निमोनिया के लिए भारतीय वैज्ञानिक ने खोजा नया इलाज

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 06, 2013

scientists find new treatment for pneumoniaफेफड़े के संक्रमण एवं निमोनिया के रोगी अपनी इस बीमारी को हल्के में न लें, क्योंकि लापरवाही मरीज के लिए घातक हो सकती है। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के टीवी एण्ड चेस्ट डिपार्टमेंट ने फेफड़े के संक्रमण एवं निमोनिया से ग्रस्त मरीजों के लिए अब बेहतर एवं सटीक इलाज विकसित किया है।

 

यह बेहद सकारात्‍मक परिणाम सुप्रसिद्ध चेस्ट रोग विशेषज्ञ एवं विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डाक्‍टर एस. के. अग्रवाल के निर्देशन में उनके छात्र डॉ. अरविन्द कुमार मिश्र द्वारा दो साल किये गये शोध के बाद सामने आये हैं। इससे फेफड़े के संक्रमण एवं निमोनिया से होने वाली मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है।

 

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि इस विधि में खून में प्रो कैल्सिसटोनिन (पीसीटी) की मात्रा नापी जाती है। अगर वह कम पायी गयी तो फेफड़े का संक्रमण एवं निमोनिया को साधारण दवाओं से ठीक किया जा सकता है, अगर इसकी मात्रा बढ़ी हुई पायी गयी तो तुरन्त आईसीयू में भर्ती किया जाता है।

 

प्रो. अग्रवाल का कहना है कि "सीरम" प्रो. कैल्सिसटोनिन जांच कराने से रोग का बेहतर आकलन करके सटीक इलाज शुरु किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सामान्य लोगों के खून में "सीरम" की मात्रा 0.1 जीरो प्वाइंट एक, नैनो ग्राम 1 एमएल से भी कम होती है। इसके बढ़ने से समस्या शुरू होती है।

 

प्रो. अग्रवाल ने कहा कि खून की पीसीटी जांच से अब तक 80 से ज्यादा गंभीर मरीजों को पिछले दो साल में ठीक किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि निमोनिया की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन गंभीर निमोनिया होने पर 50 प्रतिशत से ज्यादा रोगी मर जाते हैं। उन्होंने कहा कि फेफड़े के गंभीर संक्रमण एवं निमोनिया से ग्रस्त रोगियों को समय पर उचित इलाज करके बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 65 वर्ष से ज्यादा उम्र वालों को अगर यह बीमारी हो जाती है, तो बचाना मुश्किल होता है।

 

उन्होंने कहा कि पीसीटी की मात्रा 5 नैनो ग्राम होने पर मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि शोध के दौरान 160 मरीजों को चिह्नित किया गया था, जिन्हें फेफड़े का संक्रमण एवं निमोनिया था।


 

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