप से व्यायाम आदि करने से आप दिल की बीमारियों के जोखिम से बच सकते हैं।

नोट: यह लेख डॉ. संतोष कुमार डोरा, सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट, एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट, मुम्बई द्वारा दिए गए इनपुट्स पर आधारित है।

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