पीएम मोदी ने की कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीजों, इलाज करने वाले डॉक्टर्स और नर्सों से बात, जानें उनके अनुभव

हाल में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस से इंफेक्‍टेड तेलंगाना के पहले कोरोना मरीज से फोन पर बातचीत की। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Mar 30, 2020Updated at: Mar 30, 2020
पीएम मोदी ने की कोरोना वायरस से ठीक हो चुके मरीजों, इलाज करने वाले डॉक्टर्स और नर्सों से बात, जानें उनके अनुभव

देश-दुनिया में फैली महामारी कोरोना वायरस हर घंटे किसी न किसी व्‍यक्ति को इंफेक्‍टेड कर रही है। जिसके चलते भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में संपूर्ण लॉकडाउन है। घर में रहकर सोशल डिस्‍टेंसिंग करने को लेकर सरकार लगातार जनता से अपील कर रही है लेकिन रोजमर्रा की आम जरूरतों और अन्‍य कारणों से लोग घर से बाहर निकलने को मजबूर हैं। शायद यही वजह है कि कोरोना वायरस से ग्रस्‍त लोगों की संख्‍या दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसे में तेलंगाना का एक व्‍यक्ति टेकी राम तेजा कोरोना पॉजिटिव पाया गया था, उससे देश के प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने बातचीत कर उसके हाल चाल जानें।

2 मार्च को पाया गया था टेकी राम तेजा कोरोना पॉजिटिव  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तेलंगाना के पहले कोरोना मरीज टेकी राम तेजा से फोन पर बात की। टेकी राम तेजा का 2 मार्च को COVID-19 टेस्‍ट पॉजिटिव पाया गया था। जिसके बाद टेकी राम तेजा का गांधी हॉस्पिटल में इलाज चला और दो हफ्ते बाद वह ठीक होकर वापस घर लौट आया। 

'मन की बात' में की पीएम मोदी ने टेकी राम तेजा से बात  

पीएम मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम में उन्‍होंने फोन के जरिये तेलंगाना के कोरोना मरीज रहे टेकी राम तेजी से बात की। जिसमें पीएम मोदी ने टेकी राम से उनके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद के अनुभव जानें। 

टेकी राम ने बताया कि वह कोरोना पॉजिटिव होने के बाद बहुत डर गया था लेकिन गांधी हॉस्पिटल के डॉक्‍टरों ने उसे सर्पोट किया और उसकी अच्‍छी देखभाल की। आगे टेकी राम तेजा ने बताया कि रिकवरी के बाद उसे होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई। टेकी ने कहा, सोशल डिस्‍टेंसिंग रखना और हाथों को बार-बार धोना कोरोना से बचाव का एक तरीका हैं। 

Corona virus jung

टेकी राम ने बताया कि वह दुबई से लौटा था, जिसके बाद 3-4 दिन बाद उसे बुखार आने लगा और डॉक्‍टर से टेस्‍ट कराने पर वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया। जिसके बाद वह 14 दिन हॉस्पिटल में रहने के बाद डिस्‍चार्ज हो गये। टेकी राम ने कहा, अच्‍छी बात यह थी कि मेरे परिवार के लोगों का कोराना टेस्‍ट नेगेटिव आया। मेरी हालत में सुधार होता, तो डॉक्‍टर मेरे परिवार को भी इसकी जानकारी देते रहे, जिससे कि सब कुछ ठीक चला। 

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इलाज कर रहे डॉक्‍टर्स और नर्सों से भी की पीएम मोदी ने बात

पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में COVID-19 के मोर्चे पर डटे डॉक्‍टर और नर्स से भी बात की। यहां आप वीडियो के माध्‍यम से पीएम मोदी और कोरोना के इलाज कर रहे डॉक्‍टर के बीच की बात सुनें।   

