प्रेगनेंसी में मूड स्विंग (Mood Swings) होने के कारण, लक्षण और बचाव के लिए आसान टिप्स

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का मूड स्विंग होना एक आम समस्या है। ऐसे में जानें इसके लक्षण, कारण, उपचार और बचाव

Garima Garg
Written by: Garima GargUpdated at: Aug 02, 2021 14:08 IST
प्रेगनेंसी में मूड स्विंग (Mood Swings) होने के कारण, लक्षण और बचाव के लिए आसान टिप्स

जब महिलाएं गर्भावस्था के दौर में होती हैं तो उनके शरीर में कई बदलाव आते हैं। यह बदलाव सकारात्मक भी हो सकते हैं और नकारात्मक भी। लेकिन इन बदलावों के कारण महिलाओं को अपनी रोजमर्रा के जीवन में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनका मूड स्विंग होता रहता है। बता दें कि प्रेग्नेंसी में मूड स्विंग होना एक आम बात है लेकिन इसके कारण महिलाओं को काफी परेशानी होती है। ध्यान दें कि गर्भावस्था में मूड स्विंग के कुछ अन्य कारण भी होते हैं। आज का हमारा लेख इसी विषय पर है। आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का मूड स्विंग क्यों होता है। साथ ही इसके क्या कारण है, इससे कैसे बचाव किया जा सकता है और इसके उपचार क्या हैं इसके बारे में भी जानेंगे। पढ़ते हैं आगे...

गर्भावस्था के दौरान मूड स्विंग के लक्षण

1 - व्यवहार का अटपटा होना

2 - चिड़चिड़ापन महसूस करना

3 - बार-बार गुस्सा होना

4 - इनका एक बात पर जिद करना

5 - कभी-कभी लड़ाई करना

6 - घबराहट महसूस करना

7 - दिमाग में उलझन महसूस करना

8 - अचानक से मूड का अच्छा हो जाना

9 - आंखों का लाल हो जाना

नोट - ऊपर बताए गए लक्षण महिलाओं के मूड स्विंग के दौरान नजर आ सकते हैं हालांकि जब महिलाओं का मूड अच्छा हो जाता है तो यह लक्षण खुद-ब-खुद दूर भी हो जाते हैं।

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प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग के कारण

  1. यह आम बात है कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का मूड स्विंग हो रहा है और इसके दौरान महिलाओं को घबराहट भी होती है। इसके पीछे एक मुख्य कारण यह है कि महिलाओं को शिशु की चिंता रहती है। इससे अलग मूड स्विंग के पीछे कुछ शारीरिक कारण भी हो सकते हैं। 
  2. माएं अक्सर यह सोचती है कि वह कुछ महीनों बाद मां बनने वाली है और यह सोचकर वे खुश हो जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ वह दुख और तकलीफ को सोचकर अचानक से दुखी भी हो जाती हैं। ऐसे में यह एक कारण होता है मूड स्विंग।
  3. कभी-कभी चिंता के कारण भी महिलाओं का मूड स्विंग हो सकता है।
  4. जब महिलाएं थकान महसूस करती हैं तब उनका मूड स्विंग हो सकता है।
  5. जब महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बदलते हैं तो इसके कारण भी शरीर में बदलाव हो सकता है।
  6. जब मेटाबॉलिज्म में बदलाव आता है तब भी प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं का मूड स्विंग हो सकता है। 

प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग से बचाव

अगर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग से बचना चाहती हैं तो वह अपनी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव करके इस समस्या से बच सकती हैं। यह बदलाव निम्न प्रकार हैं-

1 - प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को नियमित रूप से व्यायाम योग और मेडिटेशन करना चाहिए।

2 - गर्भावस्था के दौर में अगर महिलाएं अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं तो मूड स्विंग की समस्या से बचा जा सकता है।

3 - अगर महिलाओं को धूम्रपान करने की आदत है या वे अल्कोहल का सेवन करती हैं तो प्रेगनेंसी के दौरान इन दोनों चीजों से दूर रहें।

4 - अगर आपका मूड ठीक नहीं है तो आप ज्यादा से ज्यादा समय अपने दोस्त और परिवार वालों के साथ बिताएं।

5 - अगर महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान भरपूर नींद लेंगी तो मूड स्विंग की समस्या से बचा जा सकता है।

6 - मूड स्विंग से बचने के लिए और शिशु की सही देखभाल के लिए महिलाओं का खुश रहना बेहद जरूरी है।

7 - प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है। ऐसे में इस परिस्थिति के लिए खुद को पहले से ही तैयार रखें।

8 - अगर मन में चिंता या तनाव है तो अनुभवी मांओं से आप इस विषय पर बात कर सकते हैं।

9 - बच्चों से जुड़ाव महसूस करने के लिए अन्य बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उनके साथ खुश रहने की कोशिश करें।

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प्रेगनेंसी में मूड स्विंग का उपचार

अगर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को मूड स्विंग होता है तो योग के जरिए समस्या को दूर कर सकती हैं। योग करने से ना केवल तनाव दूर होता है बल्कि थकान से भी छुटकारा मिल जाता है। इसके अलावा महिलाएं मसाज थेरेपी भी ले सकती हैं। ये न केवल अनिद्रा की समस्या को दूर करती है बल्कि चिंता और मूड स्विंग की समस्या से भी राहत दिलाती है। वहीं अगर मूड स्विंग की समस्या ज्यादा हो रही है तो महिलाओं को डॉक्टर दवाइयों के जरिए भी ठीक करते हैं हालांकि यह पड़ाव बहुत बाद में आता है।

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प्रेगनेंसी के दौरान मूड स्विंग में क्या खाएं

अगर महिलाओं को प्रेगनेंसी में मूड स्विंग हो रहा है तो वह अपने आहार में कुछ बदलाव कर कर भी इस समस्या को दूर कर सकती हैं। बदलाव निम्न प्रकार है-

1 - प्रेगनेंसी में प्रोटीन युक्त आहार के साथ-साथ दूध और अन्य डेरी प्रोडक्ट का सेवन करना मूड स्विंग की समस्या को दूर करने में उपयोगी है। बता दें कि इन खाद्य पदार्थों के अंदर अमीनो एसिड पाया जाता है जो ना केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करता है बल्कि मानसिक कार्य में मदद भी करता है।

2 - अगर महिलाएं प्रेगनेंसी में मछली का सेवन करती हैं तो ऐसा करने से भी डिप्रेशन के लक्षणों को कम किया जा सकता है।

3 - अगर महिलाएं अपनी डाइट में मटर, राजमा, चना, दाल आदि को जोड़ती है, इससे अलग गेहूं, अनाज आदि को जोड़ती है। तब भी मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

4 - फल और सब्जियों का सेवन अगर महिलाएं भरपूर रूप से करें तो ऐसा करने से उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व मिल जाते हैं। साथ ही इनका मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।

नोट - ऊपर बताए गए बिंदुओं से पता चलता है कि प्रेगनेंसी में मूड स्विंग होना एक आम समस्या है। ऐसे में इस समस्या के लिए दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव करके और डाइट में थोड़ा सा बदलाव करके दूर किया जा सकता है। अगर महिलाएं ज्यादा समस्या का शिकार हो रही हैं तो वे डॉक्टर से सलाह भी ले सकती हैं। हम महिलाओं को सलाह देते हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान अपनी डाइट में बदलाव करने से पहले एक बार एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। 

 इस लेख में इस्तेमाल की जानें वाली फोटोज़ Freepik से ली गई हैं।
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