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महिलाओं में पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के कारण, लक्षण और इलाज

पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम महिलाओं में मासिक धर्म या पीरियड्स के बाद होने वाली एक समस्या है, जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में।

Prins Bahadur Singh
Written by: Prins Bahadur SinghUpdated at: Nov 01, 2021 13:51 IST
महिलाओं में पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के कारण, लक्षण और इलाज

एक उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले रासायनिक और हार्मोनल बदलावों की वजह से उन्हें पीरियड्स यानी मासिक धर्म का सामना करना पड़ता है। हर महिला को एक तय उम्र तक ही मासिक धर्म या पीरियड्स का सामना करना पड़ता है। पीरियड्स के दौरान शारीरिक स्थितियों और खानपान की वजह से कई समस्याएं भी हो सकती हैं। महिलाओं की लाइफस्टाइल और खानपान का भी पीरियड्स पर गहरा असर होता है। मासिक धर्म या पीरियड्स के दौरान होने वाली समस्याओं में से एक पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम भी है। महिलाओं में पीरियड्स के पहले सप्ताह के दौरान दर्द, ऐंठन और सूजन आदि की समस्या को प्री मेंसट्रुअल सिंड्रोम कहा जाता है लेकिन अगर यही समस्या पीरियड्स के बाद भी कुछ दिनों के लिए बनी रहे तो इसे पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम का नाम दिया जाता है। अधिकांश लोग प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) के बारे में जानते हैं लेकिन पोस्ट मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। पिछले कुछ सालों से महिलाओं में पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण तेजी से बढ़े हैं। आइये विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

क्या है पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम? (Post Menstrual Syndrome?)

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(image source - freepik.com)

मासिक धर्म के बाद कुछ दिनों तक ऐंठन, दर्द और सूजन आदि की समस्या होने को पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम कहा जाता है। इस समस्या के कारण सिरदर्द जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या में दिखने वाले लक्षण प्री मेंसट्रुअल सिंड्रोम में दिखने वाले लक्षणों के समान ही होते हैं। हालांकि इस समस्या में दिखने वाले लक्षण अधिक गंभीर माने जाते हैं। स्टार हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ विजय लक्ष्मी के मुताबिक पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम, प्रीमेंसट्रुअल सिंड्रोम से अलग होता है और इसके कारण सिर्फ दर्द और ऐंठन ही नहीं मानसिक समस्याएं भी होती है। शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से मूड चेंज, तनाव आदि की समस्या हो सकती है। जिन लोगों में अवसाद और डिप्रेशन की समस्या पहले से होती हैं उन्हें इसके लक्षण अधिक दिखाई देते हैं।

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पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण (Post Menstrual Syndrome Symptoms)

पीरियड्स के खत्म होने के बाद भी महिलाओं में पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के लक्षण दिखने पर मनोवैज्ञानिक और शारीरिक समस्याओं का अनुभव होता है। इसकी वजह से मिजाज में बदलाव और चिंता व तनाव की समस्याएं हो सकती हैं। पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की वजह से अपने आप चिड़चिड़ापन, क्रोध या आंसू, उदास महसूस करना, सोने और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा इस सिंड्रोम की वजह से होने वाली शारीरिक परेशानी पेट, जोड़, पीठ और गर्दन आदि में गंभीर दर्द हो सकता है। पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या में दिखने वाले लक्षण इस प्रकार से हैं।

  • पेट में गंभीर दर्द।
  • पीठ, गर्दन और जोड़ों में दर्द।
  • वेजाइना में खुजली
  • शरीर में ऐंठन।
  • व्यवहार (मूड) में बदलाव।
  • चिंतित या चिड़चिड़ा महसूस करना।
  • थकान और सोने में परेशानी।
  • पेट में सूजन।
  • गंभीर सिर दर्द।
  • स्किन पर धब्बे।
  • भूख न लगना।
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पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के कारण (What Causes Post Menstrual Syndrome?)