वहीं एक नर्स ने भी अपना अनुभव साझा किया जिसमें नर्स का कहना है, ईमानदारी से, जब हम सभी नर्सों को COVID-19 से लड़ने के लिए अस्पताल में सेवा के लिए बुलाया गया, तो मैं डर गई। मेरी 2 बेटियां और एक पति है, जिनके स्वास्थ्य की मुझे चिंता थी। उस समय, मेरा 4 वां ग्रेडर सिर्फ खुश था कि उनकी परीक्षा रद्द हो गई थी। मेरी बेटी ने मुझसे रिपोर्ट न करने की भीख माँगी। मैं उसे आश्वस्त कर रहा थी कि मैं ठीक हूं, क्योंकि जब ड्यूटी के लिए फोन किया जाता है, तो आप दिखाते हैं कि कोई योजना नहीं है। इसलिए मेरे पति ने घर संभाल लिया और मैं काम पर निकल गई।

अस्पताल जाना कठिन था, क्योंकि टैक्सियों या बस में जोखिम अधिक था। इसलिए मेरे पति ने मुझे छोड़ दिया, लेकिन उसके बाद अन्य नर्सों और मैंने कारपूल करने का फैसला किया, लेकिन हमने महसूस किया कि अस्पताल में रहना हमारे लिए सबसे अच्छा था।

 
 
 
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“Honestly, when all us nurses were called for service to the hospital to fight COVID-19, I was scared. I have 2 daughters & a husband, who’s health I was concerned about. At that point, my 4th grader was just happy her exams were cancelled & my other daughter was paranoid I’d catch the virus–she begged me to not report. All I could do was assure her that I’d be okay, because when duty calls, you show up–there’s no plan B. So my husband took over the house & I left for work. Even getting to the hospital was tough, because the risk in taxis was high. So my husband drove me, but that put him at risk. The other nurses & I decided to carpool, but we realised it was best for us to stay at the hospital. I still remember the first day–between admitting patients, allocating beds & calming down patients… it was like a war zone; we didn’t get a minute to rest. But the hardest thing we had to do was keep families apart. I was handling a couple from Pune who was begging me to leave to go home to their kids–but I couldn’t. It was heartbreaking. I thought of my own kids & how much I missed them–it had been 5 days since I’d been home. They kept calling to make sure I had my mask on or was eating, but even those calls lasted a few seconds. There was so much to be done that we had to work extra shifts–we kept morale high by sending each other motivational messages. One of the nurses left at 6am & returned at 9am because a new batch of travellers had arrived–she worked until 12am again that night. But all of it’s worth it when we see the look of relief on our patient’s faces when they test negative. Just last week this group of travellers thanked us with folded hands for taking care of them–in these situations, I always say it’s our first & only duty to serve. These are trying times, but we’ll get through them together. Believe only credible sources for information, take our instructions seriously & stay at home. Help us by not getting out unless it’s for essentials or if there’s an emergency. And once this is all over, we will all celebrate. You celebrate with your friends & family & us nurses will celebrate with ours–we can do it together, by just being home alone.”

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पहला दिन था काफी मुश्किल भरा 

मुझे अभी भी पहला दिन याद है - रोगियों को भर्ती करना, बिस्तर बांटने और रोगियों को शांत करने के बीच ... यह युद्ध क्षेत्र जैसा था। हमें आराम करने के लिए एक मिनट भी नहीं मिला। लेकिन हमें सबसे मुश्किल काम परिवारों को अलग रखना था। मैं पुणे के एक दंपति को संभाल रही थी, जो मुझे अपने बच्चों के पास घर जाने के लिए छोड़ने के लिए विनती कर रही थी। लेकिन मैं नहीं कर सकता थी। यह दिल दहला देने वाला था।

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मैंने अपने बच्चों के बारे में सोचा और मैंने उन्हें याद किया। मुझे घर गये हुए 5 दिन हो गए थे। वे यह सुनिश्चित करने के लिए फोन करते रहे कि मेरे पास मेरा मास्‍क है, मैं खाना खा रही हुं, लेकिन उनकी कॉल केवल कुछ सेकंड तक होती थी। 

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