Fri Sep 11, 2026 | 08:22 PM IST

Medically Reviewed by Neha Mohan Sinha , Clinical Nutrition and Dietetics

बार-बार वजन घटता-बढ़ता है? लाइफस्टाइल में करें ये 5 बदलाव, वेट कंट्रोल रहेगा बेहतर

बार-बार वजन घटने-बढ़ने से परेशान हैं? क‍िसी द‍िन वजन बढ़ता है और क‍िसी द‍िन घट जाता है? अगर ऐसा है, तो इसका कारण खराब लाइफस्‍टाइल हो सकती है। देर तक सोना, एक्‍सरसाइज न करना, अनहेल्‍दी डाइट लेने के कारण वजन में बदलाव आता है। आगे जानेंगे लाइफस्‍टाइल में कि‍ए जाने वाले पांच बदलावों के बारे में।

बार-बार वजन घटता-बढ़ता रहना, जिसे अक्सर वेट फ्लक्‍चुएशन कहा जाता है, आज की व्यस्त जीवनशैली की आम समस्या बन चुका है। कई लोग डाइटिंग से तेजी से वजन घटा लेते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों में वजन फिर बढ़ जाता है। यह उतार-चढ़ाव सिर्फ दिखने भर की बात नहीं है, बल्कि मेटाबॉलिज्म, हार्मोनल संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। लंबे समय तक ऐसा चलने पर शरीर की एनर्जी पर बुरा असर पड़ सकता है। अक्सर इसकी वजह बहुत सख्त डाइट, अनियमित खान-पान, नींद की कमी, स्‍ट्रेस और एक्‍सरसाइज का गलत तरीका हो सकता है। अच्छी बात यह है कि कुछ लाइफस्टाइल बदलावों को अपनाकर वजन को स्थिर रखा जा सकता है। इस लेख में हम आपको पांच ऐसे लाइफस्‍टाइल बदलावों के बारे में बताएंगे जि‍नकी मदद से वजन घटने-बढ़ने की समस्‍या को कम करने में मदद म‍िलती है।

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1. कैलोरी कंट्रोल करें- Calorie Intake Regulation

MedilinePlus के मुताब‍िक, कैलोरी कंट्रोल करने से उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। थाली में 60 प्रत‍िशत में सलाद और दही को शाम‍िल करें और 40 प्रत‍िशत में होल ग्रेन्‍स और दाल को शाम‍िल करें। प्रोटीन, फाइबर और हेल्‍दी फैट्स को डाइट में शाम‍िल करें। क्रैश डाइट से बचें, इससे वेट लॉस में मदद म‍िलती है।

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2. स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग- Strength Training

  • स्‍ट्रेंथ ट्रे‍न‍िंग की मदद से घटते-बढ़ते वजन को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।
  • हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार वेट ट्रेन‍िंग और बॉडीवेट एक्‍सरसाइज करें।
  • स्क्वैट, पुश अप्‍स, लंज, डेडलिफ्ट जैसे मूवमेंट्स को रूटीन में शाम‍िल करें।

3. स्‍लीप हाइजीन- Sleep Hygiene

Neha Sinha, Nutritionist At The Nutriwise Clinic, Lucknow ने बताया क‍ि वजन बार-बार घटता-बढ़ता है, तो उसका कारण खराब स्‍लीप हाइजीन हो सकती है। नींद की कमी से हंगर हार्मोन घ्रेलि‍न बढ़ सकता है, इससे भूख ज्‍यादा लगती है और वजन बढ़ सकता है। इससे बचने के ल‍िए स्‍लीप हाइजीन का ख्‍याल रखें। स्‍लीप हाइजीन का ख्‍याल रखने के ल‍िए सोने से पहले स्‍क्रीन टाइम कम करें, सोने और जागने का समय फ‍िक्‍स करें और रोज सात से आठ घंटे की नींद पूरी करें।

4. स्‍ट्रेस मैनेजमेंट- Stress Management

जब आप लंबे समय तक स्‍ट्रेस में रहते हैं, तो वजन में उतार-चढ़ाव आ सकता है। स्‍ट्रेस के दौरान लोग अक्‍सर मीठा या हाई कैलोरी फूड्स का सेवन कर लेते हैं। स्‍ट्रेस के कारण लोग इमोशनल ईट‍िंग या ओवरईट‍िंग का श‍िकार हो जाते हैं। स्‍ट्रेस को मैनेज करने के ल‍िए न‍ियम‍ित योग करें, रोज 15 से 20 म‍िनट वॉक करें और हेल्‍दी डाइट का सेवन करें।

5. कोर्टि‍सोल और स्‍ट्रेस कंट्रोल करें- Cortisol Management

कोर्ट‍िसोल एक स्‍ट्रेस हार्मोन है। लंबे समय तक हाई कोलेस्‍ट्रॉल के कारण वजन में बदलाव देखने को म‍िल सकता है। स्‍ट्रेस हार्मोन को कंट्रोल करने के ल‍िए आराम करें और र‍िकवरी का समय लें। कैफीन का सेवन सीमि‍त करें। जब कोर्टि‍सोल का लेवल कंट्रोल में रहता है, तो वजन को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।

निष्कर्ष:

बार-बार वजन घटने-बढ़ने की समस्‍या को दूर करने के ल‍िए कोर्टि‍सोल असंतुल‍न से बचें स्‍ट्रेस मैनेज करें, स्‍लीप हाइजीन, स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग और कैलोरी इंटेक को कंट्रोल करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 03, 2026 21:07 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Mar 03, 2026 21:07 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Neha Mohan Sinha

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