बचपन में संगीत सीखने से बुढ़ापे में दिमाग बना रहता है तेज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 06, 2013

Music makes your brain sharperअगर आपको बचपन से प्‍यानो या अन्‍य कोई संगीत उपकरण बजाने का शौक रहा है, तो यकीन मानिये इससे आपको फायदा ही हुआ है। एक नये शोध में यह बात सामने आयी है कि बचपन में संगीत अध्‍याय सीखने से बुढ़ापे में दिमाग और सुनने की क्षमता तेज बनी रहती है।

 

यहां तक कि 40 वर्ष की उम्र पार कर चुके व्‍यस्‍कों, जिन्‍होंने बरसों से संगीत उपकरण नहीं बजाया, को भी बचपन में की गयी इस मेहनत का लाभ होता है। शोधकर्ताओं का कहना है, ' यह शोध बच्‍चों में संगीत शिक्षा का लाभ बुढ़ापे में भी मिलता है।'


इस शोध में यह बात साबित हुयी है कि मस्तिष्‍क कितनी तेजी से स्‍वर ध्‍वनियों को समझता है। हालांकि हम यही समझते हैं कि बहरेपन की शुरुआत कानों से होती है, लेकिन मस्तिष्‍क भी हमें सब चीजें साफ-साफ सुनने में मदद करता है। अगर आवाज बहुत धीमे-धीमे आए, तो शोर-शराबे वाली जगह पर उसे सुन पाना काफी मुश्किल होता है।


अमेरिका के इलिनॉय स्थित नार्थवेस्‍टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 'डा' ध्‍वनि सुनाने के बाद 44 स्‍वस्‍थ विशेषज्ञों के मस्तिष्‍क का निरीक्षण किया। जितने वर्ष महिलाओं अथवा पुरुषों ने संगीत सीखने में बिताये थे, उतनी तेजी से उनके मस्तिष्‍क की कोशिकायें और न्‍यूरॉन ने उस ध्‍वनि पर प्रतिक्रिया की।


वे लोग जिन्‍होंने कम से कम पांच वर्ष संगीत अभ्‍यास किया था, उनका मस्तिष्‍क उन लोगों के मुकाबले जिन्‍होंने कभी संगीत नहीं सीखा, उस ध्‍वनि पर प्रतिक्रिया देने में सेकेण्‍ड के हजारवें हिस्‍से जितना तेज था। न्‍यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित हुई इस रिपोर्ट में बताया गया कि प्‍यानो व अन्‍य उपकरणों की अपनी भूमिका होती है।


टेक्‍सॉस यूनिवर्सिटी के ब्रेन साइंटिस्‍ट माइकल किलगार्ड का कहना है, ' एक मिलीसेकेण्‍ड तेज होना भले ही बहुत ज्‍यादा न लगे, लेकिन मस्तिष्‍क समय को लेकर काफी संवेदनशील होता है। और लाखो न्‍यूरॉन्‍स के बीच एक मिलीसेकेण्‍ड तेज होना व्‍यस्‍कों के जीवन में वा‍स्‍तविक अंतर पैदा कर सकता है। इस शोध से यह बात साबित होती है कि अपने मस्तिष्‍क में जो निवेश हम शुरुआती जीवन में करते हैं, उसके लाभ हमें जीवन में बाद में मिलते रहते हैं।




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