मासिक धर्म या पीरियड्स के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से कई तरह के सिंड्रोम का सामना करना पड़ता है। पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम शरीर में एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में वृद्धि के कारण ज्यादातर लोगों में होता है। जबकि पीएमएस की समस्या में प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन की कमी होती है। हालांकि अभी भी दुनियाभर में पीरियड्स के बाद होने वाले सिंड्रोम के बारे में अधिक जानकारी जुटाने के लिए तमाम शोध चल रहे हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), गर्भनिरोधक प्रत्यारोपण या इंसुलिन प्रतिरोध वाले लोगों में पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव एनोवुलेटरी चक्र के कारण भी इसके लक्षण तेजी से बढ़ते हैं।

  • एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन में वृद्धि।
  • इंसुलिन प्रतिरोध
  • खानपान में गड़बड़ी।
  • ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण।

पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या में इलाज (Post Menstrual Syndrome Treatment)

पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या शारीरिक स्थिति, खानपान और स्वास्थ्य से जुड़ी स्थितियों के कारण हो सकती है। इस समस्या में रोजाना स्वस्थ आहार का सेवन और तनाव को कम करने से फायदा मिलता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस समस्या का कोई सटीक इलाज नहीं है।  इसके लक्षणों को दूर करने के लिए चिकित्सक कुछ थेरेपी और एंटीडिप्रेसेंट के सेवन की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा जिन महिलाओं में यह समस्या गंभीर रूप से देखी जाती हैं उन्हें कुछ विशेष जांच की सलाह भी दी जा सकती है। जांच के आधार पर ही चिकित्सक दवाओं के सेवन की सलाह देते हैं। पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम के कारण मनोवैज्ञानिक समस्याएं होने पर चिकित्सक थेरेपी की सहायता लेते हैं। 

पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम से बचाव के उपाय (Post Menstrual Syndrome Prevention Tips)

महिलाओं में हार्मोनल बदलाव और शारीरिक स्थिति के कारण पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। इस समस्या से बचाव के लिए आपको खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतों में बदलाव करना चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम की समस्या में बचाव के लिए आपको तनाव और चिंता जैसी मानसिक समस्याओं को कम करना चाहिए। रोजाना पर्याप्त नींद लेने और व्यायाम करने से भी इस समस्या से बचाव संभव है। आप पोस्ट मेंसट्रुअल सिंड्रोम से बचाव के लिए इन बातों का ध्यान जरूर रखें। 

  • तनाव और स्ट्रेस को दूर करें। 
  • रोजाना पर्याप्त नींद लें। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। 
  • नमक और कैफीन के सेवन को नियंत्रित करें। 
  • फल, सब्जियां, मछली और साबुत अनाज का सेवन अधिक करें।
  • शरीर में आयरन की कमी न होने दें।
  • सूजन जैसी समस्याओं में बी-कॉम्प्लेक्स और विटामिन ई की खुराक लें।
  • डार्क चॉकलेट, नट्स, सीड्स और एवोकाडो जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
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इस समस्या में अगर आपको गंभीर लक्षण दिखाई देते हैं तो इलाज के लिए किसी एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह लें। इसके अलावा ऊपर बताई गयी बातों का ध्यान जरूर रखें। मासिक धर्म के बाद होने वाले सभी सिंड्रोम के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए दुनियाभर के एक्सपर्ट्स अभी भी शोध और अध्ययन कर रहे हैं। इस समस्या से बचने के लिए आपको खानपान और जीवनशैली से जुड़ी आदतों में बदलाव जरूर करना चाहिए। अगर आपके पास इस समस्या से जुड़े कोई सवाल हैं तो आप उसे कमेंट बॉक्स में लिखकर हमें भेज सकते हैं। हम आपके सवालों के जवाब एक्सपर्ट द्वारा देने की कोशिश करेंगे।

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