डायबिटीज होने पर लाइफस्‍टाइल में करें बदलाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 02, 2013

आधुनिक जीवनशैली में डायबिटीज यानी मधुमेह एक आम बीमारी हो गई है। बड़ों के साथ बच्‍चे भी डायबिटीज के शिकार बन रहे हैं। बच्‍चों में यह टाइप 1 डायबिटीज और बड़ों में टाइप 2 डायबिटीज के रूप में देखने को मिल रही है। डायबिटीज शरीर में पैंक्रियाज के ठीक से काम न करने पर होने वाला रोग है।

डायबिटीज रोगीमधुमेह होने के और भी कई कारण हैं लेकिन पैंक्रियाज का ठीक से काम न करना इसका सबसे बड़ा कारण है। पाचक ग्रंथि से कई तरह के हार्मोंस निकलते हैं, जिनमें से इन्‍सुलिन भी होता है। इन्‍सुलिन का कम निर्माण होने पर डायबिटीज की समस्‍या होती है। इसके साथ ही मोटापा और आनुवांशिक कारण भी डायबिटीज के लिए जिम्‍मेदार होते हैं।

डायबिटीज होने के बाद यदि आप अपनी लाइफस्‍टाइल में थोड़ा बदलाव करते हैं तो शरीर पर होने वाले इसके असर को कम किया जा सकता है। इस लेख के जरिए हम बात करेंगे डायबिटीज होने पर आपको अपनी लाइफस्‍टाइल में क्‍या बदलाव करना चाहिए और किस तरह आप डायबिटीज के असर को कम कर सकते हैं।

खाने के समय का ध्‍यान रखें
डायबिटीज के रोगी को अपने खाने के समय का ध्‍यान रखना चाहिए। ताजी और संतुलित आहार लेने के साथ ही भोजन का एक व्‍यवस्थित शेड्यूल होना चाहिए। डायबिटिक व्‍यक्ति को एक बार में भरपेट खाना नहीं खाना चाहिए। दिन में कम से कम तीन से चार बार नियत अंतराल पर भोजन करना चाहिए। खाने के बीच में स्‍नैक्‍स का भी सेवन करते रहें।

व्‍यायाम करें
शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर आप डा‍यबिटीज के खतरों को कम कर सकते हैं। डायबिटीज होने पर नियमित एक्‍सरसाइज करें, यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। नियमित व्‍यायाम से शरीर में इन्‍सुलिन की सही मात्रा बनी रहती है। चिकित्‍सक के परामर्श से आप अपने लिए एक्‍सरसाइज प्‍लान कर सकते हैं। ब्‍लड शुगर के लेवल की भी समय-समय पर जांच करते रहें।

दवा का सेवन
डायबिटीज होने पर चिकित्‍सक द्वारा बतायी गई दवाओं का सही समय पर सेवन करें। दवा लेने में लापरवाही आपके लिए घातक साबित हो सकती है। किसी समस्‍या के होने पर अपने डॉक्‍टर से परामर्श करना चाहिए। यदि आपको हाई कोलेस्‍ट्रॉल या हाई ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या है तो बिना चिकित्‍सक से सलाह लिए दवा न लें।

बीमार होने पर क्‍या करें
बीमार होने पर शरीर में तनाव से संबंधित हार्मोन का निर्माण होता है। यह हार्मोन बीमारी से लड़ने में आपकी मदद करता है, लेकिन इससे ब्‍लड शुगर का स्‍तर भी बढ़ जाता है। ऐसे में आपको डायबिटीज की दवाओं का सेवन बंद नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही कोशिश करें कि आपकी खाने की दिनचर्या में कोई बदलाव न हो।

अल्‍कोहल का सेवन न करें
डायबिटीज के रोगी को अल्‍कोहल का सेवन कम से कम करना चाहिए। अल्‍कोहल के सेवन से शरीर में ब्‍लड शुगर लेवल कम हो जाता है। शराब पीने या अन्‍य किसी तरह अल्‍कोहल के सेवन से डायबिटीज में होने वाली परेशानी बढ़ सकती हैं। डायबिटीज में अल्‍कोहल से आंखों संबंधी परेशानी होने का खतरा रहता है। डायबिटीज के कंट्रोल में रहने पर आप डॉक्‍टर की अनुमति से खास मौके पर खाने के साथ कुछ मात्रा में शराब पी सकते हैं।

तनाव से दूर रहें
यदि आप तनाव में हैं तो इससे आपकी दिनचर्या पर असर पड़ेगा। दिनचर्या प्रभावित होने से आपके व्‍यायाम और खाने आदि का समय पर भी असर पड़ता है। तनाव से आपके ब्‍लड शुगर लेवल पर भी असर पड़ सकता है। तनाव से छुटकारा पाने के लिए मेडिटेशन आदि का सहारा लें। बेहतर यही होगा कि आप तनावमुक्‍त रहने की हर संभव कोशिश करें।

इस तरह आप भी अपनी लाइफस्‍टाइल में बदलाव के जरिए डायबिटीज में होने वाले खतरों को कम कर सकते हैं।

 

 

 

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