मोतियाबिंद का जड़ से सफाया करती है ये 1 छोटी सर्जरी, नहीं है कोई दुष्‍प्रभाव

ज्यादातर लोगों में अंतिम परिणाम धुंधलापन एवं विकृत दृष्टि होते है। मोतियाबिंद का निश्चित कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। हालांकि आज हम आपको मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक सर्जरी के बारे में बता रहे हैं, जिसका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं है।

Atul Modi
Written by: Atul ModiUpdated at: Oct 12, 2018 08:00 IST
मोतियाबिंद का जड़ से सफाया करती है ये 1 छोटी सर्जरी, नहीं है कोई दुष्‍प्रभाव

मोतियाबिंद आंखों का एक सामान्य रोग है। प्रायः पचपन वर्ष की आयु से अधिक के लोगों में मोतियाबिंद होता है, किन्तु युवा लोग भी इससे प्रतिरक्षित नहीं हैं। मोतियाबिंद विश्व भर में अंधत्‍व के मुख्य कारण हैं। 60 से अधिक आयु वालों में 40 प्रतिशत लोगों में मोतियाबिंद विकसित होता है। विशेषज्ञों की मानें तो ऑपरेशन ही इसका एकमात्र इलाज़ है, जो सुरक्षित एवं आसान प्रक्रिया है।

आंखों के लेंस आंख से विभिन्‍न दूरियों की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। समय के साथ लेंस अपनी पारदर्शिता खो देता है तथा अपारदर्शी हो जाता है। लेंस के धुंधलेपन को मोतियाबिंद कहा जाता है। दृष्टिपटल तक प्रकाश नहीं पहुंच पाता है एवं धीरे-धीरे दृष्टि में कमी अन्धता के बिंदु तक हो जाती है। ज्यादातर लोगों में अंतिम परिणाम धुंधलापन एवं विकृत दृष्टि होते है। मोतियाबिंद का निश्चित कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। हालांकि आज हम आपको मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक सर्जरी के बारे में बता रहे हैं, जिसका कोई साइड इफेक्‍ट भी नहीं है।

माइक्रो इनसिशन कैटरैक्ट सर्जरी

दुनिया भर में मोतियाबिंद के ऑपरेशन में आए गुणात्मक बदलावों के मान्यता प्राप्त तरीकों में से एक विधि है माइक्रो इनसिशन कैटरैक्ट सर्जरी (संक्षेप में मिक्स)। इस विधि में 2 एमएम से भी छोटे छिद्र द्वारा मोतियाबिंद (कैटरैक्ट) की शल्य चिकित्सा (सर्जरी) को कारगर ढंग से अंजाम दिया जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह सर्जरी पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि इस सर्जरी को कराने से पहले आप आपने चिकित्‍सक की सलाह जरूर लें।

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सर्जरी की विशेषता

  • इस विधि में सुई के बगैर, टांके के बिना और पट्टी के बगैर ऑपरेशन कर दिया जाता है। इसी कारण ऑपरेशन के बाद मरीजों को अस्पताल में रुकने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। अब ऐसे लेंस नेत्र सर्जनों के पास उपलब्ध हैं, जो सूक्ष्म छिद्र द्वारा प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं।
  • इस तरह के ऑपरेशनों को नियंत्रित (कंट्रोल्ड) वातावरण में किया जाता है। इसलिए साल भर इन आपरेशनों को एक समान गुणवत्ता के साथ करना संभव हो गया है।
  • यह जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह समझना आवश्यक है कि मोतियाबिंद की सर्जरी को किसी भी मौसम में एकसमान सुरक्षित ढंग से किया जा सकता है।

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मिलता है अच्‍छा परिणाम

मिक्स, फेको की एक उन्नत तकनीक है, जिसमें सर्जन को अतिसूक्ष्म छिद्र के होते हुए भी कारगर ढंग से सर्जरी करने की क्षमता मिल जाती है। नेत्र विशेषज्ञ अपने कौशल और सूझबूझ से किसी भी मौसम में एक समान परिणाम दे सकता है। छोटा छिद्र यानी कम छेड़छाड़, यानी नेत्रों में कम से कम ऑपरेशन जनित परेशानी होती है और मरीज को बेहतर दृष्टि प्राप्त हो जाती है।

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