सामान्य नहीं है धीरे सुनना या बिना बोले सुनना, हो सकते हैं अकॉस्टिक न्यूरोमा के लक्षण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 08, 2018
Quick Bites

  • कई बार कुछ लोगों को सामान्य से धीरे या कम सुनाई देता है।
  • कान से जुड़ी ऐसी ही कई समस्याओं का कारण अकॉस्टिक न्यूरोमा हो सकता है।
  • ये एक तरह का ट्यूमर होता है मगर इससे कैंसर का खतरा नहीं होता है।

कई बार कुछ लोगों को बिना किसी के बोले हुए ही आवाज सुनाई देती है, जिसे आम लोग कान बजना कहते हैं। ऐसे ही कई बार कुछ लोगों को सामान्य से धीरे या कम सुनाई देता है। कान से जुड़ी ऐसी ही कई समस्याओं का कारण अकॉस्टिक न्यूरोमा हो सकता है। ये एक तरह का ट्यूमर होता है मगर इससे कैंसर का खतरा नहीं होता है और ये बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है। इसलिए शुरुआत में इसका पता नहीं लगता है। ये ट्यूमर रोगी के कान और चेहरे को प्रभावित कर सकता है।

अकॉस्टिक न्यूरोमा

अकॉस्टिक न्यूरोमा को मेडिकल भाषा में वेस्टिब्युलर स्कवैनोमा भी कहते हैं क्योंकि इसका ट्यूमर जिस नस को प्रभावित करता है उसको वेस्टिब्युलर कहते हैं। ये नस कान और दिमाग के बीच की सबसे महत्वपूर्ण नस होती है। इसलिए इस रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित कान और चेहरा ही होता है। ट्यूमर के कारण इस नस पर दबाव पड़ता है और जिससे रोगी की सुनने की क्षमता और शरीर का संतुलन बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा आस-पास की अन्य नसों पर दबाव पड़ने पर चेहरे के अलग-अलग एक्सप्रेशन जैसे हंसने, रोने, मुस्कुराने, बोलने और मुंह खोलने जैसी क्रियाएं भी बाधित हो सकती हैं।

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हो सकता है बहरापन

अकॉस्टिक न्यूरोमा होने पर ट्यूमर के कारण नसों पर पड़ने वाले दबाव के कारण मरीज बहरा हो सकता है, उसके आवाज सामान्य से धीरे सुनाई पड़ सकती है या उसके कान बजने के समस्या हो सकती है। अकॉस्टिक न्यूरोमा आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए इससे होने वाली परेशानियां भी धीरे-धीरे बढ़ती हैं और विकराल रूप लेती जाती हैं। कई बार कुछ लोगों में इसका ट्यूमर अचानक तेजी से बढ़ना भी शुरू हो सकता है और इसकी वजह से कुछ दिन में मरीज के बहुत से अंग खराब हो सकते हैं लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में होता है।

अकॉस्टिक न्यूरोमा के लक्षण

अकॉस्टिक न्यूरोमा होने पर चूंकि इसका ट्यूमर बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए सुनने की क्षमता प्रभावित के अलावा इससे कोई खास परेशानी नहीं होती है। आमतौर पर लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि उनको लगता है कि कम सुनना या धीरे सुनना उम्र का प्रभाव है। इसी वजह से ये रोग लंबे समय तक बिना इलाज के बढ़ता रहता है। आमतौर पर अकॉस्टिक न्यूरोमा का सबसे पहला लक्षण एक कान से कम सुनाई देना है। इसके साथ-साथ कान बजना और कान में भारीपन लगना भी इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं। कुछ मामलों में रोगी अचानक से बहरा हो सकता है। इसके अलावा भी इस बीमारी के कुछ अन्य लक्षण हैं।

  • शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी होना
  • दिमाग घूमना या आसपास की चीजों को चलते-घूमते हुए महसूस करना
  • चेहरे की कमजोरी
  • खाने-पीने का स्वाद न मिलना
  • कभी-कभी चेहरा सुन्न होना या चेहरे पर झनझनाहट महसूस करना
  • खाने को निगलने और चबाने में परेशानी महसूस करना
  • सिरदर्द की समस्या
  • निर्णय लेने में परेशानी होना

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अकॉस्टिक न्यूरोमा का इलाज

चूंकि अकॉस्टिक न्यूरोमा बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए कई बार शुरुआती स्टेज में इसे दवाओं से ही ठीक किया जा सकता है। लेकिन अगर ये थोड़ा बड़ा हो गया है तो सर्जरी के द्वारा ही इसे ठीक किया जा सकता है।

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