आंखों का फड़कना शुभ-अशुभ नहीं, किसी गंभीर बीमारी का संकेत है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Dec 19, 2017
Quick Bites

  • आंखों की मांशपेशियों में संकुचन से कभी-कभी आंखें फड़कने लगती हैं।
  • इससे आपके आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा है
  • चिकित्सक से तुरंत परामर्श जरूरी

आंखों के फड़कने को अक्सर शुभ-अशुभ से जोड़कर देखा जाता है लेकिन आधुनिक विज्ञान में इस मान्यता के लिए कोई जगह नहीं है। विज्ञान की मानें तो आंखों का फड़कना शुभ का तो कदाचित् नहीं मगर अशुभ का संकेत जरूर है। यहां अशुभ से मतलब आपकी आंखों की समस्याओं से है। आंखों की मांशपेशियों में संकुचन से कभी-कभी आंखें फड़कने लगती हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। सामान्य स्थिति में ये किसी तरह के तनाव, आंखों पर पड़ने वाले जोर, आंखों में सूखेपन, सिगरेट-शराब के अधिक सेवन से या चाय, कॉफी के ज्यादा सेवन से भी हो सकता है। लेकिन कई बार ये किसी खतरनाक बीमारी का संकेत भी हो सकता है। इससे आपके आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा है।
आपको ये बात समझनी होगी कि आंखें शरीर के कुछ सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक है। इसलिए आंखों के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी कई बार बड़े गंभीर परिणाम ला सकती है। पलकों का झपकना एक सामान्य प्रक्रिया है और आंखों की सुरक्षा की दृष्टि से पलकों का झपकना जरूरी है। औसतन व्यक्ति की आंखें एक मिनट में 12 से 20 बार झपकती हैं। कई बार ये एक मिनट में 25 बार तक झपक सकती हैं। इसका कारण नींद की कमी, ज्यादा मात्रा में कैफीन का सेवन, किसी तरह का नशा, एकदम से ज्यादा रौशनी या देर तक स्क्रीन पर देखना आदि हो सकता है। यही प्रक्रिया अगर सामान्य से ज्यादा हो जाए तो आंखों के लिए खतरे का संकेत है।

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बीमारी का संकेत हो सकता है आंखें फड़कना

आंखों का फड़कना इससे जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का अलार्म बेल भी हो सकता है, जिसका अर्थ है आपको इस पर ध्यान देना है। ब्लफेरोस्पाज़्म या डिस्टोनिया ऐसी ही बीमारियां हैं जिनका शुरुआती लक्षण आंखों का झपकना हो सकता है। इसकी वजह से आंखों में भारीपन, सूखापन और थकान बनी रहती है। ये बीमारियां सामान्य उपचार या घरेलू उपायों से ठीक नहीं होती हैं। आंखों के फड़कने का अन्य कारण पार्किंसंस, स्ट्रोक, बेल्स पॉल्सी, टोरेट्स सिंड्रोम, कंजंक्टिवाइटिस जैसी कुछ विशेष बीमारियां भी हो सकती हैं।

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चिकित्सक से तुरंत परामर्श जरूरी

आंखों के फड़कना अगर लगातार जारी रहता है या फड़कने के साथ-साथ आंखों में दर्द, चुभन और पानी निकलता महसूस हो रहा है तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। इसकी वजह कोई ऐसी गंभीर बीमारी भी हो सकती है जिससे आपकी आंखों की रौशनी के जाने का खतरा हो। कई बार डॉक्टर किसी विशेष इंजेक्शन या एक्यूप्रेशर की तकनीक से इस समस्या का हल बता देते हैं और आपकी आंखें आसानी से ठीक हो सकती हैं।

आंखों के लिए आहार और व्यायाम

अगर आप अपनी आंखों को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो आपको विटामिन से भरपूर आहार लेना चाहिए। सेब, आंवला, पपीता, हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध आंखों के लिए फायदेमंद है। गाय के दूध में ऐसे कई तत्व होते हैं जो आंखों की रौशनी बढ़ाते हैं। इसके अलावा गाजर आंखों के लिए वरदान है। गाजर में विटामिन ए भरपूर होता है। गाजर को आप कच्चा भी खा सकते हैं और इसका जूस बनाकर पालक के रस के साथ भी पी सकते हैं।

आहार के अलावा आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ आसान से व्यायाम हैं जिन्हें आप कहीं भी कर सकते हैं। अपनी पलकों को 20 से 25 बार बिना रुके झपकाएं और फिर दो मिनट आंखें बंदकर थोड़ी सा आराम दें। ऐसा दिन में दो बार करने से आंखों की मांशपेशियों को आराम मिलता है। दूसरे व्यायम के लिए आप पद्मासन लगाकर बैठ जाएं। अब अपनी पुतलियों को 10 बार क्लॉक वाइज घुमाएं फिर 10 बार एंटीक्लॉक वाइज घुमाएं। इसके बाद अपनी आंखों को दो मिनट तक बंद रखकर आराम दें। इन व्यायामों को रोज करने से आपकी आंखे स्वस्थ रहती हैं।

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